एक पेड़ मां के नाम यह दिन साल में एक बार आता हैं और 364 दिन जंगल कटाई चलती हैं ?

रातापानी अभयारण्य से आ रही सागौन से भरी पिकअप पकड़ाई
रिपोर्टर ; विनोद साहू
बाड़ी । सिंघोरी अभ्यारण्य में सागौन साफ होने के बाद अब लकड़ी तस्करों ने रातापानी अभयारण्य की और रुख कर लिया। जबकि रातापानी अभयारण्य व सिंघोरी अभ्यारण्य वन्यजीवों के लिए संरक्षित हैं यहां पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता क्योंकि यह वन विभाग की सेटेलाइट की निगरानी चौबीस घंटे रहता हैं ।
हजारों एकड़ वन भूमि में फसलें लहलहाती हुई वन विभाग को चिढ़ाने जैसा हैं लेकिन वन विभाग को कोई असर नहीं नतीजतन वन्यजीवों का शिकार और इमारती कीमती पेड़ों की कटाई के लिए यह तस्करों के लिए स्वर्ग माना जाता है।
मुखबिर की सूचना पर मिली कामयाबी।
गुरुवार रात मुखबिर ने वन विभाग के विश्वसनीय अधिकारी को सूचना दी एक पिंकअप डामडोगरी से सागौन भरकर लाने बाली जो बाड़ी होते हुए बकतरा की और जायेगी । सूचना मिलने पर अधिकारी ने टीम बनाई और उसे नागिन मोड़ के ऊपर लगा दिया ।
रात सबा बारह बजे टीम को जैसे ही MP37 GA 2664 बिलोरो पिकअप नजर आई तो ड्राइवर ने वन विभाग की टीम देखते ही गाड़ी रोककर मौके से भागने में सफल हो गया। वाहन चेक करने पर उसमे सागोन नग 18 भरे पाए गए। वाहन में बैठे अन्य व्यक्ति करण अहिरवार आत्माज रघु अहिरवार निवासी नारद खेड़ा से पूछताछ करने पर उक्त लकड़ी के सम्बन्ध में कोई भी वैध दस्तावेज नहीं होना पाया गया। तत्पश्चात वाहन व अपराधी को परिक्षेत्र केम्पस बाड़ी लाया गया व प्रकरण पंजीबद्ध कर विधिवत कार्यवाही की गयी।लकड़ी की अनुमानित कीमत 60000 रुपये है।
कार्यवाही में डिप्टीरेंजर मशीयत उल्लाह खान, प्रभारी वनपाल राजेश यादव, वन रक्षक शेषमणि शुक्ला, वन रक्षक अश्वनी तिवारी व अन्य स्टॉफ शामिल था



