16 दिन पहले पदभार ग्रहण करने वाली नगर की नई सरकार के सामने कई चुनौतियां
अतिक्रमण से मुक्ति बड़ी चुनौती
महिला के रूप में पांचवीं नपाध्यक्ष हैं सविता सेन
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। इस बार नगर पालिका अध्यक्ष सविता जमना सेन नई नगर सरकार को कई चुनोतियों का सामना करना पड़ेगा। इसके पूर्व सविता सेन के पति जमना सेन ने नपाध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन रह चुके थे। जमना सेन ने नपाध्यक्ष के लिए सीधे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप चुनाव लड़ा और जीते थे। नपाध्यक्ष सविता सेन के पहले गल्ला व्यापारी मिथलेश मनोज सोनी की मां श्यामा देवी सोनी वर्ष1997 में इसके बाद 6 माह के लिए कांग्रेस की सलमा सिद्दीकी, मंजू धीरेन्द्र सिंह कुशवाह, वर्षा माहेश्वरी भी नपाध्यक्ष रह चुकी हैं। लेकिन भाजपा से वार्ड 13 से पार्षद का चुनाव सविता जमना सेन ने चुनाव लड़ा और जीते। नपाध्यक्ष की कुर्सी इस बार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित थी। दोबारा से नगर सरकार की कुर्सी पर इतिहास रचते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता जमना सेन, स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी की मदद से उनकी धर्मपत्नी सविता सेन को राजनैतिक जोड़तोड़ कर बिठाने में सफल रहे। सविता सेन 5वीं महिला नपाध्यक्ष कुर्सी हथियाने का गौरव हासिल हुआ। लेकिन मौजूदा समय में उनके सामने चुनोतियाँ भी बहुत हैं। दरअसल यह दृश्य नगर पालिका कार्यालय के बाहर का है। तस्वीर से समझिए शहर में पार्किंग व्यवस्था की जमीनी हकीकत। यहां बैंकों के अलावा प्रायवेट संस्थाओं के ऑफिस के बाहर वाहन पार्किंग समस्या ट्रैफिक व्यवस्था के लिए सिरदर्द बन जाती है। हालांकि पहले नगरपालिका परिषद ने शहर के महामाया चौक में वाहन पार्किंग पॉइंट बना दिया था।वर्तमान में यहां फुटकर सब्जी मार्केट चल रहा है तो वाहनों की पार्किंग फेल हो चुकी है तमाम व्यवस्था। सैकड़ों हितग्राहियों के आवेदन और पीएम आवास योजना की तीसरी किस्त लंबित हैं।
महिला के रूप में पांचवीं नपाध्यक्ष हैं सविता सेन
रायसेन नगर पालिका में अब तक जितने भी अध्यक्ष रहे हैं इनमें महिला के रूप में सविता जमना सेन पांचवी अध्यक्ष हैं। इससे पहले श्यामा देवी सोनी, सलमा सिद्दीकी, वर्षा माहेश्वरी, मंजू धीरेन्द्र सिंह कुशवाह ने इस पद को सुशोभित किया है। नगर सरकार की नई नपाध्यक्ष सविता सेन का कहना था कि यह हम महिला शक्ति के लिए गर्व की बात है। भाजपा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है तो हम महिला पार्षदों के सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देंगे। शहर विकास के लिए हम गणमान्य नागरिकों और जन प्रतिनिधियों का मार्गदर्शन भी लेंगे। शहर के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
आखिरकार रायसेन नगर पालिका परिषद कार्यालय में लंबे समय से खाली पड़ी नपा अध्यक्ष पद की कुर्सी 16 दिन पूर्व भर गई है। सोमवार 10 अगस्त 2022 को भव्य कार्यक्रम के दौरान पदभार ग्रहण करने के बाद अध्यक्ष सविता जमना सेन ने विधिवत रूप से पार्षदों के बीच शपथ लेकर कार्यभार संभाल लिया है। इस समय उनके समक्ष कई बड़ी समस्याएं हैं। जिन्हें पहले हल करना बेहद जरूरी है। इन समस्याओं से शहर का एक बड़ा वर्ग इन दिनों जूझ रहा हैै। हम बात कर रहे हैं हाल ही में हुई लगातार बारिश और बाढ़ की वजह से प्रभावित हुए लोगों की। इन्हें इस समय तात्कालिक मदद की बेहद जरूरत है। वह नगर पालिका और जिला प्रशासन से मदद की आस लगाए हुए हैं। इस बारिश में उनका मिट्टी से बना कच्चा घर मिट्टी में मिल चुका है। इसमें खाने पीने से लेकर ओढ़ने बिछाने का पूरा सामान नष्ट हो गया है। सबसे पहली बड़ी समस्या तो इस समय हो रही बारिश में अपने आपको बचाना है। इससे बचने कुछ लोगों ने तो किराए के मकान में आश्रय ले लिया है। लेकिन कुछ इतने गरीब और असहाय हैं कि वे यह भी व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे लोगों को कुछ समय के लिए किसी सरकारी भवन में आश्रय दिलाया जाए। ऐसे परिवारों के समक्ष दूसरा संकट भोजन और रोजगार का है। क्योंकि दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाले लोगों के पास इस समय इतनी जमापूंजी भी नही हैं कि वे बाजार से सामान खरीदकर परिवार का पेट भर सकें। बिगड़े मौसम की वजह से मजदूरी का संकट भी पैदा हो गया है। इनकी दिक्कतों को दूर करने के लिए नगर सरकार की नपाध्यक्ष सविता जमना सेन, स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी, एसडीएम एलके खरे, तहसीलदार अजय प्रताप सिंह पटेल, कस्बा पटवारी, गिरदावल सभी पार्षदों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर अति वर्षा बाढ़ के पानी के नुकसान का बिंदुवार आंकलन कराया गया था।
अतिक्रमण और पार्किंग प्रमुख मुद्दा…..
नई नगर पालिका अध्यक्ष सविता जमना सेन के समक्ष जो प्रमुख मुद्दे हैं। इनमें सबसे पहला शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना है, क्योंकि इसके बिना शहर का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा बेलगाम पार्किंग हैं। इसके लिए शहर में जगह नहीं मिल पा रही है। इसकी व्यवस्था करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। रिहायशी इलाकों सहित सागर रोड पाटनदेव और गल्ला मंडी मोड़ प्रमुख मार्गों पर व्यवसायिक परिसरों की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन पार्किंग के लिए जगह नहीं बच रही। पार्किंग के नाम पर जो तलघर बनाए गए हैं । उनका उपयोग भी व्यवसायिक रूप में किया जा रहा है। तीसरी समस्या हॉकर्स जोन की है। इसके अभाव में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था नहीं सुधर पा रही है। शहर से गुजरे हाइवे 146 सांची विदिशा रोड से लेकर इंडियन चौराहे सागर भोपाल तिराहे कोतवाली रोड, जैन समाज के मानस्तंभ चौराहा, सहित प्रमुख चौराहा और तिराहों पर अव्यवस्थित रूप से हाथ ठेले, चाट पकौड़ी वाले खड़े रहते हैं। इससे आम रास्ता संकुचित हो रहा है। त्योहार या राजनीतिक पार्टियों के धरना प्रदर्शन के समय तो वाहन ही नहीं पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कुल मिलाकर इस समस्या को दूर करने के लिए प्रथक हॉकर्स जोन की आवश्यकता है। पथ विक्रेताओं के लिए हाट रोड श्री रामलीला के स्थान पर अन्य जगह शिफ्ट करने की कार्रवाई की जाए। हालांकि इसके लिए महू पथरई रोड पानी टँकी मल्टी आवासों की इमारतों के नजदीक हॉकर्स जोन बनाए जा रहे हैं। मुख्य बाजारों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में निष्पक्षता जरूरी है। तब ही यह अभियान सफल हो सकेगा। इसके अलावा मुख्य बाजारों में वाहनों के लिए नए पार्किंग एरिया विकसित करना बेहद आवश्यक हो गया है।
इंदौर शहर से सबक लेना जरूरी
रायसेन शहर को सुव्यवस्थित करने के लिए सबसे पहले इंदौर शहर से सबक लेना जरूरी है। वहां जो अभियान शुरू किया जाता है, उसे अंजाम तक तो पहुंचाया ही जाता है। मॉनिटरिंग के लिए एक टीम गठित की जाती है, जो लगातार नजर रखती है और कार्रवाई भी करती है। यही कारण है जिस जगह से अतिक्रमण हटाया वहां फिर अतिक्रमण नहीं हो पाता। इंदौर के लोगों से भी यहां के लोगों को सीखना होगा, क्योंकि इंदौर शहर का हर नागरिक शहर के प्रति अपनापन का जज्बा रखता है। नपाध्यक्ष सविता सेन ने भी पदभार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में कहा था कि हम रायसेन शहर को विकसित करने के लिए इंदौर शहर से प्रेरणा लेकर मास्टर प्लान के अनुसार कार्य करेंगे।
लगातार बारिश से जितने लोगों के कच्चे मकान गिरे हैं। शत प्रतिशत ऐसे हैं, जिन्होंने पक्के मकान बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत काफी समय पहले फॉर्म भर दिए, सभी जरूरी दस्तावेज भी नपा कार्यालय में संबंधित विभाग को जमा करा दिए। इसके आगे की कार्रवाई नपा ने नहीं की है। इसके कारण वे योजना के लाभ से वंचित बने हुए हैं। नतीजतन आज उन्हें बारिश के मौसम में इस तरह के हालातों से जूझना पड़ रहा है। जबकि वे आवास योजना के लिए सबसे पहले पात्र थे। इसके अलावा ऐसे हितग्राहियों की संख्या भी बहुत अधिक है, जिन्हें या तो अब तक पहली ही किस्त नहीं मिली या फिर दूसरी तीसरी किस्त के लिए की जाने वाली औपचारिकता पूरी नहीं की गई है। इसकी वजह से भवन स्ट्रक्चर लेवल पर ही अधूरा पड़ा है। कई हितग्राही ऐसे हैं जिन्होंने अपना कच्चा मकान तोड़कर पक्का मकान बनाना शुरू किया और पास ही में झोंपड़ी बनाकर रहने लगा। जिसे इस समय बारिश के दौर में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ हितग्राही किराए के मकान में रह रहे हैं।




