8 जुलाई को भड़ली नवमी के अबूझ मुहूर्त पर होंगी 500 से ज्यादा शादियां, 10 जुलाई से सोएंगे देव, 116 दिन बाद जागेंगे

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। इस सीजन का आखिरी विवाह मुहूर्त 9 जुलाई को रहेगा। इससे एक दिन पहले 8 जुलाई को भड़ली नवमी का अबूझ मुहूर्त रहेगा। इस दिन जिले में 500 से अधिक शादियां होंगी। धर्मशास्त्री पंडित ओमप्रकाश शुक्ला ने बताया कि इस सीजन में अब सिर्फ 5 दिन और शहनाई बजेगी। 10 जुलाई से देव सो जाएंगे। फिर चार माह बाद नवंबर में देवउठनी एकादशी का मुहूर्त न होगा।
हालांकि, शुक्र तारे के अस्त होने से विधिवत लग्न मुहूर्त 28 नवंबर से शुरू होंगे। यानी भड़ली नवमी के बाद विवाह मुहूर्त शुरू होने के लिए 140 दिन इंतजार करना होगा। हांलाकि 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर अबूझ मुहूर्त में कई जोड़े दाम्पत्य सूत्र में बंधेंगे।
देवउठनी एकादशी 4 नवंबर को, नवंबर और दिसंबर में रहेंगे 12 विवाह मुहूर्त…
पं. मुकेश भार्गव ,राममोहन चतुर्वेदी ने बताया कि जुलाई में 5, 6, 7, 8 और 9 जुलाई तक विवाह मुहूर्त हैं। 9 जुलाई को इस सीजन का आखिरी विवाह मुहूर्त रहेगा। चार महीने बाद 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी के अबूझ मुहूर्त में कुछ लोग विवाह कर सकते हैं। लेकिन शुक्र ग्रह इस दौरान अस्त ही रहेगा। शुक्र 26 नवंबर को दोपहर 12:08 बजे पश्चिम दिशा में उदित होगा।
अगले सर्दी सीजन का पहला लग्न मुहूर्त 28 नवंबर को होगा। इसके साथ ही विवाह शुरू होंगे। यानी 9 जुलाई से 28 नवंबर तक देव प्रबोधिनी एकादशी को छोड़कर विवाह की शहनाइयां नहीं बजेंगी। नवंबर और दिसंबर में कुल 12 दिन मुहूर्त रहेंगे। इनमें नवंबर में 4 व 28 और दिसंबर में 1, 2, 3, 4, 7, 8, 9, 13, 1 और 15 तारीख को विवाह मुहूर्त होंगे।
चातुर्मास का एक दिन कम….
पं. शुक्ला ने बताया कि 10 जुलाई को देवशयनी और 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी होने से भगवान श्री हरि विष्णु 116 दिन विश्राम करेंगे। पिछले साल 118 दिन विश्राम किया था। 2020 में अधिक मास होने से चातुर्मास की अवधि 148 दिन की थी।
14 जुलाई से सावन, 18 दिन विशेष योग….,
पंडित मुकेश भार्गव राममोहन, कृष्णमोहन चतुर्वेदी ने बताया कि 13 जुलाई को स्नान-दान पूर्णिमा के अगले दिन 14 जुलाई को श्रावण माह की शुरुआत होगी। समापन 11 अगस्त को रक्षाबंधन पर होगा। इस तरह श्रावण मास 29 दिन का ही रहेगा। सावन में 18 दिन विशेष योग रहेंगे।



