ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 09 नवम्बर 2023


आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 09 नवम्बर 2023

09 नवम्बर 2023 दिन गुरुवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। अर्थात आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष कि रम्भा नाम का एकादशी व्रत सभी के लिए है। आप सभी एकादशी व्रतियों को रम्भा एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें। शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक व्यक्ति को अवश्य करना चाहिये। आप सभी सनातनियों को रम्भा एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें एवं मंगलकामनाएँ।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – कार्तिक मास कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 10:42 AM तक उपरांत द्वादशी
✏️ तिथी स्वामी – एकादशी तिथि के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 09:57 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी : उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र बारहवाँ हैं वहीं इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।
🔊 योग – वैधृति योग 04:48 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : बालव – 10:41 ए एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 11:42 पी एम तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:32:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:28:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:37 ए एम से 05:27 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:18 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:37 ए एम से 12:23 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:42 पी एम से 06:07 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:42 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 01:58 पी एम से 03:44 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:35 पी एम से 12:25 ए एम, नवम्बर 10
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रमा एकादशी व्रत (सर्वे)/गौवत्स द्वादशी, महान संत नामदेव जयन्ती, हर्षवर्धन कपूर जन्मोत्सव, स्वाधीनता सेनानी पूरन चन्द जोशी पुण्य तिथि, वायु सेना प्रमुख सुब्रतो मुखर्जी स्मृति दिवस, राष्ट्रीय क़ानूनी सेवा दिवस, विश्व उर्दू दिवस, कंबोडिया स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस, उत्तरांचल राज्य गठन दिवस, श्रीकाशीविश्वनाथ- प्रतिष्ठा दिवस, विश्व सेवा दिवस, विज्ञान और शांति का अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह, 9-15 नवंबर
✍🏼 विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।
🏘️ _Vastu Tips
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वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे घर में सुनहरी मछली रखने के बारे में। कहते हैं मछलियों का होना घर में धन और सुख-समृद्धि लेकर आता है। मछलियों की उछल-कूद से मन को शांति मिलती है और अपने साथ सारी नकारात्मकता लेकर जाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में सुनहरी मछली रखनी चाहिए। घर के सौभाग्य को बढ़ाने में सुनहरी मछली बहुत ही सहायक होती है। सुनहरी मछली, यानि गोल्डफिश को सबसे अधिक पवित्र और संपन्नता देने वाली माना जाता है। सोने के जैसी प्रतीत होने वाली यह मछली आपके जीवन में भी सोने-सी चमक बिखेर देगी।
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, किसी छोटे-से एक्वेरियम में अपने घर के ड्राइंगरूम की पूर्व या उत्तर दिशा में सुनहरी मछली को रख सकते हैं। इसके अलावा एरोवाना मछली को भी बहुत अच्छा व शुभ माना जाता है।मछली का जोड़ा घर में रखने से जीवन में धन का आगमन होता रहता है। इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि आती है।
➡️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आंखों की रोशनी का सबसे बढ़िया इलाज है पूरे ब्रह्मांड में सुबह उठते हुए सूरज को 45 दिन देख लीजिए 45 दिन में ऐसा आंखों की रोशनी हो जाएगी कि आप दिन में भी तारे देख पाएंगे।
और अगर हरी पत्तियों का जूस पीयेगे तो आपकी आंखों की रोशनी तेज हो जाएगी कोई भी हरी पत्तियां पालक धनिया मूली के पत्ते किसी भी चीज के पत्ते हरी पत्तियां ही आंखों की रोशनी बढ़ा सकती हैं वरना दुनिया में कुछ भी नहीं है।और कच्ची सब्जियां खाईए वेजिटेबल खाईए अपने खाने में 50 परसेंट कुक्ड और 50% अनकूक्ड खाइए।
कद्दू के फूल का रस अपनी आंखों में डालिए आंखों की रोशनी के लिए बहुत फायदेमंद है।
बाहर के सारे सामान बंद कर दीजिए एनिमल प्रोडक्ट बंद फैक्ट्री के समान।
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
भड़वा नामक पोदा कहा पाया जाता है? सत्यानाशी का पौधा ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने का काम करता है। इसके लिए आप इसके पत्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। नपुंसकता कई कारणों से हो सकती है जिसमें से शुक्राणुओं की कमी को सबसे मेन कारण बताया गया है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक सत्यानाशी में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का गुण पाया जाता है
भड़भाड़, सत्यानाशी या घमोई (वानस्पतिक नाम: एक अमेरिकी वनस्पति है, लेकिन भारत में यह सब स्थानों पर पैदा होती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
पुराणों में 14 लोकों का वर्णन है। इसमें से जो सात लोक पृथ्वी से ऊपर की ओर हैं वे हैं – भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और ब्रह्मलोक। उसी प्रकार पृथ्वी के नीचे जो सात लोक हैं वे हैं – अतल, वितल, सतल, रसातल, तलातल , महातल और पाताल। ध्यान कि ये 14 लोक पृथ्वी से अलग माने जाते हैं। इसी में से एक लोक रसातल में हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को छिपाया था।
कुछ स्थानों पर ऐसा भी वर्णन है कि हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को सातवें पाताल, जिसका नाम पाताल ही है वहाँ छिपा दिया था। किन्तु अधिकतर स्थानों पर रसातल का नाम ही वर्णित है। ऐसा माना जाता है कि रसातल में “पणि” नामक दैत्यों का वास है जिन्हे निवातकवच, कालिकेय एवं हिरण्यपुरवासी के नाम से भी जाना जाता है। ये सभी देवताओं के घोर शत्रु माने जाते हैं। हिरण्याक्ष ने इसी कारण पृथ्वी को रसातल में छिपाया था ताकि देवता यहाँ आकर उनकी रक्षा ना कर सकें।
अब प्रश्न ये आता है कि ये समुद्र वाली बात कहाँ से आयी? ये भी हमारी समझ का ही फेर है। कहा जाता है कि ये सभी 14 लोक शून्य तक फैले “खौगोलिक सागर” का भाग हैं। इसी कारण कुछ स्थानों पर ये लिख दिया गया कि हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को “खौगोलिक समुद्र” में छिपा दिया। ध्यान दें, खौगोलिक सागर, ना कि पानी वाला सागर। इस खौगोलिक सागर को ही कुछ विद्वान “भव सागर” भी कहते हैं। समय के साथ-साथ हमने गलती से इसे केवल “सागर” मान लिया और ये समस्या उत्पन्न हुई।
इसमें समस्या इस घटना के बाद की घटना के कारण भी हुई। लिखा है कि पृथ्वी को भव सागर में छिपाने के बाद हिरण्याक्ष जल के देवता वरुण को युद्ध की चुनौती देता है जो उसे हंस कर टाल देते हैं। तभी हिरण्याक्ष देखता है कि एक वाराह पृथ्वी को अपने दाढ़ में उठा कर भव सागर या खौगोलीय सागर से निकाल कर उनके अपने स्थान पर ले जा रहे हैं। तब हिरण्याक्ष उनपर आक्रमण कर देता है।
जब भगवान वाराह पृथ्वी को उसके अपने स्थान पर ले जा रहे थे उस समय हिरण्याक्ष वरुण लोक में ही था। अब चूँकि वरुण जल के देवता हैं इसी कारण लोगों को लगा कि भगवान वाराह पृथ्वी को सागर से निकाल कर ला रहे हैं।
तो सदैव ध्यान रखें कि हिरण्याक्ष द्वारा पृथ्वी को सागर में नहीं अपितु रसातल या खौगोलीय/भव सागर में रखा गया था। समय के साथ हमें ये ग़लतफ़हमी हो गयी कि वो सागर था। ये वैसा ही है जैसे हमें आज कल अपने अधिकतर धर्म ग्रंथों में ग़लतफ़हमी हो जाती है। आशा है कि आपकी जिज्ञासा का समाधान हो गया होगा। यदि पसंद आये तो औरों को भी ये सत्य बताएं। जय भगवान वाराह देव। 🙏🚩
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।

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