क्राइम

हत्या के आरोपियों की मेहमान नवाजी करती नजर आई पुलिस, रेस्टोरेंट में हो रहा था स्वागत

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
रिपोर्टर : नीलेश पटेल
गाडरवारा । साईंखेड़ा पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए जा रहे है। हत्या के आरोपियों को किराए का ऑटो करके ले जाया जा रहा जबकि दोनों आरोपी पुलिस कस्टडी में
साईंखेड़ा थाने से सरकारी वाहन से निकले थे। और रास्ते में रेस्टोरेंट पर स्वागत करती नजर आई।
साईखेडा नगर ने विगत दिनों सगी बहिन ने आशिक के साथ मिल कर अपनी ही छोटी बहन की हत्या कर दी । आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस आरोपियों को कोर्ट ले जा रही थी लेकिन पुलिस अधिकारी कर्मचारी उन पर मेहरबान होकर मेहमान नवाजी कर बिना हथकड़ी के होटल पर मिठाई खिला रहे थे साईंखेड़ा थाना की पुलिस चर्चित हत्याकांड की मुख्य आरोपियों को गाडरवारा की एक मिठाई की दुकान में बिना हथकड़ी के छोड़ना पड़ा … यह वही आरोपी हैं जिन्होंने अपनी ही बहन की हत्या की है। प्रेम प्रसंग के इस मामले में पुलिस भी आरोपियों के साथ यारी निभाते नजर आ रही है। हालांकि यह एक बड़ी लापरवाही है जो इस तरह 302 के आरोपियों को खुला छोड़ दिया। साईंखेड़ा थाना से एक तरफ पुलिस की सरकारी फोर व्हीलर में आरोपियों को बैठाया गया था… साईंखेड़ा थाना पुलिस की ऐसी क्या मजबूरी बन गई जो , इतने बड़े हत्याकांड के आरोपियों को ऑटो से भेजना पड़ा जिसमें जिम्मेदार पुलिसकर्मी भी मीडिया का कैमरा देखते ही नौ दो ग्यारह हो गए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है यह वीडियो गाडरवारा से बीकानेर स्वीट्स का बताया जा रहा है जहां पर कुछ पुलिसकर्मी 302 के आरोपियों को मिठाई खिलाते नजर आ रहे हैं जब आरोपियों को साईंखेड़ा थाने से हथकड़ी लगाकर सरकारी गाड़ी में बकायदा कोर्ट के लिए रवाना किया गया तो यह आरोपी और यह पुलिसकर्मी एक ऑटो में बीकानेर स्वीट्स पर कैसे पहुंचे।आमजान पुलिस प्रेस विज्ञप्ति पर सवाल उठा रहे है उसमें बहिन और आशिक ने मारपीट कर छोटी बहन की हत्या करना कबूला और पास में सो रही मां को अहसास नहीं कि यहां शोर गोल हो रहा है । लाश के शरीर को काला पडना अकडना भी संदेह को जन्म देता है लगता घटना एक दिन पूर्व की हो सकती है पुलिस द्वारा दुष्कर्म की जानकारी न देना भी मामले में आशंका व्यक्त करता है।
पुलिस की की दलील गाड़ी खराब हो जाने के कारण कोर्ट में आरोपियों को समय पर ले जाने के लिए ऑटो किया गया, लेकिन सवाल फिर खड़े हुए क्या थाना प्रभारी गाडरवारा थाने से सरकारी वाहन नही बुला सकते थे ? बीकानेर की दुकान पर आरोपियों को क्यों खड़ा किया गया ? और मीडिया को देख भाग खड़े हुए पुलिसकर्मी और आरोपी तत्काल ऑटो लेकर हुए रवाना, अब देखना यह है पुलिस अधीक्षक इस घोर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करते हैं ?

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