फसल की अच्छी वृद्धि के लिए सर्दी का इंतेजार
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । नवम्बर का माह आधे से अधिक निकल चुका है लेकिन तेज ठंड का अभी भी इंतेजार है सुबह के समय ओस भी नहीं गिर रही है। ठंड न पड़ने की वजह से फसलों पर इसका असर पड़ रहा है। दिन का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। वहीं रात के तापमान भी नार्मल है। ठंड नहीं पड़ने से जहां फसलों पर असर पड़ रहा है वहीं गर्म कपड़ो के बाजार भी ठंडे डले हुए है। दुकानदार सर्दी पढ़ने का इंतेजार कर रहे है ताकि उनका गर्म माल बिक सके।
किसानों ने चना मसूर, गेहूँ सहित अन्य फसलें बोई है तो कुछ इलाकों में अभी बोवनी चल रही है। बोवनी के महीने भर पौधों का अंकुरण होने के बाद उनकी वृद्धी पर गर्मी का असर पड़ रहा है। किसानों के मुताबिक ऐसे में फसलों को सिंचाई की सख्त जरूरत है। मौसम में उमस से चना व मसूर के पौधे नीचे से सूख रहे है। इसकी ग्रोथ रूक रही है। किसानों का कहना है कि मौसम में प्रतिकूल होने से चना मसूर लहसुन प्याज इससे प्रभावित है। दिन का तापमान अधिक बना रहता है इससे पोधे सूख रहे है प्याज़ के धरे भी इससे प्रभावित है। चना व मसूर में पानी दिया जा रहा है लोग अपने निजी जल स्त्रोतों से पानी दे रहे हैं लेकिन जिन किसानों के पास आने की व्यवस्था नहीं है उन्हें आने वाले समय की चिंता भी सता रही है। नदी नालों में भी पानी कम हो गया है । ऐसे किसान मावठा गिरने का इंतजार बेसब्री से कर रहे हैं।
लोग ठंड बढ़ने के लिए और मावठा गिरने के लिए जतन करने लगे है वे जगह जगह पूजा पाठ इबादत कर ठंड बढ़ने की प्रार्थना दुआएं कर रहे है।
किसान नेता सौरवम शर्मा का कहना है कि हमारे क्षेत्र के लोग सेमरी जलाशय की नेहरों पर निर्भर हैं लेकिन नाम मात्र के लिए पानी छोड़ा और नहर बीच में से टूट गई जिससे पानी आगे नहीं पहुंच पा रहा है इस समय खेती के लिए पानी की महती आवश्यकता है वही ठंड भी नहीं पड़ रही है जिससे कि कुछ ओस गिरने से फायदा हो सके।
किसान अवधेश पटेल, नवल किशोर यादव, प्रदीप दुबे, आदि का कहना है कि नवंबर के माह में जिस प्रकार की ठंड पढ़ना चाहिए वह अभी नहीं पढ़ रही जिससे किसानी पर असर पड़ रहा है। सेमरी जलाशय विभाग को तेजी के साथ नेहरों में पानी छोड़ना चाहिए।



