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01 मई 2023 : मोहिनी एकादशी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🌐 01 मई 2023 : मोहिनी एकादशी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
🧾 हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी व्रत रखा जाता है। वैसे तो हर महीने में दो एकादशी तिथि होती है। एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष में, लेकिन मोहिनी एकादशी का खास महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं। मान्यता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत सभी प्रकार के दुखों का निवारण करने वाला, सब पापों को हरने वाला और व्रतों में उत्तम व्रत है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल से छुटकारा पाकर विष्णु लोक को प्राप्त करता है। मोहिनी एकादशी के दिन पूजा अर्चना करने से मन को शांति मिलती है और धन, यश और वैभव में वृद्धि होती है। ऐसे में चलिए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से मोहिनी एकादशी की तिथि, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में…
🚩 मोहिनी एकादशी 2023 कब है?
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 अप्रैल 2023 को रात 08 बजकर 28 मिनट से हो रही है। अगले दिन 01 मई 2023 को रात 10 बजकर 09 मिनट पर इस तिथि का समापन होगा। उदया तिथि 1 मई को प्राप्ति हो रही है, इसलिए मोहिनी एकादशी व्रत 1 मई 2023, सोमवार को रखा जाएगा।
🌊 मोहिनी एकादशी 2023 व्रत पारण समय
मोहिनी एकादशी व्रत के पारण का समय 2 मई को सुबह 05 बजकर 40 से सुबह 08 बजकर 19 मिनट तक है। ऐसे में इस मुहूर्त में आप व्रत का पारण कर सकते हैं।
🗣️ मोहिनी एकादशी कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन किया गया तो उससे अमृत कलश की प्राप्ति हुई। देवता और दानव दोनों ही पक्ष अमृत पान करना चाहते थे, जिसकी वजह से अमृत कलश की प्राप्ति को लेकर देवताओं और असुरों में विवाद छिड़ गया। विवाद की स्थिति इतनी बढ़ने लगी कि युद्ध की तरफ अग्रसर होने लगी। ऐसे में इस विवाद को सुलझाने और देवताओं में अमृत वितरित करने के लिए भगवान विष्णु ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया।
इस सुंदर स्त्री का रूप देखकर असुर मोहित हो उठे। इसके बाद मोहिनी रूप धारण किए हुए विष्णु जी ने देवताओं को एक कतार में और दानवों को एक कतार में बैठ जाने को कहा और देवताओं को अमृतपान करवा दिया। अमृत पीकर सभी देवता अमर हो गए। जिस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था, उस दिन वैशाख मास की शुक्ल एकादशी तिथि थी। इस दिन विष्णु जी ने मोहिनी रूप धारण किया था, इसलिए इस दिन को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा की जाती है।
✡️ 01 मई 2023 को मोहिनी एकादशी का रखा जाएगा व्रत
❄️ रवि और ध्रुव दो शुभ योग बन रहे
सनातन हिन्दू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है. भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत को रखने से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं.पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं. इस साल 1 मई 2023 को मोहिनी एकादशी है. आइए एकादशी के मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में जानते हैं।
📆 30 अप्रैल की रात से होगी शुरुआत
एकादशी तिथि की शुरुआत 30 अप्रैल 2023 को रात 08 बजकर 28 मिनट से होगी और समापन 1 मई को रात 10 बजकर 09 मिनट पर होगा. उदया तिथि को मानते हुए एकादशी 1 तारीख को मनाई जाएगी।
⚛️ दो शुभ योग
एकादशी तिथि के दिन दो शुभ योग बन रहे हैं. सुबह 05:41 बजे से 05:51 बजे तक रवि योग रहेगा. वहीं सुबह 11:45 बजे तक ध्रुव योग बना रहेगा. मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जीवन में सुख की प्राप्ति होती है और मोक्ष मिलता है।
🤷🏻‍♀️ मोहिनी एकादशी का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन किया गया तो उससे अमृत कलश की प्राप्ति हुई. देवता और दानव दोनों ही पक्ष अमृत पान करना चाहते थे, जिसकी वजह से अमृत कलश की प्राप्ति को लेकर देवताओं और असुरों में विवाद छिड़ गया. विवाद की स्थिति इतनी बढ़ने लगी कि युद्ध की तरफ अग्रसर होने लगी. ऐसे में इस विवाद को सुलझाने और देवताओं में अमृत वितरित करने के लिए भगवान विष्णु ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया. असुरों को अपने माया जाल में फंसाकर रखा. इस दौरान देवताओं ने सारा अमृत ग्रहण कर लिया था और कीमती अमृत को असुरों के हाथों से बचा लिया गया।
🍱 पूजन विधि
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. इसके पश्चात कलश स्थापना कर भगवान विष्णु की पूजा करें. इसके बाद मोहिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें. विष्णु मंत्रों का जाप करें. दिन भर व्रत का पालन करें और विष्णु का स्मरण करते रहें. रात्रि में श्री हरि विष्णु का स्मरण करते हुए जागरण करें, उनके भजन-कीर्तन करें। अगले दिन, यानि द्वादशी तिथि को विष्णु पूजन के पश्चात दान दक्षिणा करें और अपने व्रत का पारण करें

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