18 जुलाई 2023 : सर्वार्थ सिद्धि योग में सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत आज, जानिए पूजा विधि शुभ मुहूर्त कथा पारण समय
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 18 जुलाई 2023 : सर्वार्थ सिद्धि योग में सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत आज, जानिए पूजा विधि शुभ मुहूर्त कथा पारण समय
👉🏽 हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन मास के हर सोमवार का जितना महत्व है। उतना ही मंगलवार को पड़ने वाले मंगला गौरी व्रत का महत्व है। सावन मास के हर एक मंगलवार के दिन मां पार्वती को समर्पित ये व्रत रखा जाता है। इस दिन मां पार्वती के मंगल रूप की पूजा अर्चना की जाती है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत को रखती हैं और मां मंगला गौरी की पूजा-अर्चना करती है। जानिए आचार्य श्री गोपी राम से दूसरे मंगला गौरी व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
⚛️ मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त
आज दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा. इसके बाद दोपहर 02 बजकर 45 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 40 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा. साथ ही सुबह 05 बजकर 31 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 04 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. पूजा के लिए ये तीनों ही समय शुभ हैं.
🤷🏻♀️ मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद मां मंगला गौरी का मनन करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा अर्चना आरंभ करें। सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी में लाल रंग का वस्त्र बिछाकर मां पार्वती की तस्वीर या फिर मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद मां को फूल, माला, सिंदूर, कुमकुम, रोली, सोलह श्रृंगार के साथ भोग लगाएं। इसके साथ ही एक पान में 2 लौंग, एक हरी इलायची, एक रुपए का सिक्का और बतासा या मिठाई रखकर चढ़ा दें। इसके बाद जल चढाएं। फिर घी का दीपक, धूप जलाकर मां पार्वती की पूजा करने के साथ आरती कल लें। अंत में भूल चूक के लिए माफी मांग लें। इसके बाद दिनभर व्रत रखें।
🍱 मंगला गौरी व्रत पूजन सामग्री
मंगला गौरी व्रत शुरू करने से पहले सावन के मंगलवार के दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करके पूरे महीने मंगला गौरी व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। व्रत से पहले फल, फूल, सुपारी, पान, मेहंदी, सोलह श्रृंगार का सामान, अनाज आदि रखना चाहिए। कहा जाता है कि पूजन सामग्री में हर चीज 16 नंबर की होनी चाहिए।
🗣️ मंगला गौरी व्रत मंत्र
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
ॐ उमामहेश्वराय नम: मंत्र का जप भी कर सकते हैं।
💁🏻♀️ मंगला गौरी व्रत का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन माता गौरी की पूजा करके मां गौरी की कथा जरूर सुननी चाहिए। अगर किसी महिला की कुंडली में वैवाहिक जीवन में कोई समस्या हो तो उन्हें मंगला गौरी व्रत जरूर रखना चाहिए।
📚 मंगला गौरी व्रत कथा
एक समय की बात है, धर्मपाल नाम का एक व्यापारी रहता था। वह और उसकी पत्नी अत्यंत धार्मिक थे। अनेक अनुष्ठान और व्रत करने से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। बहुत छोटी उम्र से ही, ज्योतिषियों ने उनके बेटे की मृत्यु की भविष्यवाणी कर दी थी, जो कि उसके 16वें वर्ष में साँप के काटने से होनी थी। कुछ वर्षों के बाद, धर्मपाल और उसकी पत्नी भविष्यवाणी के बारे में सब कुछ भूल गए और अपने बेटे की शादी कर दी। जिस लड़की से उनके बेटे का विवाह हुआ था, वह मंगला गौरी व्रत करती थी और व्रत के प्रभाव से उसके पति की मृत्यु का भय समाप्त हो जाता था और उसे दीर्घायु प्राप्त होती थी और वे एक सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत करते थे।
💮 मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि–
मान्यता है कि सावन/श्रावण मास में मंगलवार को यह व्रत करने के बाद उद्यापन करना चाहिए। उद्यापन के दिन भक्तों को कुछ भी खाने की मनाही होती है। उद्यापन पूजा किसी विशेष पंडितजी द्वारा ही करायी जानी चाहिए। उद्यापन के दिन पूजा स्थल पर एक मंच पर माता पार्वती/मंगला गौरी की स्थापना करनी चाहिए। पूजा स्थल के पास पूजा के लिए सुहाग सामग्री भी रखनी चाहिए। मंगला गौरी व्रत कथा को पढ़ना या सुनना चाहिए और फिर व्रत खोलने के बाद भक्तों को बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए। मंगला गौरी व्रत 2023 का पालन करें और भगवान का आशीर्वाद पाने और सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए ऊपर वर्णित पूजा विधि का पालन करें।


