Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 14 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 14 अक्टूबर 2023
14 अक्टूबर 2023 दिन शनिवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि अमावस्या तिथि है। आज स्नान-दान-श्राद्ध आदि की अमावस्या है। जिनके पिता-पितामह-प्रपितामह एवं माता-मातामही-प्रमातामही तथा नाना-नानी आदि कब गुजरे हैं, अगर याद नहीं है, तो उन सभी का श्राद्ध आज ही किया जाएगा। आज भगवान श्रीविष्णु की प्रशन्नता हेतु ब्राह्मणों को सादर भोजन करवाना चाहिए। आज शनिवार अर्थात पापवार की अमावस्या होने से दुर्भिक्ष का योग निर्मित हो रहा है। आज सभी पितरों का तर्पण एवं ब्राह्मण भोज आदि के साथ सभी पितरों का विदाई किया जाएगा। आप सभी सनातनियों को “पितृविसर्जन अमावस्या एवं सर्वपितृ श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : आश्विन माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि है।अमावस्या तिथि 11:24 PM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी – अमावस्या के स्वामी पितर होते हैं। अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र हस्त 04:24 PM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। नक्षत्र स्वामी चंद्रमा तो राशि कन्या इसका स्वामी बुध है।
🔊 योग : इन्द्र योग 10:24 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
⚡ प्रथम करण : चतुष्पाद – 10:40 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : नाग – 11:24 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:14:00
🌅 सूर्यास्तः- सायः 05:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:41 ए एम से 05:31 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:06 ए एम से 06:21 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:30 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:02 पी एम से 02:48 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:53 पी एम से 06:18 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:53 पी एम से 07:08 पी एम
💧 अमृत काल : 09:51 ए एम से 11:35 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:42 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 15
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती व काला वस्त्र चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देवपितृकार्ये अमावस/सर्वपितृमोक्ष-शनैश्चरी अमावस/अमावस्या श्राद्ध, कंकणाकृती सूर्य ग्रहण (यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इस कारण ग्रहण के नियमों का पालन आवश्यक नहीं), विश्व मानक दिवस अथवा अंतर्राष्ट्रीय मानक दिवस, निर्देशक और लेखक परमीत सेठी जन्म दिवस, अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस, मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जन्म दिवस, लाला हरदयाल सिंह माथुर जयंती, शिक्षक दिवस – पोलैंड, अमावस्या समाप्ति रात्रि 11.24
✍🏼 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार,सूर्यास्त के बाद आप जब भी झाडू लगाएं तो उस कूड़े या मिट्टी को घर के बाहर न फेंके। उसे कहीं एक जगह पर कूड़ेदान में ही रख दें और सुबह होने पर बाहर फेंके। माना जाता है कि शाम के समय मिट्टी घर के बाहर फेंकने से लक्ष्मी घर से बाहर चली जाती है और अलक्ष्मी घर में प्रवेश कर जाती है घर में अलक्ष्मी का प्रवेश का मतलब है कि आपके घर में अशांति और पैसों की तंगी होना। तो इसलिए रात में झाड़ू लगाते समय इन बातों का जरूर ध्यान रखें।
इस दिन झाड़ू खरीदना माना जाता है शुभ वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पुरानी झाड़ू को बदलकर नई झाड़ू इस्तेमाल करने के लिए शनिवार के दिन का चुनाव करना चाहिए। शनिवार को नई झाड़ू का उपयोग करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा झाड़ू को सदैव कृष्ण पक्ष में खरीदना उचित रहता है, जबकि शुक्ल पक्ष में खरीदी गई झाड़ू दुर्भाग्य का सूचक होती है। इसलिए इस समय में झाड़ू कभी नहीं खरीदनी चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गुड़ की चाय पीने से क्या क्या लाभ होता है? गुड़ की चाय पीने से फायदा ही है परंतु अगर मेरे हिसाब से पीयेगे तो फायदा ही फायदा है।
और यदि चाय पत्ती डालकर गुड डालकर पी रहे हैं अपने हिसाब से पी रहे हैं तो नुकसान ही नुकसान है।
मेरे हिसाब से क्या है आप एक दो आदमी के लिए 5 ग्राम अदरक लीजिए 5 ग्राम गुड़ लीजिए एक से दो इलायची लीजिए दो-तीन ग्राम दालचीनी लीजिए पांच तुलसी का पत्ता लीजिए पांच पुदीने का पत्ता लीजिए और खौला दीजिए चाय बनकर तैयार है।
यह फायदा ही फायदा करता है और अगर दूध डालना चाहते हैं तो नारियल का दूध बनाकर इसमें चाय उतारने के बाद डालकर पीजिए यह बॉडी के लिए 1000 पर्सेंट फायदा ही फायदा करेगा इसका इतना फायदा है कि एक ग्रंथ लिख जाएगा।
🥂 आरोग्य संजीवनी 🥃
घर में करें-दस्त-जुकाम का इलाज…अजवायन सत्व, पिपरमेंट और कर्पूर तीनो सम मात्रा में लेकर यह पानी जैसा तरल हो जाएगा। इसे बताशे में एक से दो बूंद तक डालकर खिलाने से दस्त आदि में तुरंत राहत मिलती है।
सभी कम्पनियों के अमृतधारा जैसे प्रचलित ब्रांड का यही फार्मूला है। अमृतधारा सन्धिशूल, बदन दर्द, सिरदर्द आदि में भी लाभकारी है।
पेट में गैस बनना या पेट दर्द में अजवायन का लेप पेट पर करने की पुरानी रीति रही है। इस नीति को अपनाने वाली जानकार महिलाएं अजवाइन सुबह खाली पेट फांक कर सादा पानी पीती थी और 100 साल तक बिना बीमारी के जीती थी।
अब वे इस धरती पर नहीं हैं।वे महान माताएं पितृमातृकाओं-मातृमात्रकाओं के रूप में ब्रह्माण्ड के किसी क्षेत्र में विचरण कर रही हैं।
अजवायन, सौंफ, जीरा, लौंग, कालीमिर्च, हल्दी, सेन्धानमक, इलायची, मुलेठी, सौंठ सभी समभाग लेकर दरदरा कर लेवें। इसे 8 गुने पानी में इतना उबाले कि छनककर दोगुना रह जाये।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
(कल का शेष)
तीसरी बात है तर्क़ करने की शक्ति। ऐसा क्यों…… फिर तो वैसा भी होना चाहिए…… लेकिन इसमें तो…. पर उस हिसाब से…..।
आपने कभी कोई भूल-भुलैया देखी होगी ना। आप एक छोर से शुरू करते हैं। आगे बढ़ते हैं, एक रास्ता बंद मिलता है। आप वापस आते हैं। दूसरे रास्ते पर बढ़ते हैं। और इस तरह से एक सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ते हुए भूल-भुलैया पार कर जाते हैं। यही बात सुडोकू पहेली, जिगसॉ पहेली, पुलिस के लिए कोई हत्या पहेली या जीवन की पहेली पर भी लागू होती है।
हमारे मस्तिष्क में अपार क्षमता छुपी हुई है। सोचने की, सवाल करने की, तर्क करने की और उससे निष्कर्ष और प्रमाण निकालने की। कुछ बुनियादी ज्ञान अगर हमें हो, तो हम अपने दिमाग़ में व्यतुपत्ति (derivation) के माध्यम से आगे बढ़ते हुए उच्च स्तर के ज्ञान पर पहुँच सकते हैं।
जमा-घटा-गुणा-भाग का ज्ञान ऐकिक विधि (Unitary method) का आधार है। ऐकिक विधि प्रतिशतता का आधार है। कुछ बुनियादी सूत्रों के आधार पर ही हम पाइथागोरस थ्योरम (Pythagoras theorem) का प्रमाण दे देते हैं। इस तरह से देखें तो सारा विज्ञान एक व्युत्पत्ति (derivation) है।
परंतु जिज्ञासा के साथ ही तर्क़-शक्ति को भी बचपन में ही स्वाहा कर दिया जाता है। काली बिल्ली ने रास्ता काट दिया, रुक जाओ। बाहर जाने से पहले मीठा खाओ। सूरज की तरफ मुँह कर पानी डालो। धर्म-पुस्तक को पढ़ो मत, उस पर पंखा झलते रहो। दाएँ हाथ से ये करो, बाएँ हाथ से वो करो। हर बात में नियम, और कारण किसी का नहीं पता। ऐसा इसलिए करना है क्योंकि ऐसा होता आया है। इसका कारण तुम अगली कक्षाओं में जानोगे, अभी बस रट लो।
बुद्ध राजकुमार थे। बचपन से उनका उत्तम अध्ययन हुआ था। उनमें तर्क़ करने की शक्ति तब तक ख़त्म नहीं हुई थी।
दुनिया के स्वरुप का बुनियादी ज्ञान सिद्धार्थ को प्राप्त हुआ। वहीं से उनके मन में सवाल जन्मे। इस तरह जिज्ञासा और भावुकता की वजह से सिद्धार्थ को ज्ञान की प्यास हुई। और वे एक वैज्ञानिक की तरह मौजूदा ज्ञान का आकलन और विश्लेषण करने लगे अपनी तर्क़-शक्ति से।
आप बौद्ध-शास्त्र देखेंगे तो उसमें यही पाएँगे, कि “ऐसा करो, वैसा करो” जैसे आदेशों और उपदेशों की बजाए उनमें कारणवाद स्पष्ट दिखाई देता है। तर्क़ का उपयोग किया गया है। उदाहरण दिए गए हैं। समरूपता (analogy) खींची गई हैं।
इस ज्ञान की खोज और तर्क़पूर्ण विश्लेषण के लिए जरूरी था चिंतन। और वह भी एकाग्र चिंतन। बैठकर उन्होंने चिंतन किया। बाकी सब जगह से दूर पेड़ के नीचे बैठकर वह चिंतन एकाग्र चिंतन हुआ। आपको जब परीक्षा की तैयारी करनी होती है, आप भी कहीं शांत जगह पर पढ़ते हैं ना। ताकि पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाएँ। अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर लेते हैं। फ़ोन को अपने से दूर रख देते हैं। ताकि अपने दिमाग को इधर-उधर भटकने से रोक पाएँ। बुद्ध राजकुमार थे। राजमहल में रहते हुए कौन उन्हें यूँ एकाग्र चिंतन में लीन रहने देता? इसलिए वे पेड़ के नीचे बैठ गए। कहा जाता है कि न्यूटन को भी तो ज्ञान पेड़ के नीचे ही प्राप्त हुआ। क्योंकि वहाँ अकेलेपन में वे एकाग्र चिंतन में खोए हुए थे।
(इति समाप्ति)
𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•𖡼🙏🏻𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•
⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।


