Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 11 फरवरी 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 11 फरवरी 2023
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
।। श्री हरि आप सभी का कल्याण करें ।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।
पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।
शिवपुराण के अनुसार शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि की पीड़ा शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन उत्तरायण
🌦️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – पञ्चमी 05:22 AM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी – तिथि के स्वामी स्कंद अर्थात कार्तिकेय हैं।पंचमी के देवता नागराज है।
💫 नक्षत्र – चित्रा 22:04 PM तक उपरान्त स्वाति नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह और अधिष्ठाता देव विश्वकर्मा हैं।
🔊 योग – शूल 13:30 PM तक उपरान्त गंड योग है।
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 09:08 ए एम तक
✨ द्वितीय करण – गर – 09:31 पी एम तक
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : शनिवार का (अशुभ) काल 07:03 ए एम से 08:26 ए एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:28:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:32:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:20 ए एम से 06:11 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:45 ए एम से 07:03 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:58 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:26 पी एम से 03:11 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:05 पी एम से 06:31 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:08 पी एम से 07:25 पी एम
💧 अमृत काल : 06:54 पी एम से 08:35 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 12 से 01:01 ए एम, फरवरी 12
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 01:40 ए एम, फरवरी 12 से 07:02 ए एम, फरवरी 12
❄️ रवि योग : 01:40 ए एम, फरवरी 12 से 07:02 ए एम, फरवरी 12
☄️ शूल योग- आज शाम 4 बजकर 23 मिनट तक
💰 यायीजय योग- सूर्योदय से सुबह 9 बजकर 8 मिनट तक
🏎️ यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♂️ आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग, लाल बहादुर शास्त्री स्मृति दिवस, शहीद ‘तिलका माँझी’ जन्मोत्सव, हकीम अजमल खान जयन्ती, जार्ज वाशिंगटन जयन्ती (संयुक्त राज्य अमेरिका), (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी),जमनालाल बजाज पुण्य तिथि, साहित्यिक बनाम। एस। (विष्णु सखाराम) खांडेकर जन्म दिवस, राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद पुण्य तिथि, विश्व यूनानी दिवस (World Unani Day), प्रोमिस डे
✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि केस्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीयवृद्धि होती है।
🌸 Vastu tips 🌋
रजनीगंधा के फूलों का इस्तेमाल पूजा में किया जाता है। इतना ही नहीं इस फूल से इत्र और तेल भी बनाया जाता है। वास्तु शास्त्र में इसे धन, सुख समृद्धि पाने के लिए बेहद ही शुभ माना जाता है।
रजनीगंधा का पौधा वास्तु के हिसाब से पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए। इस दिशा में ये पौधा लगाने से घर में बरकत आती है और तरक्की के रास्ते भी खुलते हैं।
इतना ही नहीं अगर किसी पति पत्नि के रिश्ते में अनबन चल रही हो तो घर के आंगन में गमले के अंदर रजनीगंधा का पौधा लगाना चाहिए। ऐसे करने से पति पत्नि का रिश्ता मजबूत होता है साथ ही दोनों के बीच प्यार भी बढ़ता है।
सिर्फ इतना ही नहीं वास्तु के मुताबिक रजनीगंधा का पौधा लगाने के और भी कई फायदे हैं। घर में इसे लगाने से नकारात्मकता दूर होती ही है और सकारात्मकता का संचार होता है। साथ ही धन संबंधित परेशानियों से भी व्यक्ति को मुक्ति मिलती है। इस पौधे की मदद से धन प्राप्ति के रास्ते भी खुलते हैं।
💠 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तेल मालिश:-
सिर और पैर पर भृंगराज के तेल लगाएं और उससे मालिश कराएं। इससे आपको अच्छी नींद आने में बेहद मदद मिलती है। खासकर इस तेल से मालिश करने पर आपके नर्वस सिस्टम को काफी आराम मिलता है।
दिनचर्या करें सही:-
यह आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण उपाय है। समय पर सोने के लिए एक निर्धारित समय पर बिस्तर पर चले जाना अच्छी नींद के लिए जरूरी है। अगर आप समय पर सोने की कोशिश नहीं करेंगे तो आपक अनिद्रा की समस्या से ग्रसित और परेशान हो जाएंगे। इसीलिए आप अपना दिनचर्या सही कर लें।
गर्म दूध का सेवन अति लाभकारी:-
आपको बता दें कि दूध में ट्रिपटोपॉन होता है जो आपके नींद को बढ़ाने में काफी मदद करता है। अगर आप रोजाना गर्म दूध का सेवन करते हैं तो आपको जरूर अच्छी नींद आएगी। अगर आप एक ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर और थोड़ा हल्दी पाउडर मिलाकर सोने से पहले पी लें तो यह आपके लिए अति लाभकारी साबित होगा।
🍻 आरोग्य संजीवनी 🍺
मधुमेह: यदि आपके ब्लड शुगर का लेवल बहुत अधिक है, तो आपकी सांसों से फलों की महक आनी शुरू हो सकती है.
ब्रोम हाइड्रोसिस: यह तब होता है जब आपकी स्किन के बैक्टीरिया पसीने को तोड़ते हैं और एक असामान्य गंध पैदा करते हैं, जो सल्फर और प्याज की तरह हो सकता है.
हाइपरहाइड्रोसिस: इसके कारण अत्यधिक पसीना आता है, जो आपके शरीर के बैक्टीरिया के साथ मिलकर शरीर की गंध पैदा करता है. यह कुछ दवाओं के कारण भी हो सकता है, जैसे: एंटी-डिप्रेसेंट, जिंक सप्लीमेंट्स, आयरन सप्लीमेंट्स.
किडनी और लीवर की बीमारी: इसके कारण शरीर में टॉक्सिन का निर्माण होता है, जो गंध पैदा कर सकता है.
हार्मोनल उतार-चढ़ाव: मुख्य रूप से गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल उतार-चढ़ाव, प्री-मेनोपॉज या मेनोपोस में महिलाओं को गर्म चमक और रात के पसीने का अनुभव हो सकता है, जिससे अत्यधिक पसीना और गंध बढ़ जाती है.
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
सनातन धर्म में ईश्वर पूजा को सर्वोत्तम माना गया है और भक्त सभी देवी देवताओं की विधिवत पूजा भी करते हैं लेकिन एक ऐसे देवता है जिने ब्रह्मांड का रचयिता कहा जाता है लेकिन फिर भी इनकी पूजा नहीं होती है वो देव भगवान ब्रह्मा है, भगवान ब्रह्मा को ना तो मंदिर में स्थान दिया गया है और न ही इनकी कोई प्रतिमा या चित्र घर में स्थापित की जाती है
केवल पुष्कर ही एक ऐसा मंदिर है जहां पर भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है और उनकी प्रतिमा भी स्थापित है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा बता रहे हैं कि आखिर भगवान ब्रह्मा की पूजा क्यों नहीं होती है तो आइए जानते है आचार्य श्री गोपी राम से।
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान ब्रह्मा ने धरती पर यज्ञ करने का विचार किया इसके लिए उन्होंने कमल का पुष्प पृथ्वी पर भेजा। कमल का पुष्प जिस जगह पर गिरा वो था राजस्थान का पुष्कर। कमल के पुष्प का अंश गिरने से उस स्थान पर तालाब बन गया। कहा जाता है कि ब्रह्मा जी धरती लोक पर जब यज्ञ करने आए तब उनकी पत्नी सावित्री को किसी बात का ज्ञात न होने पर वे उस स्थान पर नहीं आ पाई यज्ञ का मुहूर्त बीतता जा रहा था और सभी देवी देवता भी यज्ञ स्थल पर पहुंच चुके थे
मुहूर्त बीत न जाएं इसके लिए ब्रह्मा जी ने नंदिनी गाय के मुख से माता गायत्री को प्रकट किया और उनसे विवाह करके उनके साथ शुभ मुहूर्त में यज्ञ किया। कुछ समय बाद जब ब्रह्मा की पत्नी सावित्री को पता चला तो वह भी पृथ्वी लोक आ पहुंची जहां उनके बगल में गायत्री माता को देखकर वह क्रोधित हो गई और ब्रह्मा जी को श्राप दे डाला कि आपकी पूजा पृथ्वी लोक में नहीं की जाएगी इस श्राप को देखते हुए सभी देवी देवताओं ने उनसे आग्रह किया कि वो अपने वचन वापस ले ले। जिसके बाद उन्होंने अपना श्राप वापस लिया ओर कहा कि केवल पुष्कर में ही ब्रह्मा जी की पूजा की जाएगी इसके बाद से पूरी दुनिया में भगवान ब्रह्मा का अकेला मंदिर पुष्कर में है और यहां पर ही भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ आपके उपर यदि मंगल कि दशा चलरही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो भगवान कार्तिकेय का पूजनकरें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में सफलता प्राप्ति केलिये षष्ठी तिथि के सायंकाल में शिवमन्दिर में छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा परबाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं एवं सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमनेका कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायेंमनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होताहै और छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।


