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10 सितम्बर 2023: अजा एकादशी पर बन रहे हैं 2 शुभ संयोग, जानें मुहूर्त, महत्व, पारण का समय और पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🚩 10 सितम्बर 2023: अजा एकादशी पर बन रहे हैं 2 शुभ संयोग, जानें मुहूर्त, महत्व, पारण का समय और पूजा विधि
🥏 HEADLINES
♦️ अजा एकादशी की तारीख
♦️ इस दिन रख सकते हैं व्रत
♦️ पूजा का शुभ मुहूर्त
📚 हिंदू शास्त्रों के अनुसार हर व्रत का अपना महत्व और लाभ होता है। ऐसा माना जाता है कि व्रत रखने से भगवान का दिव्य आशीर्वाद मिलता है और भक्तों पर सुख और समृद्धि की वर्षा होती है। सभी व्रतों में एकादशी व्रत का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। हर वर्ष 24 एकादशियां होती हैं। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी या 11वें दिन को अजा एकादशी मनाई जाती है। इस बार 10 सितंबर, रविवार को अजा एकादशी पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उन्हें समर्पित व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। दृक पंचांग के अनुसार, इस साल अजा एकादशी के दिन 2 खास संयोग बनने जा रहा है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से कि अजा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा? व्रत के नियम क्या हैं और इसके लिए शुभ मुहूर्त क्या है।
🤷🏻‍♀️ एकादशी तिथि कब है?
👉🏽 भाद्रपद कृष्ण एकदशी तिथि की शुरुआत 9 सितंबर को शाम 07 बजकर 17 मिनट से होगी
👉🏽 एकादशी तिथि का समापन 10 सितंबर को रात 09 बजकर 28 मिनट पर होगा.
➡️ उदयातिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 10 सितंबर दिन रविवार को रखा जाएगा.
➡️ पारण का समय- 11 सितंबर 2023 सुबह 6 बजकर 04 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक कर सकते हैं.
🍱 अजा एकादशी व्रत की पूजन सामग्री
श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति, पुष्प, नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप, घी, पंचामृत, तेल का दीपक, अक्षत, तुलसी दल, चंदन, मिष्ठान जरूर रखें.
⚛️ अजा एकादशी 2023 पर बन रहे ये 2 शुभ संयोग
इस साल अजा एकादशी के दिन दो शुभ संयोग बन रहे हैं। पहला रवि पुष्य योग और दूसरा सर्वार्थसिद्धि योग है।
🌸 रवि पुष्य योग: सायं 05: 06 मिनट से अगले दिन प्रातः 06:0 4 मिनट तक
🌟 सर्वार्थ सिद्धि योग: सायं 05: 06 मिनट से 11 सितंबर प्रातः 06 बजकर 04 मिनट तक
🫵🏼 अजा एकादशी व्रत की पूजा विधि
🔹 एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
🔹 कोशिश करें कि इस दिन नए कपड़े पहनें।
🔹 इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
🔹 फिर मंदिर की साफ सफाई करें।
🔹 इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर और उसपर भगवान विष्णु की प्रतीमा या तस्वीर स्थापित करें।
🔹 इसके बाद एक लोटे में गंगाजल लेकर उसमें तिल, रोली और अक्षत मिलाएं।
🔹 फिर अगरबत्ती और दीपक जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें।
🔹 भगवान विष्णु को पुष्प अर्पित करें।
🔹 इसके बाद एकादशी की कथा का पाठ करें।
🔹 अब भगवान विष्णु को तुलसी जल और तिल का भोग लगाएं।
🗣️ अजा एकादशी व्रत कथा
एक दिन राजा लकड़ियां काटने के लिए जंगल में गए थे. वहां लकड़ियां लेकर घूम रहे थे, अचानक देखा कि सामने से ऋषि गौतम आ रहे हैं. राजा ने उन्हें देखते ही हाथ जोड़े और बोले हे ऋषिवर प्रणाम, आप तो जानते ही हैं कि मैं इस समय जीवन के कितने बुरे दिन व्यतीत कर रहा हूं. आपसे विनती है कि हे संत भगवान मुझ पर अपनी कृपा बरसाएं. मुझ पर दया कर बताइये कि मैं ऐसा क्या करूं जो नरक जैसे इस जीवन को पार लगाने में सक्षम हो पाऊं. ऋषि गौतम ने कहा हे राजन तुम परेशान न हो. यह सब तुम्हारे पिछले जन्म के कर्मों की वजह से ही तुम्हें झेलना पड़ रहा है. कुछ समय बाद भाद्रपद माह आएगा. उस महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी अजा एकादशी का तुम व्रत करो उसके प्रभाव से तुम्हारा उद्धार होगा तुम्हारे जीवन में सुख लौट आएगा.
राजा ने ऋषि के कहे अनुसार उसी प्रकार व्रत किया. व्रत के प्रभाव से राजा को अपना राज्य वापस मिल गया, इसके बाद उस समय स्वर्ग में नगाड़े बजने लगे तथा पुष्पों की वर्षा होने लगी. उसने अपने सामने ब्रह्मा, विष्णु, महेश तथा देवेन्द्र आदि देवताओं को खड़ा पाया. उसने अपने मृतक पुत्र को जीवित तथा अपनी पत्नी को राजसी वस्त्र तथा आभूषणों से परिपूर्ण देखा. व्रत के प्रभाव से राजा को पुनः अपने राज्य की प्राप्ति हुई. वास्तव में एक ऋषि ने राजा की परीक्षा लेने के लिए यह सब कौतुक किया था, परन्तु अजा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ऋषि द्वारा रची गई सारी माया समाप्त हो गई और अन्त समय में हरिश्चन्द्र अपने परिवार सहित स्वर्ग लोक को पधार गये

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