ज्योतिष

आज का पंचाग बुधवार 21 सितम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 21 सितम्बर 2022

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
🚩 21 सितंबर 2022 आज अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि इन्दिरा नाम का एकादशी व्रत है। आप सभी एकादशी व्रतियों को एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें। शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक व्यक्ति को अवश्य करना चाहिये। आज ग्यारहवें दिन का श्राद्ध किया जायेगा। आज ग्यारहवें दिन का तर्पण तथा आज से अगले 04 दिन पर्यन्त प्रतिदिन पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करने से वर्षभर सुख बना रहता है। आप सभी सनातनियों को इन्दिरा एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथिः- एकादशी तिथि 11:29:00 बजे तक तदोपरान्त द्वादशी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- एकादशी तिथि के स्वामी भगवान विष्णु जी हैं तथा द्वादशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं।
💫 नक्षत्रः- पुष्य 11:47:00 तक तदोपरान्त अश्लेषा नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि जी हैं तथा अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी हैं।
📢 योगः- परिधा 09:01:00 तक शिवा।
प्रथम करण : बव – 10:32 ए एम तक
द्वितीय करण: बालव – 11:34 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 10:42:00 A.M से 12:14:00 P.M तक
⚜️ दिशाशूलः- बुधवार को उत्तर दिशा में जाना अशुभ होता है यदि आवश्यक हो तो घर से धनियां या तेल खाकर निकलें।
🤖 राहुकालः- आज का राहुकाल 12:14:00 P.M से 01:45:00 P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:28:40
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:34:44
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:34 ए एम से 05:22 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:58 ए एम से 06:09 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:16 पी एम से 03:04 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:07 पी एम से 06:31 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:19 पी एम से 07:30 पी एम
💧 अमृत काल : 04:40 पी एम से 06:27 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:38 ए एम, सितम्बर 22
💥 परिघ योग- सुबह 9 बजकर 13 मिनट तक
☄️ पुनर्वसु नक्षत्र- आज रात 11 बजकर 47 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-हरे फल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार:- एकादशी का श्राद्ध, इन्दिरा एकादशी व्रत सभी के लिए, श्री उच्छंगराय नवलशंकर ढेबर जयन्ती, बायोस्फियर दिवस, शून्य उत्सर्जन दिवस, जागतिक अंधश्रद्धा निर्मूलन दिवस, अंतर्राष्ट्रीय शान्ति दिवस, विश्व अल्जाइमर दिवस
✍🏽 विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।
🗽 Vastu Tips 🗺️
घर में साफ-सफाई करना बहुत जरूरी है, लेकिन समय देखकर वहीं वास्तु के अनुसार, घर में झाड़ू लगाने का भी एक सही समय होता है। वास्तु में इसका काफी महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि बिना समय से झाड़ू लगाने से घर में दरिद्रता आती है। आज हम आपको घर में झाड़ू लगाने का सही समय।
वैसे तो साफ-सफाई करना अच्छा ही होता है, लेकिन वास्तु शास्त्र में उसके लिये कुछ समय पहले से निर्धारित है। जिस तरह सफाई का उचित समय तय है, ठीक उसी तरह सफाई ना करने का, यानि झाडू ना लगाने का भी समय दिया गया है।
दरिद्रता अपने पैर पसारती है वास्तु शास्त्र में घर में झाडू लगाने के लिये दिन के पहले चार पहर को उचित समय माना गया है। जबकि रात के चार पहर को इस काम के लिये अनुचित माना गया है। रात के चार पहरों में झाडू लगाने से घर में दरिद्रता अपने पैर पसारती है और धन की देवी लक्ष्मी रूष्ठ हो जाती है। जिससे घर में धन की आवक पर प्रभाव पड़ता है।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
किसकी आयु कम हो जाती है ?
जिनको अति अभिमान होता है, जो अधिक एवं व्यर्थ का बोलते हैं उनकी आयु कम हो जाती है |
जो निंदा-ईर्ष्या करते है या दुर्व्यसन में फँसे हैं अथवा जो जरा-जरा बात में क्रुद्ध हो जाते हैं उनकी भी उम्र कम हो जाती है |
जो अधिक खाना खाते हैं, रात को देर से खाते हैं, बिनजरूरी खाते हैं, चलते-चलते खाते हैं, खड़े-खड़े हैं उनका भी स्वास्थ्य लडखडा जाता है और आयु कम हो जाती है |
जो मित्र, परिवार से द्रोह करते हैं, संतो, सज्जनों की निंदा करते है उनकी भी आयु कम होती है, जो ठाँस- ठाँस के खाता है, ब्रह्मचर्य का नाश करता रहता है वह जल्दी मरता है |
जो प्राणायाम और भगवद-मंत्र का जप नहीं करता उसकी लम्बी आयु होने में संदेह रहता है और जो ब्रह्मचर्य पालते हैं, प्राणायाम करते हैं उनकी आयु बढती है |
आरोग्य संजीवनी 🍶
शंख के स्वास्थ्य-हितकारी प्रयोग बताते हुए कहते हैं : “कोई बच्चा तोतला अथवा गूँगा है तो शंख में पानी रख दो | सुबह का रखा हुआ पानी शाम को, शाम का रखा हुआ पानी सुबह को 50 – 50 मि.ली. उस बच्चे को पिलाओ और उसके गले में छोटा-सा शंख बाँध दो | 1 – 2 चुटकी ( 50 से 100 मि.ग्रा. ) शंख भस्म शहद के साथ सुबह-शाम चटाओ तो वह बच्चा बोलने लग जायेगा | शंख भस्म अन्य कई रोगों में भी एक प्रभावकारी औषधि है |
गर्भिणी स्त्री शंख का पानी पिये तो उसके कुटुम्ब में 2- 4 पीढ़ियों तक तोतला – गूँगा बच्चा नहीं पैदा होगा | यह हमारे भारत की खोज है, पाश्चत्य विज्ञानियों की खोज नहीं है | गूँगे और तोतले व्यक्ति को शंख फायदा करता है और शंख -ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है इतना ही नहीं, दूसरे भी बहुत सारे फायदे बताये गये हैं | जहाँ लोगों का समूह इकट्ठा होता है वहाँ शंखनाद पवित्र, सात्विक माना जाता है |
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
संसार में पशुओं को छोड़कर अपने पुरुषार्थ का सार जानने वाला ऐसा कौन पुरुष होगा, जो आवागमन से छुड़ा देने वाली भगवान की प्राचीन (पौराणिक) कथाओं में से किसी भी अमृतमयी कथा का अपने कर्णपुटो से एक बार पान करके फिर उनकी ओर से मन हटा लेगा।’ (महाभारत से) जो श्रेष्ठ पुरुष समस्त जीवों को अपने ही समान देखते हैं तथा शत्रु-मित्र में भी समान भाव रखते हैं, वे श्रेष्ठ भगवद् भक्त हैं, जो मनुष्य दूसरों का अभ्युदय देखकर प्रसन्न होते हैं और सदा हरिनाम परायण रहते हैं, वे श्रेष्ठ भगवद् भक्त हैं। पृथ्वी किन के भार से पीड़ित रहती है? पृथ्वी देवी ब्रह्माजी से कहती हैं- ‘जो श्रीकृष्ण की भक्ति से हीन हैं और जो श्रीकृष्ण भक्त की निंदा करते हैं, उन महापातकी मनुष्यों का भार वहन करने में मैं सर्वथा असमर्थ हूं। जो अपने धर्म तथा आचार से रहित हैं तथा नित्य कर्म से हीन हैं, जिनकी वेदों में श्रद्धा नहीं है, उनके भार से मैं पीड़ित हूं। जो माता-पिता, गुरु, पत्नी, पुत्र तथा आश्रित वर्ग का पालन-पोष्ण नहीं करते हैं, उनका भार वहन करने में मैं असमर्थ हूं। पिता श्री, जो झूठ बोलते हैं, जिनमें दया तथा सत्य के आचरण का अभाव है तथा जो गुरुजनों और देवताओं की निंदा करते हैं, उनके भार से मैं पीड़ित हूं।
जो मित्र द्रोही, कृतघ्न, झूठी-गवाही देने वाले, विश्वासघाती और धरोहर हड़प लेने वाले हैं, उनके भार से मैं पीड़ित हूं। जो कल्याणमय सूक्तों, साम मंत्रों तथा एकमात्र मंगलकारी हरि-नामों को बेचते हैं, उनके भार से मैं पीड़ित हूं। जो जीवों की हिंसा करने वाले, गुरु द्रोही, ग्रामयाजी, लोभी, मुर्दा फूंकने वाले तथा शूद्रान्न भोजी हैं, उनके भार से मैं पीड़ित हूं। जो मूढ़ मनुष्य पूजा, यज्ञ, उपवास-व्रत तथा नियमों का भंग करने वाले हैं, उनके भार से मैं पीड़ित हूं। जो पापी लोग सदा गौ, ब्राह्मण, देवता, वैष्णव, श्रीहरि कथा और श्री हरि की भक्ति से द्वेष करते हैं, उनके भार से मैं पीड़ित हूं।’ (ब्रह्मवैवर्त्त कृष्ण 04/20-28) भगवान को प्रसन्न करने वाले आठ भाव-पुष्प : अहिंसा प्रथमं पुष्पं पुष्पमिन्द्रियनिग्रहः। सर्वपुष्पं दया भूते पुष्पं शान्तिर्विशिष्यते। शमः पुष्पं तपः पुष्पं ध्यानं पुष्पं च सप्तमम्। सत्यं चैवाष्टमं पुष्पमेतैस्तुष्यति केशवः॥ (अग्नि पुराण-202/17-18) ‘अहिंसा’ (किसी भी प्राणी को तन-मन-वचन से दुखी न करना, प्रथम पुष्प है। ‘इंद्रिय-निग्रह’ (इंद्रियों को मनमाने विषयों में न जाने देना) दूसरा पुष्प है। ‘प्राणिमात्र पर दया’ (दूसरों के दुःख को अपना दुःख समझकर उसे दूर करने के लिए चेष्टा) करना तीसरा सर्वोपयोगी पुष्प है।
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।
””सदा मुस्कुराते रहिये””

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