ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 03 अक्टूबर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 03 अक्टूबर 2023

03 अक्टूबर 2023 दिन मंगलवार को ही अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज चौथे और पांचवे दोनों दिन का श्राद्ध किया जाएगा। अर्थात चतुर्थी और पंचमी तिथि की जितनी भी मृतात्मायेँ हैं, उन सभी का श्राद्ध आज ही किया जाएगा। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “चौथे और पांचवे दोनों दिन के श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : आश्विन माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 05:33 AM तक उपरांत षष्ठी
✏️ तिथि के स्वामी :- पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी और षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र कृत्तिका 06:03 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र के स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र हैं।
🔕 योग : वज्र योग 08:17 AM तक, उसके बाद सिद्धि योग
प्रथम करण : कौलव – 05:46 पी एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 05:33 ए एम, अक्टूबर 04 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:21 पी एम से 01:58 पी एम
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : मंगलवार का राहुकाल 03:35 पी एम से 05:11 पी एम राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:07:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:54:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:38 ए एम से 05:26 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:46 ए एम से 12:34 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:08 पी एम से 02:56 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:05 पी एम से 06:30 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:05 पी एम से 07:18 पी एम
💧 अमृत काल : 03:42 पी एम से 05:16 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:46 पी एम से 12:35 ए एम, अक्टूबर 04
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:15 ए एम से 06:04 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में शहद से भरा पात्र चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/पंचमी श्राद्ध, विश्व प्रकृति दिवस, निर्देशक जेपी दत्ता जन्म दिवस, मॉडल अंकिता शौरी जन्म दिवस, मीन गर्ल्स डे, भारतीय पैरा एथलीट निषाद कुमार जन्म दिवस, जर्मन एकता दिवस, इराक स्वतंत्रता दिवस, विश्व पर्यावास दिवस, चिकित्सक कादम्बिनी गांगुली स्मृति दिवस, वन्यजीव सप्ताह (2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर)
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
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🗽 Vastu tips 🗼
लाफिंग बुद्धा रखने को लेकर जान लें ये जरूरी बातें
बाजार में अलग-अलग डिजाईन और आकार में बहुत तरह के लाफिंग बुद्धा मिलते हैं, लेकिन कौन-सा आपके लिए ठीक रहेगा, कौन-सा लाफिंग बुद्धा आपकी परेशानियों के अनुकूल है, ये हम आपको बता देते हैं। जैसे कि एक सवाल ऐसा ही है कि हाथ को ऊपर उठाए हुए लाफिंग बुद्धा आप क्यों रखना चाहिए और ये किन स्थितियों में सुधार ला सकते हैं।
हाथ को ऊपर उठाए हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति
अगर आपका बिजनेस ठीक से नहीं चल रहा है, आपकी आर्थिक स्थिति डामाडौल बनी हुई है यानि आपको लगातार पैसों से संबंधित नुकसान उठाने पड़ रहे हैं तो आप अपनी दुकान या ऑफिस में दोनों हाथ को ऊपर उठाए हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति रखें। इससे आपकी बिजनेस संबंधी परेशानियां धीरे-धीरे कम होती जायेंगी। तो, अब लाफिंग बुद्धा घर में रखते समय इन बातों का ख्याल जरूर रखें।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मंत्रों के क्या फायदे हैं?
मंत्र का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मंत्र मनोकामनाएं पूर्ण करता है, ऐसी कोई भी कामना/इच्छा नहीं है जिससे मंत्र पूरा ना कर सके लेकिन अलग-अलग कामना के लिए अलग-अलग मंत्र है, वशीकरण मंत्र अलग है, उच्चाटन मंत्र अलग है, कीलन, मारण, मोहन अलग-अलग मंत्र है, अलग-अलग कार्यों के लिए.
मंत्र जप के पीछे आपकी भावना का भी बहुत बड़ा महत्व होता है, मंत्रों से सहायता लेने के लिए सब से पहले विश्वास होना चाहिए, अंतर्मन से उच्चारा गया (कोई भी) मंत्र ही असर कारक (मदद कर्ता) होता है
मंत्र में , देवता में , तीर्थ में , गुरु में और वैद्य में जिसकी जैसी आस्था होती है , वैसा फल मिलता है ।
मंत्र के प्रति आपकी श्रद्धा होनी चाहिए। मंत्र श्रद्धानुसार लोगों को फल देते हैं,
💉 आरोग्य संजीवनी 💊
अपने पेट को साफ रखने के लिए आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
टॉयलेट में घंटों बैठने के बावजूद आपका पेट साफ नहीं होता है और ऐसे में आपको दिनभर अजीब सा महसूस होता है तो परेशान होने की जरूरत नहीं क्‍योंकि आज हम आपके लिए कुछ जबरदस्‍त घरेलू उपाय लेकर आए हैंं जिसकी मदद से आपका पेट टॉयलेट में बैठते ही साफ हो जाएगा।
गुनगुना पानी: जिनको पेट साफ न होने की समस्या होती है उन्हें तो दिनभर में खूब सारा पानी पीना चाहिए। सुबह के समय तो गुनगुना पानी पीने से बहुत फायदा होता है। सुबह उठने के बाद 1 गुनगुना पानी पीएं, फिर टॉयलेट जाएं। इससे आपका पेट अच्‍छे से साफ हो जाएगा।
आंवला, हरड़ और बहेड़े: आंवला, हरड़ और बहेड़े के समभाग पाउडर का मिश्रण है। ये पचे हुए भोजन के अवशिष्ट पदार्थ को सरलता से पेट से बाहर निकाल देता है। साथ ही शरीर पर इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है। आप चाहें तो इसे गर्म पानी में डालकर काढ़ा भी बना सकते हैं।
लहसुन: अगर आप चाहती हैं कि आपका पेट सुबह घंटों टॉयलेट में बैठने की बजाय आसानी से और जल्‍दी साफ हो जाए तो खाने में लहसुन का सेवन जरूर करना चाहिए। लहसुन में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो सख्त मल को मुलायम कर आपकी आंतों से आसानी से बाहर करतेे हैंं। इसे आप भूनकर या फिर कच्चा खा सकती हैं। यह आपकी बॉडी के लिए और कई तरह से फायदेमंद होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कृपया विस्तार से जानकारी दे कि शैव और वैष्णव परंपरा क्या है ? इन परंपराओ की सुरुआत कब और कैसे हुई थी ?
हिन्दू धर्म में चार मुख्य सम्प्रदाय हैं :
वैष्णव (जो विष्णु को परमेश्वर मानते हैं) शैव (जो शिव को परमेश्वर मानते हैं)
शाक्त (जो देवी को परमशक्ति मानते हैं)
स्मार्त (जो परमेश्वर के विभिन्न रूपों को एक ही समान मानते हैं
भारत में प्राचीन काल से ही आर्य सभ्यता के साथ ही ब्राह्मा, विष्णु और शिव से संबंधित संप्रदायों का प्रचलन रहा है।
वैष्णव
भगवान विष्णु और उनके अवतारों को मानने वाले वैष्णव: वैष्णव सम्प्रदाय, भगवान विष्णु को ईश्वर मानने वालों का सम्प्रदाय है. वैष्णव धर्म या वैष्णव सम्प्रदाय का प्राचीन नाम भागवत धर्म या पांचरात्र मत है. इस सम्प्रदाय के प्रधान उपास्य देव वासुदेव हैं
अनुमान है कि लगभग 600 ई. पू. जब ब्राह्मण ग्रन्थों के हिंसाप्रधान यज्ञों की प्रतिक्रिया में बौद्ध-जैन सुधार-आन्दोलन हो रहे थे, उससे भी पहले उपासना प्रधान वैष्णव धर्म विकसित हो रहा था, जो प्रारम्भ से वृष्णि वंशीय क्षत्रियों की सात्वत नामक जाति में सीमित था। मुख्यत: तब जबकि 600 ईस्वी पूर्व यज्ञ और अन्य कर्मकांड के विरुद्ध जैन और बौद्ध संप्रदाय फल-फूल रहे थे।
वैष्णव संप्रदाय के उप संप्रदाय : वैष्णव के बहुत से उप संप्रदाय है- जैसे बैरागी, दास, रामानंद, वल्लभ, निम्बार्क, माध्व, राधावल्लभ, सखी, गौड़ीय आदि। वैष्णव का मूलरूप आदित्य या सूर्य देव की आराधना में मिलता है। भगवान विष्णु का वर्णन भी वेदों में मिलता है। पुराणों में विष्णु पुराण प्रमुख से प्रसिद्ध है। विष्णु का निवास समुद्र के भीतर माना गया है।
विष्णु के अवतार : शास्त्रों में विष्णु के 24 अवतार बताए हैं, लेकिन प्रमुख दस अवतार माने जाते हैं- मतस्य, कच्छप, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बु‍द्ध और कल्कि। 24 अवतारों का क्रम निम्न है-1.आदि परषु, 2.चार सनतकुमार, 3.वराह, 4.नारद, 5.नर-नारायण, 6. कपिल, 7दत्तात्रेय, 8.याज्ञ, 9.ऋषभ, 10.पृथु, 11.मतस्य, 12.कच्छप, 13.धनवंतरी, 14.मोहिनी, 15.नृसिंह, 16.हयग्रीव, 17.वामन, 18.परशुराम, 19.व्यास, 20.राम, 21.बलराम, 22.कृष्ण, 23.बुद्ध और 24.कल्कि।
वैष्णव ग्रंथ : ऋग्वेद में वैष्णव विचारधारा का उल्लेख मिलता है। ईश्वर संहिता, पाद्मतन्त, विष्णुसंहिता, शतपथ ब्राह्मण, ऐतरेय ब्राह्मण, महाभारत, रामायण, विष्णु पुराण आदि।
वैष्णव तीर्थ : बद्रीधाम (badrinath), मथुरा (mathura), अयोध्या (ayodhya), तिरुपति बालाजी, श्रीनाथ, द्वारकाधीश।
वैष्णव संस्कार : 1.वैष्णव मंदिर में विष्णु, राम और कृष्ण की मूर्तियाँ होती हैं। एकेश्‍वरवाद के प्रति कट्टर नहीं है।, 2.इसके संन्यासी सिर मुंडाकर चोटी रखते हैं।, 3.इसके अनुयायी दशाकर्म के दौरान सिर मुंडाते वक्त चोटी रखते हैं।, 4.ये सभी अनुष्ठान दिन में करते हैं।, 5.यह सात्विक मंत्रों को महत्व देते हैं।, 6.जनेऊ धारण कर पितांबरी वस्त्र पहनते हैं और हाथ में कमंडल तथा दंडी रखते हैं।, 7.वैष्णव सूर्य पर आधारित व्रत उपवास करते हैं।, 8.वैष्णव दाह संस्कार की रीति हैं।, 10.यह चंदन का तीलक खड़ा लगाते हैं।
(शेष कल)
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

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