आज का पंचांग गुरुवार, 03 नवम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
…. ✦••• जय श्री हरि •••✦ …
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 03 नवम्बर 2022
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- दशमी तिथि 19:31:00 तक तदोपरान्त एकादशी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः-दशमी तिथि की स्वामी यमराज जी हैं तथा एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी हैं।
💫 नक्षत्रः- शतभिषा नक्षत्र 24:49:00 तक तदोपरान्त पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु देव हैं तथा पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के स्वामी गुरु देव हैं।
🔊 योगः-ध्रुव 07:30:00 तक तदोपरान्त व्याघात
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 08:17 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 07:30 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 09:19:00A,M से 10:41:00 A.M तक
⚜️ दिशाशूलः- गुरूवार को दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि ज्यादा आवश्यक हो तो घर से सरसों के दाने या जीरा खाकर निकलें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 01:27:00P.M से 02:49:00P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:29:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:31:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:50 ए एम से 05:42 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:16 ए एम से 06:34 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:24 पी एम से 05:48 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:35 पी एम से 06:53 पी एम
💧 अमृत काल : 05:53 पी एम से 07:25 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 04
☄️ ध्रुव योग – आज का पूरा दिन पार कर के अगली सुबह 5 बजकर 25 मिनट तक
⭐ रवि योग – आज रात 12 बजकर 49 मिनट तक
☀️ शतभिषा नक्षत्र – आज रात 12 बजकर 49 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में शहद भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सरदार बल्लभभाई पटेल की जयन्ती, राष्ट्रीय एकता दिवस, पुलिस कर्मियों का राष्ट्रीय एकता शपथ दिवस, छठे मुगल बादशाह औरंगजेब का जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस, एच. जे. कनिया – स्वतंत्र भारत के प्रथम मुख्य न्यायाधीश, देवदर्शन, पंचक जारी
✍🏽 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
पति-पत्नी के संबंधों में खटास
शयनकक्ष, यानी बेडरूम में आप वैसे तो कहीं भी शीशा लगा सकते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार बेड के ठीक सामने आइना या शीशा नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि अगर बेड के ठीक सामने आइना लगा होगा तो सबसे पहले सुबह उठने पर आपको वही दिखेगा जो कि अशुभ है। कहते हैं सुबह उठते ही सबसे पहले अपनी हथलियों में भगवान का स्मरण करना चाहिए। इसलिए बेड के सामने आइना न लगाएं। इसके अलावा ऐसा करने से पति-पत्नी के संबंधों में भी खटास आ जाती है और साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी झेलनी पड़ सकती हैं।
👉🏼 करें ये उपाय
लेकिन अगर आपके बेडरूम में लगा वह शीशा फिक्स है और आप उसे हटा नहीं सकते तो उस पर रात को सोने से पहले ही कपड़ा ढंक दें। एक बात और कि आप बेड के सामने वाली जगह, यानी वह दिशा जो आपको उठते ही सबसे पहले दिखाती है, उसे छोड़कर आप बेडरूम की किसी भी दिशा में आइना लगा सकते हैं।
अचानक क्यों टूट जाता है आईना इसके आलावा आपाके जानकर हैरानी होगी कि जब कोई आइना अचानक से टूट जाता है तो इसका मतलब है कि घर पर आई कोई बड़ी मुसीबत इस आइने पर टल गई है। इसलिए इसे बिना देर किए ही घर से बाहर फेंक देना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जीवन में तनाव है तो इस मंत्र को जपें
यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीड़ित हैं, अपने आपको असुरक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए 11 बुधवार लगातार 1 नारियल नीले वस्त्र में लपेटकर किसी भिखारी को दान करें
अपने शयनकक्ष में तांबे का एक पिरामिड स्थापित करें।
नित्य मानसिक रूप से निम्न मंत्र का जाप अवश्य किया करें।
मंत्र : ॐ अतिक्रकर महाकाय, कल्पान्त दहनोपम
भैरवाय नमस्तुभ्यमनुज्ञां दातुमहसि!!
इस उपरोक्त उपाय से एक ओर जहां आपको मानसिक तनाव/ भय/ दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलेगी वहीं परिवार में अगर कोई नकारात्मक विचारधारा का है तो उसके विचारों में भी परिवर्तन आना आरंभ होगा।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
पागलों की सिगरेट
अपराजिता, कोयल, कटभी की छाल , त्रिकुटा, प्रियंगु, सिरस, हल्दी, दारु-हल्दी, सिरस की छाल , देवदारु, बकरी की मेंगनी,अपामार्ग की बीज।
इन सब को सुखाकर कूटकर रखे। इन्हें बीड़ी के पत्ते या सिगरेट के पेपर में लपेट कर दिन-रात में चार बार धुम्रपान कराने से- साथ में सिर में बिनौले का तेल लगाने से- मिर्गी, पागलपन, हिस्टिरिया, पीनस रोग, शरीर में एकत्रित हुए विष विकार दूर होते है।
👉🏼 ऐसा चरक ऋषि का कहना है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आमतौर पर सनातन धर्म में पंचक लगना अशुभ माना जाता है। पंचक लगते ही शुभ और मांगलिक कार्यों पर पाबंदी लग जाती है। हालांकि ज्योतिष आचार्य श्री गोपी राम का कहना है कि सभी पंचक अशुभ नहीं होते हैं। सामान्य पंचक और भीष्म पंचक में बड़ा फर्क है। इस बार भीष्म पंचक 04 नंवबर से लगने वाला है। ज्योतिष शास्त्र में भीष्म पंचक को बहुत ही शुभ बताया गया है। भीष्म पंचक में व्रत और पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
भीष्म पंचक का व्रत कार्तिक शुक्ल एकादशी से शुरू होता है और पूर्णिमा तक रहता है। कार्तिक पूर्णिमा पर दान-स्नान के बाद ही व्रत का समापन होता है। कहते हैं कि इस दिन भीष्म पितामह ने भी व्रत किया था। तभी से यह भीष्म पंचक के नाम से लोकप्रिय हुआ।
कितने प्रकार के होते हैं पंचक?
1 । रोग पंचक
2 । राज पंचक
3 । अग्नि पंचक
4 । मृत्यु पंचक
5 । चोर पंचक
6 । बुधवार और गुरुवार पंचक
कैसे शुरू हुए भीष्म पंचक? महाभारत में पांडवों की जीत के बाद भगवान श्री कृष्ण पांडवों को भीष्म पितामह के पास ले गए। श्री कृष्ण ने पितामह से पांडवों को ज्ञान देने को कहा। उस वक्त पितामह शरसैया पर लेटे हुए थे। फिर भी उन्होंने कृष्ण का अनुरोध स्वीकार किया और पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म और मोक्ष धर्म का अनमोल ज्ञान दिया। ऐसा कहा जाता है कि पितामह के ज्ञान देने का ये सिलसिला एकादशी से पूर्णिमा तक निरंतर चलता रहा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने पितामह से कहा कि आपने जो ज्ञान इन पांच दिनों में पांडवों को दिया है, इससे ये अवधि अत्यंत मंगलकारी हो गई है। इसलिए आज से इन पांच दिनों को भीष्म पंचक के नाम से जाना जाएगा।
पंचक लगने के बाद शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। इन दिनों में शादी-विवाह, भवन निर्माण, मुंडन आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। हालांकि भीष्म पंचक इनसे बिल्कुल अलग है। इसमें किसी प्रकार के शुभ कार्य पर पाबंदी नहीं होती है।
भीष्म पंचक की पूजन विधि – भीष्म पंचक का व्रत रखने वाले लोग एकादशी पर स्नानादि के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और भगवान की पूजा-पाठ करें। इसके बाद निमित्त व्रत का संकल्प लें। दीवार पर मिट्टी से सर्वतोभद्र की वेदी बनाकर कलश की स्थापना करें। फिर ”ओम विष्णवे नम:” मंत्र का जाप करें और तिल व जौ की 108 आहुतियां देकर हवन करें। इसके बाद व्रत शुरू होने से समापन तक रोजाना दीपक प्रज्वलित करें।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

