शिशु मंदिर में हिंदी भाषा की महत्ता पर कार्यक्रम आयोजित, गृहमंत्री के कार्यक्रम का लाइव कवरेज देखा
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । सरस्वती विद्या मंदिर विवेकानन्दपुरम में हिंदी भाषा की महत्ता पर कार्यक्रम आयोजित किया गया वहीं हनुमान बाग शिशु मंदिर में प्रदेश में चिकित्सा का शिक्षण हिंदी में हो, इसी कार्यक्रम में मेडिकल की तीन पुस्तकों का विमोचन करने के लिए देश के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा किया गया कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विद्यार्थियों द्वारा देखा गया । वहीं प्रतिष्ठित व्यापारी मयंक सिंघई द्वारा विद्यालय के लिए एलईडी टेलीविजन प्रदान की गई, जिससे पूरे विद्यालय में हर्ष व उल्लास का वातावरण बना रहा।
वही शिशु मंदिर के विवेकानंदपुरम विद्यालय में आचार्य दीपेश विश्वकर्मा ने हिन्दी के महत्व की बात करते हुए बताया की हिन्दी भारत में सम्पर्क भाषा का कार्य करती है और कुछ हद तक पूरे भारत में आमतौर पर एक सरल रूप में समझी जानेवाली भाषा है। हिन्दी यूरोपीय भाषा परिवार के अंदर आती है। हिन्दी की सबसे बडी विशेषता यह है कि यह जो बोली जाती है वही लिखी और पढ़ी भी जाती है जो अन्य भाषाओं के संदर्भ में नहीं है।
विशेषकर अंग्रेजी के संबंध में जो आज के आधुनिक दौर में यानि विशेष कर भारत के कुछ खास वर्गो के लोगों के बारे मे जो हिन्दी बोलने में शर्मीदंगी महसूस करते हैं और अंग्रेजी बोलना ज्यादा पंसद करते हैं। दोष हम जैसे लोगों का भी है कि हम अंग्रेजी बोलने वालों को ज्यादा पढ़ा लिखा और ज्ञानी समझते है, हिन्दी वालों की उपेक्षा करते हैं।
“हिन्दी” सिर्फ भाषा नहीं बल्कि हिन्दी के द्वारा भारत के लोग एक दूसरे से काफी अच्छी तरह से जुड़ सकते है और देश की तरक्की को एक नई ऊँचाईयों तक ले जा सकते है। लोगों का ऐसा मानना है कि हिन्दी जाने बिना भी बहुत सारा काम हो सकता है। भारत के लोग कभी भी अंग्रेजी को मुख्य भाषा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकते है। हिन्दी भाषा भारत के जन-मन मे पैठ बना चुकी है। भारत के लोग बचपन से ही इसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि यह एक सरल भाषा है और इसका इस्तेमाल करना बहुत आसान है। भारत मे हिन्दी के बिना बहुत सारा काम नहीं हो सकता है क्योंकि यहां पर 70 से 80 प्रतिशत लोग अंग्रेजी नहीं जानते है। अगर उन्हें संवाद करना हो तो हिन्दी जानना ही पड़ता है। हिन्दी सीखने में ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ता है। यहां तक कि दक्षिण भारत के लोग भी हिंदी फिल्म देखकर हिंदी सीख जाते है। भारत के अधिकांश लोगों की “मातृभाषा” हिंदी होने की वजह से उन्हें बोलने और समझने में कभी समस्या नहीं होती है। बहुत सारे लोग बिना स्कूल गए भी बहुत अच्छी हिंदी बोल लेते है। हिंदी मे शब्दों की भरमार है। इस भाषा में भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त किया जा सकता है। अगर लोगों को लगता है कि हिंदी का भविष्य अच्छा नहीं है तो ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है हिंदी का महत्व स्थापित हो गया है। यह भाषा स्वाधीनता संग्राम के समय समूचे देश को आपस मे जोड़ने वाली सबसे सशक्त संपर्क भाषा बन गई थी। हिन्दी राष्ट्रीय एकता का मार्ग प्रशस्त करती है और यह धागा हमें और आपको एक सूत्र में मजबूती से बांध सकती है।
विद्यालय के प्राचार्य प्रकाश शर्मा ने कहा कि भारत सरकार ने हिंदी के महत्व को समझा और आज राष्ट्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी ने भोपाल आकर मेडिकल की तीन पुस्तकें जो हिंदी में है को लागू किया है आगे चलकर महाविद्यालयों की शिक्षा इंजीनियरिंग आदि में भी हिन्दी माध्यम में संचालित की जाएगी। मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया



