19 दिसम्बर 2022 : सफला एकादशी व्रत पुजा विधी एवं कथा शुभ मुहूर्त
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🔮 19 दिसम्बर 2022 : सफला एकादशी व्रत पुजा विधी एवं कथा शुभ मुहूर्त
☄️ चित्रा नक्षत्र- 18 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 18 मिनट से 19 दिसंबर सुबह 10 बजकर 31 मिनट तक। सफला एकादशी 2022 पूजा विधि सफला एकादशी के दिन सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि करके साथ सुथरे वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद विष्णु जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। अब भगवान विष्णु की पूजा आरंभ करें। सबसे पहले भगवान विष्णु को जल अर्पित करें। जल के बाद गेंदे, कनेर या कोई अन्य पीले रंग का फूल, माला अर्पित करें। इसके बाद पीला चंदन लगाएं। भगवान विष्णु को भोग लगाएं और इसके साथ तुलसी दल रखें। अब घी का दीपक और धूप जलाकर विष्णु चालीसा, मंत्र के साथ एकादशी की कथा कर लें। इसके साथ ही तुलसी की माला से ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप कर लें। अंत में विधिवत पूजा कर लें और भूल चूक के लिए माफी मांग लें। दिनभर व्रत रखने के बाद अगले दिन व्रत खोल लें।
⚛️ सफला एकादशी 2022 व्रत शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि 19 दिसंबर 2022 को सुबह 03 बजकर 32 मिनट से प्रारंभ होगी, जिसका समापन 20 दिसंबर को सुबह 02 बजकर 32 मिनट पर होगी। सफला एकादशी व्रत पारण 20 दिसंबर को सुबह 08 बजकर 05 मिनट से सुबह 09 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।
🍱 सफला एकादशी व्रत की पूजन विधि
इस दिन कोशिश करें कि सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. यदि संभव हो तो गंगा के तट पर जाकर स्नान करें और अगर ऐसा संभव न हो तो घर में स्नान करते वक्त पानी में गंगा जल अवश्य ढाल लें. स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प करें. इसके बाद किसी पाटे या पूजन स्थल पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटो रखें. इसके बाद उनपर पीले पुष्प, पीले फल आदि चढ़ाएं और एकादशी व्रत की कथा पढ़ें. अंत में भगवान विष्णु की आरती भी करें और प्रसाद बांटें
🤷🏻♀️ महत्व- मान्यतानुसार सफला एकादशी अपने नाम की तरह ही हर कार्य में सफल बनाने वाली मानी गई है। इस एकादशी के महत्व के बारे में महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था। अत: भगवान श्रीकृष्ण ने जो महत्व इस एकादशी का बताया था, वह इस प्रकार है। पौष मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का नाम सफला एकादशी है।
यह एकादशी व्रत इतना अधिक महत्व का है कि अधिक से अधिक दक्षिणा पाने वाले यज्ञ से भी भगवान प्रसन्न नहीं होते हैं, जितना इस एकादशी व्रत पर उपवास करने से होते हैं। इस एकादशी के देवता श्री नारायण हैं। जिस प्रकार नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़, सब ग्रहों में चंद्रमा, यज्ञों में अश्वमेध और देवताओं में भगवान विष्णु श्रेष्ठ हैं, उसी तरह सब व्रतों में एकादशी का व्रत श्रेष्ठ है। जो मनुष्य सदैव एकादशी का व्रत करते हैं, वे मुझे परम प्रिय हैं। यह अत्यंत भक्ति और श्रद्धा से युक्त होकर विधिपूर्वक इस व्रत को करना चाहिए।
🗣️ सफला एकादशी व्रत कथा
पद्म पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, महिष्मान नाम का एक राजा था। इनका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में लिप्त रहता था। इससे नाराज होकर राजा ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। लुम्पक जंगल में रहने लगा।
पौष कृष्ण दशमी की रात में ठंड के कारण वह सो न सका। सुबह होते होते ठंड से लुम्पक बेहोश हो गया। आधा दिन गुजर जाने के बाद जब बेहोशी दूर हुई तब जंगल से फल इकट्ठा करने लगा। शाम में सूर्यास्त के बाद यह अपनी किस्मत को कोसते हुए भगवान को याद करने लगा। एकादशी की रात भी अपने दुखों पर विचार करते हुए लुम्पक सो न सका।
इस तरह अनजाने में ही लुम्पक से सफला एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक सुधर गया और इनके पिता ने अपना सारा राज्य लुम्पक को सौंप दिया और खुद तपस्या के लिए चले गए। काफी समय तक धर्म पूर्वक शासन करने के बाद लुम्पक भी तपस्या करने चला गया और मृत्यु के पश्चात विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।

