ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 10 अक्टूबर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 10 अक्टूबर 2023

10 अक्टूबर 2023 दिन मंगलवार को ही अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। आज ग्यारहवें दिन का श्राद्ध किया जाएगा। अर्थात एकादशी तिथि की जितनी भी मृतात्मायेँ हैं, उन सभी का श्राद्ध आज ही किया जाएगा। आज इन्दिरा एकादशी सभी के लिए है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “इन्दिरा एकादशी और ग्यारहवें दिन के श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – आश्विन मास कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 03:09 PM तक उपरांत द्वादशी
✏️ तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – आश्लेषा 05:45 AM तक उपरान्त मघा नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र स्वामी केतु है, नक्षत्र के देवता होते हैं पितर।
🔊 योग – साध्य योग 07:46 AM तक, उसके बाद शुभ योग
प्रथम करण : बालव – 03:08 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 04:23 ए एम, अक्टूबर 11 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:21 पी एम से 01:58 पी एम
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : मंगलवार का राहुकाल 03:35 पी एम से 05:11 पी एम राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:11:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:49:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:40 ए एम से 05:29 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:05 ए एम से 06:19 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:45 ए एम से 12:31 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:04 पी एम से 02:51 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:57 पी एम से 06:22 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:57 पी एम से 07:12 पी एम
💧 अमृत काल : 06:03 ए एम, अक्टूबर 11 से 07:51 ए एम, अक्टूबर 11
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:44 पी एम से 12:33 ए एम, अक्टूबर 11
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♂️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – इन्दिरा एकादशी व्रत (सर्वे)/एकादशी श्राद्ध (पंचांग भेद), मघा श्राद्ध / विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस, राष्ट्रीय डाक-तार दिवस, भूतपूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव स्मृति दिवस, डॉ. रामविलास शर्मा जयन्ती,ऐक्ट्रेस रेखा, निर्देशक राजामौली, ऐक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह जयन्ती, ऐक्टार गजेंद्र चौहान जन्म दिवस, चरखा दिवस, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस [डब्ल्यूएचओ], मौत की सजा के विरुद्ध विश्व दिवस, स्वतंत्रता संग्राम का क्यूबा प्रारंभ, फिजी दिवस, राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह)
✍🏼 विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु शास्त्र के अनुसार हरे रंग से संबंधित चीजों को पूर्व या फिर दक्षिण-पूर्व दिशा,यानि कि आग्नेय कोण में रखना अच्छा होता है। साथ ही घर में हरी घास के छोटे-से बगीचे को भी इऩ्हीं दिशाओं में बनाना चाहिए। हरे रंग और इन दोनों दिशाओं का संबंध काष्ठ तत्व, यानि कि लकड़ी से है, इसलिए पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में हरे रंग की चीजें रखना शुभ फलदायी है। पूर्व दिशा में हरे रंग की चीज़ें रखने से घर के बड़े बेटे के जीवन की गति हमेशा बढ़ती रहती है। उसके पैर मजबूत होते हैं। वहीं आग्नेय कोण में हरे रंग की चीजें रखने से बड़ी बेटी को फायदा होता है। उसका लगातार विकास होता है और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सूखे गुड़हल के फूलों से आप एक बेतरीन आयुर्वेदिक तेल तैयाकर कर सकते हैं। आपको करना ये है कि एक कड़ाही लें, इसे गैस पर चढ़ाएं और इसमें 2 कटोरी नारियल तेल डालें। फिर इसमें मेथी के बीज और काले तिल डालें। अब इसमें गुड़हल के फूल डाल दें। ऊपर से एक प्याज काटकर मिला लें। सबको अच्छे से पकने दें। इस तेल को छान कर रख लें। ठंडा होने पर डिब्बे में बंद करके रख लें। अब इसे अपने बालों के लिए इस्तेमाल करें। ये बालों की ग्रोथ बढ़ाने के साथ आपको स्कैल्प इंफेक्शन से बचाएगा।
आरोग्य संजीवनी 🫖
क्या सेरेब्रल पाल्सी का कोई इलाज है-सेरेब्रल पाल्सी का जल्द से जल्द पता लगाना बेहद जरूरी है नहीं तो ये समस्या आगे चलकर आपको परेशान कर सकती है। हालांकि, इसका पूरी तरह से इलाज नहीं है। सेरेब्रल पाल्सी का उपचार व्यक्ति की जरूरतों और लक्षणों के आधार पर भिन्न होता है। इसमें अक्सर मांसपेशियों में अकड़न या दौरे जैसे लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए कई प्रकार की थेरेपी और दवाएं दी जाती हैं। उपचार के विकल्पों में फिजिकल थेरेपी, व्यावसायिक चिकित्सा, दवाएं और सर्जरी भी शामिल हैं। सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित कई व्यक्ति पूरा जीवन जीते हैं लेकिन जागरूकता बढ़ाने और समावेशिता को बढ़ावा देने से सेरेब्रल पाल्सी वाले लोगों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
📖 गुरु भक्ति योग;🕯️
राजा नृग कौन थे और उन्हें श्राप क्यों मिला था? एक बार भगवान श्रीकृष्ण के पुत्रगण जंगल में मनोरंजन के लिए गए। रास्ते में उन्हें प्यास लगी। जब वे पानी की तलाश कर रहे थे तो उन्हें एक सूखे कुएं के अंदर एक विशाल गिरगिट मिला। उन्होंने उसे बचाने की कोशिश की। विशाल गिरगिट एक पहाड़ी के आकार का था। रस्सियों और अन्य उपकरणों के साथ भी, मजबूत युवा यादव उसे उपर खिंच नहीं सके। कई असफल प्रयासों के बाद वे सभी महल में वापस गए और श्रीकृष्ण को सूचित किया। विचित्र विशाल गिरगिट के बारे में सुनकर श्रीकृष्ण कुएं पर पहुंचे और बिना किसी प्रयास के गिरगिट को बाहर निकाल लिया। श्रीकृष्ण के दिव्य स्पर्श पर, गिरगिट एक दिव्य देवता में परिवर्तित हो गया। अचानक परिवर्तन से चकित होकर, श्रीकृष्ण ने उस व्यक्ति से अपना परिचय देने को कहा। दिव्य पुरुष ने विनम्र प्रणाम करते हुए श्रीकृष्ण को अपनी कहानी सुनाई।
वह राजा इक्ष्वाकु (सूर्य वंशज) के पुत्र राजा नृग थे। एक शुभ अवसर पर उन्हें ब्राह्मणों को गायें दान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। लेकिन राजा द्वारा दान की गई एक गाय वापस शाही गौशाला में लौट आई। राजा ने लापरवाहीवश वही गाय दूसरे ब्राह्मण को दान कर दी। इससे दोनों ब्राह्मणों के बीच विवाद हो गया। दोनों ब्राह्मण न्याय के लिए राजा के महल में पहुंचे। राजा उनके विवाद को सुलझाने में असफल रहे। राजा ने उनसे कहा कि वे गाय को वैसे ही छोड़ दें और बदले में एक-एक सौ गायें स्वीकार करें। दोनों ब्राह्मण असंतुष्ट होकर गाय को छोड़कर चले गये।
मृत्यु के बाद, राजा की आत्मा को उनके अच्छे कर्मों के फल या उनके अज्ञात बुरे कर्मों के परिणामों के बीच पहला विकल्प चुनने के लिए कहा गया। उन्होंने पहले अपने बुरे कर्मों का परिणाम भुगतना चुना। भगवान यम (नर्क के देवता) ने उन्हें नीचे गिरने के लिए कहा और पृथ्वी पर गिरते ही वह गिरगिट में बदल गये। तब से वह हजारों वर्षों तक गिरगिट के रूप में सूखे कुएं में फंसे रहे। श्रीकृष्ण के कृपापूर्ण स्पर्श से उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। नृग एक दिव्य रथ पर सवार होकर दिव्य धाम के लिए प्रस्थान किये।
श्रीकृष्ण ने अपने पुत्रों को यह विषय समझाया – अनजाने में राजा ने अपनी प्रजा को प्रसन्न रखने में असमर्थ हुए। जबकि एक अच्छे राजा होने के नाते उनका कर्त्तव्य है वे अपने प्रजा को सुख में रखे, उनके पालनहार बने और समग्र परिस्थिति में उत्तरदायी बने रहें। यहाँ तक कि राजा भी परिणाम से नहीं बच सकता।
👉🏽 नैतिक : राज्य का मुखिया नागरिकों की भलाई के लिए जिम्मेदार होता है।
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।

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