ज्योतिष

आज का पंचाग रविवार 25 सितम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

… ✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦ ….         
      🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
    *_रविवार  25 सितम्बर 2022_*
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
👴🏼 25 सितम्बर 2022 दिन शनिवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। आज सर्वपितृ अमावस्या है परन्तु शनिवार पापवार होने के वजह से दुर्भिक्ष एवं भय की स्थिति बनी रहेंगी। आज पितृविसर्जन एवं भगवान महाविष्णु को प्रशन्न करने हेतु ब्राह्मण भोज करवाना चाहिये। आज महालया, भूले-बिसरे तिथियों वालों का श्राद्ध करना चाहिये। आप सभी सनातनियों को सर्वपितृ अमावस्या की हार्दिक शुभकामनायें।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 *_शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022_*
🌐 *_संवत्सर नाम-राक्षस_*
✡️ *_शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)_*
☸️ *_काली सम्वत 5123_*
☣️ *_सायन दक्षिणायन_*
🌦️ *_ऋतु – सौर शरद ऋतु_*
🌤️ *_मास – आश्विन माह_*
🌚 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📆 *_तिथिः- अमावस्या तिथि 27:25:00 तक तदोपरान्त प्रतिपदा तिथि_*
✏️ *_तिथि स्वामीः- अमावस्या तिथि के स्वामी पित्र देव हैं तथा प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्निदेव हैं।_*
💫 *_नक्षत्रः- उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र 29:56:00 तक तदोपरान्त हस्त नक्षत्र_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामीः- उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव जी हैं तथा हस्त नक्षत्र के स्वामी चन्द्र देव जी हैं।_*
🔔 *_योगः- शुभ 09:04:50 तक तदोपरान्त ब्रह्मा_*
⚡ *_प्रथम करण : चतुष्पाद – 03:21 पी एम तक_*
✨ *_द्वितीय करण : नाग – 03:23 ए एम, सितम्बर 26 तक किंस्तुघ्न_*
⚜️ *_दिशाशूलः- रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो घर से पान या घी खाकर निकलें।_*
🔥 *_गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 03:13:00 P.M से 04:44:00 P.M तक_*
🤖 *_राहुकालः- आज का राहुकाल 04:44:00 P.M से 06:14:00 P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।_*
🌞 *_सूर्योदय – प्रातः 06:29:24_*
🌅 *_सूर्यास्त – सायं 18:31:12_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : 04:35 ए एम से 05:23 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : 04:59 ए एम से 06:11 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:37 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : 02:13 पी एम से 03:01 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : 06:02 पी एम से 06:26 पी एम_*
🏙️ *_सायाह्न सन्ध्या : 06:14 पी एम से 07:26 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : 10:29 पी एम से 12:08 ए एम, सितम्बर 26_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : 11:49 पी एम से 12:37 ए एम, सितम्बर 26_*
⭐ *_सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन_*
💦 *_अमृत सिद्धि योग : 05:55 ए एम, सितम्बर 26 से 06:11 ए एम, सितम्बर 26_*
☄️ *_उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र – आज का पूरा दिन पार कर के अगली सुबह 5 बजकर 52 मिनट तक_*
🚓 *_यात्रा शकुन- इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-किसी विप्र को भोजन उपरांत लाल वस्त्र व स्वर्ण दान दें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – आश्विन बदी अमावस्या 27:26 तक, स्नान – दान – श्राद्धादि की देवपितृकार्य अमावस्या, पितृ विसर्जन, सर्वपितृ श्राद्ध, अज्ञात तिथि वालों का श्राद्ध आज, महालया समाप्त, पं. दीनदयाल उपाध्याय जयन्ती अंन्तोदय दिवस, चौ. देवीलाल जयन्ती, श्री सतीश धवन जयन्ती, विश्व फार्मासिस्ट दिवस
✍🏽 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
           🏘️ *_Vastu tips_* 🏚️
🧹 शनिवार के दिन बदलें झाड़ू
घर में पुरानी झाड़ू खराब हो गई है और आप नई झाड़ू खरीदना चाहते हैं, तो वास्तु शास्त्र में इसके लिये भी उचित समय दिया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पुरानी झाड़ू को बदलकर नयी झाड़ू इस्तेमाल करने के लिये शनिवार के दिन का चुनाव करना चाहिए। शनिवार को नई झाड़ू का उपयोग करना बेहद शुभ माना जाता है।
🤷🏻‍♀️ हमेशा कृष्णपक्ष में खरीदें झाड़ू
इसके अलावा झाड़ू को सदैव कृष्णपक्ष में खरीदना उचित रहता है। जबकि शुक्लपक्ष में खरीदी गई झाड़ू दुर्भाग्य का सूचक होती है। इसलिए इस समय में झाड़ू कभी नहीं खरीदनी चाहिए। अगर आप गलत समय पर झाड़ू घर में लेकर आते हैं तो आपका गुडलक यानी सौभाग्य भी आपसे रूठकर चला जाएगा।
➡️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*डार्क सर्कल कम करने के घरेलू उपाय*
*गुलाब जल और दूध*
दूध और गुलाब जल डार्क सर्कल्स को दूर करने में काफी मदद करता है। इसके लिए गुलाब जल और दूध को बराबर मात्रा लेकर कॉटन की मदद से डार्क सर्कल्स पर लगाकर 20 मिनट तक के लिए छोड़ दें। उसके बाद कॉटन पैड हटा लें और फिर फेस को पानी से धो लें।
*शहद, दूध और नींबू*
आंखों के नीचे काले घेरे को हटाने के लिए शहद, दूध और नींबू बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसके लिए एक चम्मच दूध में आधा चम्मच शहद और नींबू का रस मिलाकर आंखों के आसपास मसाज करें। ऐसा करने से डार्क सर्कल्स दूर हो सकते हैं।
      🍃 *_आरोग्य संजीवनी_* ☘️
प्रॉपर नींद लेना क्यों जरूरी है
आपको जानकर हैरानी होगी कि आप 80 फीसदी कैलरी तब एक्सपेंड करते हैं जब आप सो रहे होते हैं, अगर आपने नींद पूरी नहीं की तो मान लीजिए आप 8 घंटे की जगह 4 घंटे सोए तो आपने वो 80 फीसदी को 40 फीसदी कर लिया। इसके अलावा 15 फीसदी कैलरी आप चलकर, डॉग को वॉक कराकर, घर के काम करके खर्च करते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ 5 फीसदी कैलरी एक्सपेंड एक्सरसाइज से होता है, मगर एक्सराइज फिर भी वेट लॉस के लिए बहुत जरूरी है।
अगर आप सिर्फ वजन घटाना चाहते हैं तो कैलरी कम कंज्यूम करिए, अगर वजन घटाने के साथ बॉडी टोंड भी करना चाहते हैं तो एक्सरसाइज करिए, अगर आप मसल्स भी बढ़ाना चाहते हैं तो प्रोटीन का सेवन बहुत जरूरी है। जितना आपका वजन है उतने प्रति किलो ग्राम आपको प्रोटीन मिनिमम लेना ही है, अगर आप वर्कआउट करते हैं तो आपको प्रोटीन की मात्रा प्रति किलो डेढ़ ग्राम करनी होगी।
👉🏼 इन आसान चीजों को जिंदगी में शामिल करके आप आसानी से अपना वजन कम कर सकते हैं।
         📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
       प्रत्येक मनुष्य के जीवनकाल में अनेक गुरु होते हैं परंतु उनमें से पांच गुरु मुख्य होते हैं
(1)      जननी (माता) – प्रत्येक मनुष्य या जीवों का प्रथम गुरु हमारे माता ही होती है, वह हमें हंसना, बोलना, चलना, पढ़ना, लिखना, जीवन की कठनाइयों का सामना करना, हमारे भय, दुःख, पीड़ा को दूर करती है। हमारे सारे समस्याओं का इलाज (हल) हमारे माता के पास होती है। माता स्वयं साक्षात् भगवान का रूप होती है। मनुष्य या जीवों के लिए माता ही परब्रह्म है।
         माता जननी बनकर हमें जन्म देती है, माता सरस्वती के रूप में हमें ज्ञान देती है, माता अन्नपूर्णा (लक्ष्मी) के रूप में हमें भोजन देती है। रक्षक (सैनिक) बनकर हमारी सुरक्षा करती है। माता प्रथम गुरु है, जो परब्रह्मा से भी बढ़कर है। माता डॉक्टर (वैद्य) है, साथी बनकर हमारे साथ खेलती है, स्वयं हारकर हमें जिताती है, स्वयं कष्ट पीड़ा सहकर हमें सारे सुख देती है। माता हमारे लालन – पालन करती है। माता को भूमि कह जाता है, जिस प्रकार धरती माता का हमारे जीवन में हमें अपना सब कुछ दे देती है उसी प्रकार माता हमारे ऊपर अपना सब कुछ न्यौछावर कर देती है।
        कुछ समाज में मातृ सत्तात्मक परिवार पाया जाता है, माता ही परिवार का मुखिया, पालक, संरक्षक का कार्य करती हैं।
(2)      पिता – पिता मनुष्य या प्राणियों का द्वितीय गुरु होता है। पिता भी, बोलने, चलने, पढ़ने, लिखने, नैतिक शिक्षा, संस्कार, भरण पोषण आदि कार्य, करता है। प्रायः पिता पूरे परिवार का पालक होता है पिता को परिवार का पालनहार कहा जाता है, पिता मुख्य संरक्षक होता है, पूरे परिवार का संरक्षण करता है।
          यह ब्रह्मांड पुरुष प्रधान (पितृ सत्तात्मक) समाज है, पिता परिवार का मुखिया होता है, पिता ही बालक की उदंडता के लिए दंड और अच्छे कार्य के लिए पुरस्कार देने का कार्य करता है, पिता पूरे परिवार का केंद्र बिंदु है, परिवार रूपी वृक्ष का जड़ है, पिता परिवार के लिए न्यायधीश, दंडाधिकारी के रूप में कार्य करता है। शास्त्रों में पिता को आकाश कहा गया है। जिस प्रकार आकाश छाया, पानी देता है, हमें ढककर रखता है, सारे धूल धुंआ को अपनी में विलीन कर देता है। उसी प्रकार पिता बच्चों के लिए कार्य करता है।
(3)    गुरु (शिक्षक) – प्राचीन काल में शैक्षणिक और आध्यात्मिक गुरु एक ही होता था परंतु अब दोनों गुरु अलग अलग होता है। शिक्षक को गुरुजी, अध्यापक, आचार्य, उपाध्याय आदि कई नामों से जाना जाता है। वर्तमान समय में शिक्षक शैक्षणिक और नैतिक शिक्षा, शारीरिक शिक्षा, योगशिक्षा, व्यायाम, खेलकूद, संगीत, नृत्य, क्राफ्ट, चित्रकला, पेंटिग, रंगोली आदि कार्य करता है।
         शासकीय विद्यालय प्राथमिक और माध्यमिक तथा हाई स्कूल स्तर पर यह सारे शिक्षण, प्रशिक्षण का कार्य एक ही शिक्षक के द्वारा किया जाता है, हायर सेकंडरी स्तर पर अलग – अलग शिक्षक होते हैं। शिक्षक ही प्रायः अधिकांश बच्चों को अक्षर ज्ञान करता है, शिक्षक मुख्य रूप से किसी ज्ञान या अक्षर को सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना, और समझना सिखाता है।
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।
रविवार कि सप्तमी, सोमवार कि सोमवती अमावस्या (अथवा किसी दिन की भी अमावस्या हो), मंगलवार कि चतुर्थी और बुधवार कि अष्टमी। इन चारों तिथियों में किया गया मन्त्र जप सिद्ध हो जाता है। इनमें किया गया श्राद्ध-तर्पण, तीर्थ स्नान एवं दान अक्षय हो जाता है, क्योंकि इन तिथियों को सूर्यग्रहण के बराबर पुण्यदायिनी माना गया है।। (शिवपुराण, विद्येश्वर संहिता, अध्याय – 10.)

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