सरकारी शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल: वही पुराना स्टाफ और वही बच्चे, जबकि कई तरह की सुविधाओं का रखा प्रावधान
टाट-पट्टी पर सीएम राइज स्कूल के बच्चे, नाम मिला पर सुविधाएं जस की तस
क्या है मुख्यमंत्री का सपना
सिलवानी। प्रदेश सरकार की ओर से निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में भी बच्चों की पढ़ाई बेहतर हो इसके लिए उन्होंने बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराईं। इसे लेकर सीएम राइज स्कूल का खाका तैयार किया गया और तमाम सुविधाओं से लैस ये स्कूल इसी साल शुरू ही कर दिए। स्कूल खोलने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी इस व्यवस्था का ताना-बाना अपने भाषण के दौरान भी विभिन्न जिलों में पहुंचकर दे रहे हैं। पर जमीन पर स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। क्या इसे स्थानीय कमी कहीं जाए या फिर तैयारियों में हुई लेटलतीफी के कारण शासन की ओर से दी गई सुविधाओं में कमी। बात जो भी हो, लेकिन इतना जरूर है सिलवानी मुख्यालय पर अभी बहुत कुछ होना बाकी है। अभी तो सीएम राइज स्कूल को सिर्फ नाम ही मिला है, लेकिन किसी तरह की सुविधाएं नहीं मिली। मुख्यालय पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई को लेकर सीएम राइज स्कूल को तीन भागों में बांटा है। लेकिन स्कूलों में अभी तक परीक्षा पास करके आने वाले प्राचार्य तक नहीं है, इतना ही नहीं जो अन्य स्टाफ है वह भी पुराना ही है। इस स्कूल में मॉडल स्कूल या उत्कृष्ट स्कूल के अच्छे नंबर लाने वाले बच्चों को प्रवेश दिया जाना था। लेकिन अभी विद्यार्थी भी वही पुराने हैं। दूसरे शब्दों में यूं कहें कि सीएम राइज स्कूल का पूरा खाका ही पुराना है, सिर्फ इसे नाम नया दिया गया है।
टेबल-कुर्सी नहीं
कक्षा 1 से लेकर 5 तक काजी मोहल्ला स्कूल में स्कूल संचालित हो रहा है, लेकिन प्राथमिक कक्षाओं की यदि बात करें तो इन कक्षाओं के लिए अभी कक्ष भी नहीं है। पूरा प्राथमिक स्कूल सिर्फ एक कक्षा में संचालित हो रहा था। जिसमें कक्षा नर्सरी से लेकर पांचवी तक के बच्चे बैठे हुए थे। लेकिन इनकी संख्या किसी एक क्लास में पढ़ने वाले बच्चों से भी कम थी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान का सपना है
सीएम राइज स्कूल के माध्यम से वह गरीब बच्चे जो निजी स्कूलों में नहीं पढ़ पाते। यदि उन्हें बेहतर शिक्षा मिले तो बड़े-बड़े पदों पर भी पहुंच सकते हैं। इन बच्चों को ऐसे स्कूलों में निजी स्कूलों की तरह ही शिक्षा दी जाए। जिसमें पढ़ाई से लेकर बेहतर व्यवस्थाएं और स्मार्ट क्लास। पढ़ाई के लिए मिले। इसके अलावा बच्चों को छात्रावास के साथ ही बस आदि की भी सुविधा दी जाए। बच्चा प्रतिदिन स्कूल में पहुंच सके, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखें तो उनके इस सपने को साकार होने में खासा समय लग सकता है। अभी जिनका चयन हुआ है, उनमें से कई शिक्षकों ने ज्वाइन नहीं किया है जो शिक्षक यहां पर आ रहे हैं। उनकी काउंसलिंग भोपाल से होगी। इसलिए अभी वह यहीं पर ज्वाइन है। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का किसी तरह का टेस्ट नहीं लिया जा रहा है। क्योंकि ऐसे कोई निर्देश फिलहाल नहीं आए हैं, जो बच्चे स्कूल में पढ़ रहे थे। वही अभी अध्ययनरत हैं। जो नए विद्यार्थी आ रहे हैं उनको पक्षियों की कैपेसिटी के अनुसार प्रवेश दिया जा रहा है।
ये भी रहेंगी सुविधा
स्कूल में तमाम तरह की सुविधाओं के साथ ही प्रार्थना के लिए संगीत के साथ यह प्रार्थना कराई जाए, इसके लिए तबला और हारमोनियम सहित अन्य सामग्री खरीदने के लिए बजट जारी किया गया है। स्कूल के माध्यम से ही बच्चों के लिए बस चलाई जाएगी जो अलग-अलग स्थानों से निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचेगी। विद्यार्थियों के साथ ही सभी शिक्षक भी एक ड्रेस में आए इसके लिए सभी स्कूलों में शिक्षकों का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है। स्कूल में हिंदी के साथ ही अंग्रेजी मीडियम से भी पढ़ाई कराई जाएगी ताकि यहां पढ़ने वाले बच्चे दोनों ही भाषाओं में पारंगत रहें। विद्यार्थियों के लिए जो शिक्षक पढ़ाएंगे उनका हर साल रिपोर्ट कार्ड भी तैयार होगा। स्कूल में बच्चों का परीक्षा परिणाम और उनके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर यह रिपोर्ट कार्ड बनाया जाएगा।



