मध्य प्रदेश

साईखेडा से बारछी घाट तक एप्रोच सडक और पुल निर्माण, सत्ताधारी दल को बनेगी गले की फाश

साईखेडा । साईखेडा के पश्चिम से सतपुड़ा पर्वत से निकलने वाली दुधी पर साईखेडा वासी और बनखेडी क्षेत्र के ग्राम वासी लंबे से दुधी नदी तक घाट एप्रोच सडक और नदी पर सेतु बनाए जाने की शासन प्रशासन मुख्यमंत्री, सासंद, विधायक, पिपरिया विधायक से ज्ञापन देकर सोशल मीडिया से बार बार की जा रही लेकिन सत्ताधारी नेताओं और विपक्ष का मौन से सडक पुल का काम अधर में लटका हुआ है। क्षेत्र वाद की राजनीति के चलते मुआर -उमरधा घाट पर दुधी नदी पर सेतु का काम चालू हो गया ।वहां पुल बनने से साईखेडा और नदी पार के ग्रामवासियो को कोई फायदा नहीं होगा। साईखेडा के नजदीक नदी पार बारछी ,सलैया जैतबाडा, डूमर मलकजरा, पुरैना, चांदोन, मछेरा, रिछेडा, कपूरी जैसे दर्जनों गांव लगे है जहाँ से हर रोज सैकड़ों लोगों को साईखेडा आना जाना लगा रहता है । साईखेडा में तहसील, कालेज, सीएम राईज स्कूल अस्पताल, थाना होने के बाद ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा, मरीजों को ईलाज, व्यपारियो, मजदूरों को रोजगार की सुबिधा नहीं मिल पा रही ।ग्रामीण क्षेत्र मै साग सब्जी का व्यापार करने वाले किसानों को अपनी फसल का सडक सुविधा न होने से लाभ नहीं मिल पा उन्हें 30-35 किलोमीटर दूर बनखेडी पिपरिया माल बेचने जाना पड रहा । गांव के पढने वाले बच्चों को बरसात में स्कूल कालेज आने मै भारी परेशानी होती है । परिवार के किसी की तबीयत बिगड़ने पर साईखेडा न आकर दूर बनखेडी पिपरिया जाना पडता है कभी कभी ईलाज के अभाव में परिजन को खोना पडता है मौत हो जाती है। पूर्व विधायक गोविंदसिंह पटेल, नगर के समाजसेवी ब्रजेंद्रसिंह कुशवाहा और किसान नेता सुरेंद्र कुमार तोमर ने पीडब्लूडी अधिकारी अजीत पटेल से मुख्य सडक से बारछी घाट तक ऐप्रोच सडक की डीपीआर तैयार कर बजट प्रस्ताव मै बात रखने की बार बार मांग की थी लेकिन अधिकारी की अनसुनी करने से साईखेडा वासियो बारछी घाट ऐप्रोच सडक की सौगात नहीं मिल सकती ।लोगो का मानना है कि अधिकारी कर्मचारी की अनदेखी से शासन की सुबिधायें जन जन तक नहीं पहुंच पाती है। साईखेडा और बारछी के युवा सडक और पुल नहीं तो वोट नहीं का मन बनाकर आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने के लिए हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौपने का मन बना रहे है। जनापेक्षा शासन प्रशासन दुधी नदी तक ऐप्रोच सडक और पुल बनाने की योजना बनाऐ जिससे आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी आज गावों का शहर से संपर्क टूटा है जिससे साईखेडा का व्यापार चौपट है।

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