मध्य प्रदेश

27 नवंबर को हुए अपहरण कांड में पुलिस के हाथ खाली, सीसीटीवी फुटेज पुलिस नहीं ले रही है, पुलिस का कहना घटना हुई नहीं

पिता के द्वारा दिए संदिग्ध व्यक्तियों से नहीं कर रही पूछताछ
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । तेंदूखेड़ा विगत 27 नवंबर 22 के दिन दहाड़े हुए नाबालिक बच्चे का अपहरण हुआ था जिसको लेकर अभी तक पुलिस के हाथ बिल्कुल खाली है। लगभग 3 महीने हो चुके हैं पुलिस ने कोई खास कार्य इस केस में नहीं किया है जब घटना हुई थी तो पुलिस ने तुरंत एफआईआर नहीं लिखी पिता के आमरण अनशन के बाद (लगभग 6 दिन) पुलिस ने एफ आई आर दर्ज की थी लेकिन पुलिस ने अभी तक उसमें कोई खास सफलता हासिल नहीं की है पीड़ित पिता ने करीब 20 लोगों के नाम संदिग्ध व्यक्तियों के नाम दिए थे उसमें से पुलिस ने एक को भी नहीं बुलाया पूछताछ करने के लिए पीड़ित पिता ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज दिखाए थे जिसमें बच्चे को दो नकाबपोश ले जाते हुए दिख रहे थे जिसको पुलिस लेने से इंकार कर रही है पुलिस के अनुसार की कथनों के अनुसार पुलिस इस घटना को सत्य नहीं मान रही है उनका कहना है कि अपहरण करते हुए किसी ने किसी को नहीं देखा इस मामले में पुलिस ने साइबर सेल की मदद ली थी साइबर सेल के द्वारा जो पीएसटीएन डाटा होता है वह पुलिस को दे दिया गया है मगर पुलिस ने उस पीएसटीएन डाटा को अभी तक नहीं खोला।
प्रकरण के विवेचना आधिकारी चौधरी का कहना है कि उस डाटा को खोलते किसी से बन नहीं रहा है कुल मिलाकर पुलिस केस में कोई दिलचस्पी दिखा नहीं रही है किस केस में नाबालिग लड़के के साथ अपहरण करके मुक्तिधाम में जानलेवा हमला किया था तथा लूट को अंजाम दिया था गंभीर मामले में पुलिस अभी तक जान बूझकर कोई कार्रवाई करना नहीं चाहती आवेदक का पिता एक पत्रकार है जो जटिल एवं ठोस एवं भ्रष्टाचार जैसे मामलों को लगातार उजागर करने का काम किया जाता है। विगत 10 माह से तेंदूखेड़ा पुलिस हर क्षेत्र में फेल होती नजर आ रही है नगर में चोरी जुआ शराब सट्टा गुंडागर्दी चरम पर दिखाई दे रही है पुलिस प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारी तेंदूखेड़ा पुलिस की नाकामी को नहीं देख पा रहे हैं जगह-जगह अवैध शराब खुलेआम सट्टा पर्ची चोरी डकैती लूटमार जैसे अपराध चरम पर है जिस पथ पे निकला पुलिस नकेल कसने में नाकाम है।
पीड़ित पिता के द्वारा अपने बच्चे के अपहरण कांड में जिन पर शक था लगभग 15 से 20 नाम और 15 से 20 मोबाइल नंबर दिए थे पिता का कहना है कि इन आदमियों का हाथ हो सकता है क्योंकि यह सारे ही भ्रष्टाचार चोरी डकैती कुछ सरकारी कर्मचारी जैसे लोग हैं जो मेरे बेटे के साथ एसी घटना कर सकते हैं मगर इनमें से किसी ने को भी पुलिस ने नहीं बुलाया ना ही उनसे पूछताछ की है पुलिस धीरे से इस मामले को खात्मे की ओर ले जा रही है जो कि अनुचित है नगर में यह पहली घटना है किसी पत्रकार के बेटे को अपहरण किया गया खुलेआम मारा गया और पुलिस जानबूझकर इस क्षेत्र इस कार्य में कोई कार्यवाही करना नहीं चाहती पुलिस के पास जाओ तो टाला मटोली करती है और बस पीड़ितों को भगा देती है।
प्रकरण के विवेचना आधिकारी प्रदीप चौधरी ने बताया कि जाच चल रही है अपराधियों को खोज जारी है। पीएसटीएन डेटा मुझसे खिलते नही बनता क्योंकि मैं पुराना हो चुका हूं जब कोई एस पी कार्यालय जाएं तो कोई बात बने।

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