ज्योतिष

आज का पंचाग रविवार 30 अक्टूबर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
…. ✦••• जय श्री हरि ••• ✦ …
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 30 अक्टूबर 2022

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌞 30 अक्टूबर 2022 दिन रविवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष का षष्ठम दिवस है। आज अनुदय से सूर्यषष्ठी (छठ) व्रत का छठा दिन है। आज छठ व्रत का छठा दिन अर्थात सायंकालीन भगवान सूर्य को सूर्यार्घ्य अर्थात अर्घ्यदान (सायं 17:34:37) का समय है। आज स्कंदषष्ठी व्रत है तथा आज लाभपञ्चमी भी है आज से दीपावली से बंद सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान खुल जायेंगे। आप सभी सनातनियों को लाभ पञ्चमी एवं छठ व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : षष्ठी – 03:27 ए एम, अक्टूबर 31 तक सप्तमी
✏️ तिथि के स्वामी :- षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है। षष्ठी (छठ) के देवता भगवान भोलेनाथ के पुत्र और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय जी है।
💫 नक्षत्र – उत्तर फाल्गुनी 14.34 PM तक तत्पश्चात हस्त
🪐 नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के देवता आर्यमन और स्वामी सूर्य, बुध देव जी है।
📢 योग – इंद्र 16.07 तक तत्पश्चात वैधृति
👉🏼 योग के स्वामी :- इंद्र योग के स्वामी पितृ देव जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है।
प्रथम करण : कौलव – 04:38 पी एम तक
द्वितीय करण :- तैतिल – 03:27 ए एम, अक्टूबर 31 तक गर
🔥 गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:26:21
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:34:37
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:48 ए एम से 05:40 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:14 ए एम से 06:31 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:27 पी एम से 05:51 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:38 पी एम से 06:55 पी एम
💧 अमृत काल : 01:19 ए एम, अक्टूबर 31 से 02:49 ए एम, अक्टूबर 31
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 31
🌸 त्रिपुष्कर योग : 05:48 ए एम, अक्टूबर 31 से 06:32 ए एम, अक्टूबर 31
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:31 ए एम से 07:26 ए एम 05:48 ए एम, अक्टूबर 31 से 06:32 ए एम, अक्टूबर 31
❄️ रवि योग – आज सुबह 9 बजकर 6 मिनट तक
☄️ ज्येष्ठा नक्षत्र – आज सुबह 9 बजकर 6 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में आठ बादाम अर्पण करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विश्व मितव्ययिता दिवस, स्वामी दयानंद सरस्वती शहिद दिवस, सूर्यषष्ठी (डाला छठ)/मूल समाप्त
✍🏽 विशेष – मित्रों, षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
मोटिवेशन देते हैं दोड़ते हुए घोड़े जीवन में सफलता और तरक्की पाने के लिए यदि वास्तु शास्त्र में दिये कुछ उपाय अपना लिये जायें तो आपकी मेहनत को चार चांद लग जायेंगे। आप अपने जीवन में हमेशा आगे बढ़ते रहेंगे. इसीलिए आज हम बात कर रहे हैं घर या ऑफिस में दौड़ते घोड़ों की तस्वीर या मूर्ति लगाने के बारे में। अगर आप अपने करियर को लेकर परेशान रहते हैं, अगर आपको लगता है कि सब कुछ करते हुए भी आप एक ही जगह स्थिर हैं, अगर आपको जीवन में आगे बढ़ने के लिये मोटिवेशन की जरूरत है, तो घर में दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर जरूर लगाएं।
घोड़ा है शक्ति का प्रतीक दरअसल, घोड़े शक्ति व ऊर्जा का प्रतीक होते हैं. घोड़े की तस्वीर देखते ही आलस्य दूर हो जाता है और अंदर एक ऊर्जा समाहित हो जाती है। इसलिए घोड़े की तस्वीर लगाने से हम भी जीवन की दौड़ में दौड़ने और सफल होने के लिए उत्साहित रहते हैं।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सारे टोटके आजमा कर थक गए हो तो इसे जरूर पढ़ें
सरसों के तेल में सिके गेहूं के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूए, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तेल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरंडी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात को किसी चौराहे पर रखें और कहें – ‘हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूं कृपा करके मेरा पीछा ना करना।’ सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।
विवाह हो या व्यापार, परीक्षा हो या प्यार हर काम में आपका भाग्य तेजी से आपका साथ देने लगेगा।
🥝 आरोग्य संजीवनी 🍓
मोटापा नाशक सुदर्शन चूर्ण मोटापा एक असाध्य रोग है । इसकी कोई दवा नहीं है । डाईटिंग करने से शरीर के सभी तत्व दुर्बल होते है । इससे नपुंसकता , बंध्यापन , एनीमिया जैसे रोग उत्पन्न हो जाते है । आयु कम होती है । कठिन कसरत भी शारीरिक विकार उतपन्न करते है ।
परिश्रम तो करना चाहिए, पर मोटे व्यक्ति को बहुत परिश्रम करना भी ठीक नहीं है । इस से हार्ट फेल का खतरा रहता है ।
यह चूर्ण और निचे दिया गया तेल उपयोग करने से शरीर स्वाभाविक रूप से विजातीय तत्वों को मेद (चर्बी) सहित सामान्य सरल प्रक्रिया से बाहर कर देता है ।
दोनों नुस्खे विधि सहित दिए गये है । आप स्वयं बना ले या हमसे मंगवा ले । इस वेबसाइट का उद्देश्य विश्व को भारतीय चिकित्सा विज्ञानं का चमत्कार दिखाना और उनसे जनहित- लोकहित में पीड़ितों की रक्षा करना है धन कमाना नहीं ।
आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में परिश्रम और तकनीकी झमेले बहुत होते है । इन्हें मशीनों से नही बनाया जा सकता । इसीलिए इनका महंगा होना विवशता है ।
औषधि – सोंठ , कालीमिर्च, पीपर, चव्य , सफ़ेद जीरा , हिंग, कालानमक , चीता , त्रिफला, अपामार्ग की जड़ और बीज, वायविडंग , ज्वाक्षार , त्रिकुय – 100 ग्राम , लौह भस्म 10 ग्राम ।
सबको अलग-अलग कूट – पीसकर कपडे से छानकर 100 ग्राम की मात्रा में मिला दें । फिर लौह भस्म डालकार इसे खरल में घोंटे 7 घंटा । इसे रख लें । चीनी मिट्टी या शीशे के बर्तन में ।
मात्रा – 10 ग्राम प्रातः (10 ग्राम शहद के साथ ) 10 ग्राम सांय (100 % परीक्षित है । यह सूत्र अब गायब हो गया है । गुरुदेव ने इसे ‘अघोरी तांत्रिक’ से प्राप्त किया है )
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
गुरू द्वारा ब्रह्म का ज्ञान
ब्रह्मविषयक ज्ञान अति सूक्ष्म है। शंकाएँ पैदा होती हैं और उनको दूर करने के लिए एवं मार्ग दिखाने के लिए ब्रह्मज्ञानी आध्यात्मिक गुरू की आवश्यकता रहती है।
सत्य के सच्चे खोजी को सहायभूत होने के लिए गुरू अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आध्यात्मिक गुरू साधक को अपनी प्रेमपूर्ण एवं विवेकपूर्ण निगरानी में रखते हैं तथा आध्यात्मिक विकास के विभिन्न स्तरों में से उसे आगे बढ़ाते हैं।
सच्चे गुरू सदैव शिष्य के अज्ञान का नाश करने में तथा उसे उपनिषदों का ज्ञान देने में संलग्न रहते हैं।
वेद भी ज्ञानमार्ग के पथप्रदर्शक गुरू की प्रशस्ति गाना चूकते नहीं हैं।
साधक कितना भी बुद्धिमान हो फिर भी गुरू अथवा आध्यात्मिक आचार्य की सहाय के बिना वेदों की गहनता प्राप्त करना या उनका अभ्यास करना उसके लिए संभव नहीं है।
गुरू अपने शिष्य की दैवी शक्तियों को जागृत करते हैं।
प्रथम को अपने गुरू को, आध्यात्मिक आचार्य को खोज लो जो आपको अनन्त तत्त्व अथवा शाश्वत चेतनप्रवाह के साथ एकत्व साधने में सहाय कर सकें।
अध्यात्ममार्ग में सलामतीपूर्वक, दृढ़ता से आगे बढ़ने के लिए अपने गुरू के द्वारा ही शिष्य को सूचनाएँ मिल सकती हैं।
अपने गुरू की इच्छा के शरण हो जाओ। उनको आत्मसमर्पण करो। तभी आपका उद्धार होगा।
🙇🏻‍♀️ गुरू ही ईश्वर
ईश्वर ही गुरू के रूप में दिखते हैं।
सच्चे गुरू एवं सच्चे साधक बहुत कम होते हैं।
योग्य शिष्यों को यशस्वी गुरू प्राप्त होते हैं।
ईश्वर की कृपा गुरू का रूप लेती है।
गुरू अपने शिष्य को अपने जैसा बनाते हैं, अतः वे पारस से भी महान हैं।
संसार सागर को पार करने के लिए गुरू जैसी कोई नौका नहीं है।
“हे राम ! तुम्हारे तन, मन, धन, अपने सदगुरू के चरणों में समर्पित कर दो, जिन्होंने तुम्हें परम सुख या मोक्ष का मार्ग दिखाया है।”
अपने गुरू या आचार्य के समक्ष हररोज अपने दोष कबूल करें, तभी आप इस दुनियावी निर्बलताओं से ऊपर उठ सकेंगे।
गुरू दृष्टि, स्पर्श, विचार या शब्द के द्वारा शिष्य का परिवर्तन कर सकते हैं।
गुरू और ईश्वर सचमुच एकरूप हैं।
गुरू इस दुनिया में ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि हैं।
गुरू आपके लिए ‘इलेक्ट्रिक लिफ्ट’ हैं। वे आपको पूर्णता के शिखर पर पहुँचाएँगे।
गुरू के प्रति निःस्वार्थ एवं भक्तिभावपूर्वक सेवा यह पूजा, भक्ति, प्रार्थना और ध्यान है।
“हे राम ! जिससे आत्म-साक्षात्कार को गति मिलती है, जिससे चेतना की जागृति होती है, उसे गुरूदीक्षा कहते है।”
यदि आप गुरू में ईश्वर को नहीं देख सकते तो फिर और किसमें देख सकेंगे ?
जब तुम मेरे समक्ष निखालिस होकर अपना हृदय खोलोगे तभी मैं तुम्हे सहाय कर सकूँगा।
अपने मित्रों, आदर्शों तथा गुरू या आध्यात्मिक आचार्य के प्रति वफादार एवं सन्निष्ठ रहो।
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⚜️ दक्षिण भारत में इन्हे भगवान मुरुगन के रूप में पूजा जाता है। यह दक्षिण भारत के तमिल नाडु राज्य के रक्षक देव भी माने जाते हैं।
भारत के आलावा विश्व के अन्य देशों जैसे श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर आदि में भी कार्तिकेय जी को इष्ट देव के रूप में स्वीकार किया गया है।
कार्तिकेय जी को युवा और बाल्य रूप में ही पूजा जाता है। भगवान कार्तिकेय जी को सदेव युवा रहने का वरदान प्राप्त है ।
इस तिथि में कार्तिकेय जी की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से भक्तो को बल और साहस की प्राप्ति होती है, विवाद, मुक़दमो में सफलता मिलती है, शत्रु परास्त होते है।
कार्तिकेय गायत्री मंत्र : – ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कन्दा प्रचोदयात’. यह मंत्र हर प्रकार के दुख एवं कष्टों का नाश करने के लिए प्रभावशाली है ।

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