आज का पंचाग गुरुवार 22 सितम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 22 सितम्बर 2022
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
👴🏼 22 सितम्बर 2022 दिन गुरुवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज बारहवें दिवस का श्राद्ध किया जायेगा। आज सन्यासी, यति एवं वैष्णवों के श्राद्ध की तिथि मानी जाती है। आज से अगले दो दिवस तक पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करने से वर्षभर सुख बना रहता है। आप सभी सनातनियों को श्रीचन्द्रषष्ठी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डाल उसका सेवन करे
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन माह
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथिः- द्वादशी तिथि 25:18:00 बजे तक तदोपरान्त त्रयोदशी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान विष्णु जी हैं तथा त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं।
💫 नक्षत्रः- अश्लेषा 17:05:20 तक तदोपरान्त माघ नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध जी हैं तथा माघ नक्षत्र के स्वामी केतु देव जी हैं।
🔔 योगः- सिद्ध 08:00:00 तक तदोपान्त सिद्ध
⚡ प्रथम करण : कौलव – 12:29 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 01:17 ए एम, सितम्बर 23 तक गर
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 09:11:00 A.M से 10:42:00 A.M तक
⚜️ दिशाशूलः- गुरुवार को दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करना चाहिए यदि ज्यादा आवश्यक हो तो घर से सरसों के दाने याद जीरा खाकर निकले ।
🤖 राहुकालः- आज का राहुकाल 01:44:00 P.M से 03:16:00 P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:28:51
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:33:51
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:35 ए एम से 05:22 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:58 ए एम से 06:09 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:49 ए एम से 12:38 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:15 पी एम से 03:04 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:06 पी एम से 06:30 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:18 पी एम से 07:29 पी एम
💧 अमृत काल : 12:18 ए एम, सितम्बर 23 से 02:03 ए एम, सितम्बर 23
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:50 पी एम से 12:38 ए एम, सितम्बर 23
🔱 शिव योग – आज सुबह 9 बजकर 45 मिनट तक
☄️ आश्लेषा नक्षत्र – आज का पूरा दिन पार कर के देर रात 2 बजकर 3 मिनट तक
🚕 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी ब्राह्मण को पीला वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – द्वादशी का श्राद्ध, मघा श्राद्ध, चक्रांकित महाभागवतों -यति – वैष्णवों – संन्यासियों का श्राद्ध, श्री पवन कुमार चामलिंग जन्म दिवस, विश्व गेंडा दिवस, गुलाब दिवस (कैंसर रोगियों के कल्याणार्थ), विश्व कार मुक्त दिवस, विश्व गुलाब दिवस, श्रम प्रतिष्ठा दिवस, मूल संज्ञक नक्षत्र जारी
✍🏽 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🏚️ Vastu tips 🛕
आज हम आपको एक ऐसा उपाय बताने वाले हैं जिसे अपनाकर आप अपने घर निगेटिव एनर्जी घटा सकते हैं
चाहे अच्छी एनर्जी हो या बुरी दोनों का प्रवेश मेन गेट से ही होता है, अब आपको ऐसा उपाय करना है जिससे पॉजिटिव एनर्जी तो घर में आ जाए मगर निगेटिव एनर्जी घर के अंदर न आए। इसके लिए आपको घर के मेन गेट पर कुमकुम या हल्दी में गंगाजल मिलाकर स्वास्तिक बनाना है। स्वास्तिक निगेटिव एनर्जी को घर में प्रवेश करने से रोक देता है। स्वास्तिक बनाते वक्त इस बात का ध्यान रखना है कि इसे उत्तर या फिर उत्तर पूर्व यानी कि ईशान कोण में बनाना अधिक शुभ होता है। इन दिशाओं में गेट पर स्वास्तिक बनाने से भगवान की कृपा बनी रहती है और निगेटिव ताकतें गेट के बाहर ही रह जाती हैं अंदर नहीं आती हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
उठते ही क्यों पीना चाहिए पानी? अक्सर लोगों का सवाल रहता है कि क्या सुबह उठते ही बासी मुंह पानी पीना चाहिए, इस बारे में जब हमने डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कहा- हां, ओवरनाइट शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए उठते ही सुबह पानी पी लेना चाहिए। वरना पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है और इसी वजह से लोगों को हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
वर्कआउट के दौरान भी पीना चाहिए पानी डॉक्टर के मुताबिक वर्कआउट करते हुए हमारा बहुत पसीना निकलता है इसलिए वर्कआउट करते वक्त थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें और बाद में भी अच्छी मात्रा में पानी पिएं।
क्या खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए?आपने कई लोगों से सुना होगा कि खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए , पानी चबा-चबाकर खाने की तरह पीना चाहिए। इस बारे में जब हमने डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कहा कि ऐसा उन्होंने कहीं नहीं पढ़ा है, मैराथन में दौड़ते वक्त तो धावक दौड़ते हुए भी पानी पीते हैं। उन्होंने इतना जरूर कहा कि पानी पीते वक्त बस इस बात का ध्यान रखें कि पानी इत्मीनान से पिएं जल्दबाजी में पानी पीने से दिक्कत हो सकती है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
वेटलॉस होममेड ड्रिंक बनाने की विधि
सबसे पहले एक पैन में पानी डालकर उबालें।
जब पानी में उबल जाए तो इसमें दालचीनी डालें।
उसके बाद इसे धीमी आंच पर पकाएं।
पकने के बाद इसे छान लें और इसमें शहद मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट गुनगुना पिएं।
👉🏼 वेटलॉस में किस तरह असरदार है ये ड्रिंक?
दालचीनी में एंटी-ओबेसोजेनिक के साथ ही फाइबर पाए जाते हैं जोकि सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। ऐसे में यदि आप इसका सेवन करेंगे तो यह वजन कम करने के अलावा ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जैसी बीमारियों को भी कंट्रोल करने में मदद करेगा।
शहद में कैलोरी की मात्रा में बहुत कम पाई जाती है। साथ ही इसमें फ्रुक्टोज पाया जाता है जो वजन कम करने के साथ- साथ एनर्जी बूस्ट करने में मदद करता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हिंदू धर्म में तुलसी पूजनीय है। इसके अलावा धन की देवी लक्ष्मी का एक रूप भी हैं। जिन घरों में तुलसी की पूजा होती है। वहां माता लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। हिंदू धर्म में तुलसी की पूजा करने का काफी महत्व है। तुलसी के पौधे को सुबह जल अर्पित करना चाहिए और शाम को दीपक जलाना चाहिए। तुलसी में जल डालने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना गया है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
तुलसी पूजा के दौरान अगर मंत्र का जाप किया जाए तो माता लक्ष्मी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। पूजा करते समय कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए।
शास्त्रों में तुलसी से जुड़े कुछ उपाय बताए गए है -सूखे हुए तुलसी के पौधे को नहीं रखना चाहिए। सूखने पर उसे गमले में से निकालकर किसी नदी में प्रवाहित कर दें। तुलसी का मुरझाना अच्छा नहीं माना जाता है। यह घर में आर्थिक तंगी को दर्शाता है।
तुलसी पूजन के दौरान मंत्रों का जाप करने से माता लक्ष्मी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इसके अलावा जिस घर में हमेशा तुलसी की पूजा की जाती है। वहां हमेशा बरकत होती है।
🪶 तुलसी माता के सामने बैठकर इस मंत्र का 108 बार जाप करने से विशेष लाभ मिलता है-
‘महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आदि व्याधि हर नित्यं तुलसी त्वम नमोस्तुते”
इन समस्याओं से मिलता है छुटकारा-तुलसी पूजन के दौरान इस मंत्र का जाप करने से जीवन में सकारात्मकता आती है। जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं। घर में कभी दरिद्रता नहीं आती है। ध्यान रखें कि बिना नहाए तुलसी के पौधे को कभी न छुएं।
इस दिन तुलसी को हाथ न लगाए- तुलसी के पत्तों को रात्रि और रविवार को न तोड़ें। एकादशी के दिन भी तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
तुलसी पूजन के समय यह उपाय करें-मिट्टी या आटे का दीपक लें। एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं। उसमें थोड़ी हल्दी डाल दें। फिर इस दीपक को तुलसी के पास रख दें। आटे के दीपक को अगले दिन गाय को खिला दें।
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⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।


