Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 12 नवम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🪔 आज का पंचांग 🪔
रविवार 12 नवम्बर 2023
आप सभी देशवासियों को महालक्ष्मी पूजन व दीप दिपावली के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌑 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – कार्तिक शुक्ल कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 02:45 PM तक उपरांत अमावस्या
✏️ तिथी स्वामी – अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव होते हैं, इसीलिए इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और दान-पुण्य का बहुत महत्व होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 02:51 AM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं। स्वाति नक्षत्र का संबंध विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती से भी है।
🔊 योग – आयुष्मान योग 04:24 PM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : शकुनि – 02:44 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : चतुष्पाद – 02:55 ए एम, नवम्बर 13 तक
🔥 गुलिक काल : रविवार का शुभ (गलिक काल) 03:37 पी एम से 05:16 पी एम
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:34:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:26:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:38 ए एम से 05:29 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:03 ए एम से 06:19 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:37 ए एम से 12:23 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:41 पी एम से 06:06 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:41 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 05:40 पी एम से 07:20 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:35 पी एम से 12:26 ए एम, नवम्बर 13
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में स्वर्ण चढ़ाकर दीपमालिका प्रज्वलित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्री महालक्ष्मी पूजा/दीपावली, दीप दिपावली, महाबीर निर्वाण (जैन), अभ्यंग स्नान, काली पुजा (बंगाल), लक्ष्मी पूजा शाम 05.49 से रात्रि 08.33 तक, महान् स्वतंत्रता सेनानी, मदनमोहन मालवीय स्मृति दिवस, अभिनेता अमजद ख़ान जन्म दिवस, विश्व निमोनिया दिवस, लोक सेवा प्रसारण दिवस, सलीम अली का जन्म दिवस, राष्ट्रीय पक्षी दिवस
✍🏼 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे दीपावली के दीयों की दिशा के बारे में। आज दीपावली के वैज्ञानिक प्रभाव पाने के लिए स्थानीय मिट्टी से बने दियों में सरसों के तेल के दीपक ही जलाएं यानि कि स्थानीय जलवायु के अनुसार अपनी ही जगह की मिट्टी में सिर्फ सरसों के तेल के दीपक जलाने चाहिए। ऐसा करने से लक्ष्मी का आगमन होता है, घर की धन-संपदा में बढ़ोतरी होती है। तेल के इन दीयों को घर के दक्षिण-पूर्व कोने से रखना शुरु करके दक्षिण-पश्चिम कोने की तरफ जाएं, यानि घर में सबसे पहले दक्षिणी दिशा में दीपक जलाएं जाने चाहिए, उसके बाद पश्चिम दिशा में जलायें जाने चाहिए। इस तरह दक्षिणी और दक्षिण-पूर्व कोने में दीपक जलाये जाने के बाद घर की पूर्व दिशा में दीपक जलाने चाहिए और सबसे आखिर में घर की उत्तर दिशा में दीपक जलाने चाहिए।
आपको बता दें कि सबसे ज्यादा दीपक दक्षिण दिशा में रखने चाहिए। उससे कम दीपक पश्चिम दिशा में रखने चाहिए, उससे भी कम दीपक पूर्व दिशा में रखने चाहिए और सबसे कम दीपक उत्तर दिशा में रखने चाहिए। इस क्रम में दीपक रखे जाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
वास्तु के मुताबिक, सबसे ज्यादा दीपक दक्षिण दिशा में, उससे कम दीपक पश्चिम दिशा में और उससे भी कम दीपक पूर्व दिशा में रखने चाहिए। वहीं सबसे कम दीपक उत्तर दिशा में रखने चाहिए। इस क्रम में दीपक रखे जाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अगर आप नौकरी चाहते हैं और सभी उपाय आजमा कर थक गए हैं तो सबसे पहले किसी योग्य ज्योतिषी को अपना भविष्य दिखाएं और यह जानकारी प्राप्त करें कि किस ग्रह के कारण आपको रोजगार में बाधा आ रही है। उसी ग्रह के अनुसार उपाय आजमाएं, सफलता अवश्य मिलेगी। प्रस्तुत है ग्रह अनुसार रोजगार के टोटके- सूर्य के कारण आपके रोजगार में बाधा हो, तो गाय को रोटी देने का प्रयोग आरंभ करें। काली अथवा पीली गाय को ही रोटी खिलानी चाहिए।
🍸 आरोग्य संजीवनी 🍶
विटामिन के से भरपूर फल- फलों में सबसे ज्यादा विटामिन पाए जाते हैं। शरीर में विटामिन के की कमी को पूरा करने के लिए आप डेली एक अनार खाए। इसके अलावा सेब और चुकंदर से भी विटामिन के की कमी को पूरा किया जा सकता है।
डेयरी प्रोडक्ट्स में विटामिन के- दूध और उससे बनी चीजें स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। विटामिन के का बड़ा सोर्स डेयरी युक्त उत्पादों को भी माना जाता है। आप खाने में दूध, दही, पनीर, मक्खन जैसी चीजों का इस्तेमाल जरूर करें।
शलजम और चुकंदर में विटामिन के- सर्दियों में मिलने वाली शलजम और चुकंदर विटामिन का भंडार हैं। शलजम और चुकंदर में विटामिन के भी खूब पाया जाता है। इससे आरयन, विटामिन के और विटामिन ए की कमी को पूरा किया जा सकता है। हड्डियों और आंखों के लिए ये दोनों चीजें फायदेमंद हैं।
🪔 गुरु भक्ति योग 🪔
देश में दीपावली उत्सव की रौनक देखी जा रही है। 12 नवंबर को धूमधाम के साथ दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। हर कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली का त्यौहार मनाने की परंपरा है। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी उपासना करने से घर में सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति होती। इसके अलावा धन और समृद्धि से संबंधित कुछ अन्य देवी-देवता हैं जिनकी दीपावली के दिन पूजा किए जाने का विधान है। वैसे तो दिवाली के शुभ दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है लेकिन इनके पूजन के साथ ही अन्य देवी और देवताओं की पूजा किए जाने से भी घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है तो आइए यह भी जान लेते हैं।
🤴🏻 दिवाली के दिन कुबेर जी का पूजा का महत्व
कुबेर जी को भगवान शंकर ने धनपाल होने का वरदान दिया था। इन्हें यक्ष भी कहा गया है । देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर को पूजने से भी पैसों से जुड़ी तमाम समस्याएं दूर रहती हैं। वैसे तो दीवाली उत्सव के पहले दिन भी कुबेर की पूजा की जाती है लेकिन दीवाली के दिन भी इनकी पूजा की जाती है। लिहाजा दीवाली पूजा के दौरान लक्ष्मी, गणेश के साथ ही कुबेर का भी एक चित्र रखें। आज यानि दीवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश के साथ कुबेर की पूजा करने से आपको धन लाभ होगा।
👸🏻 दिवाली के दिन सरस्वती जी की भी पूजा जरूर करें
मां सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं तथा शास्त्र ज्ञान को देने वाली हैं। ज्ञान के बल पर ही धन और बल की वृद्धि होती रहती है। बिना ज्ञान धन और समृद्धि का होना व्यर्थ ही माना जाता है, इसीलिए दीवाली के दिन धन की देवी लक्ष्मी के साथ सरस्वती जी की भी पूजा का महत्व है। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादिनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। दीवाली पूजा में लक्ष्मी-गणेश के साथ सरस्वती की पूजा करने से धन और बल की वृद्धि होगी।
👉🏽 दीपावली के दिन मां काली की पूजा का विशेष महत्व
दिवाली के दिन काली जी की पूजा का भी विधान है। माना जाता है कि राक्षसों के अत्याचार को समाप्त करने के बाद भी जब माता महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ, तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के शरीर स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई जबकि इसी रात इनके रौद्र रूप काली की पूजा का विधान भी कुछ राज्यों में है। अत: दीपावली पूजा में लक्ष्मी-गणेश के साथ कालिका माता की पूजा करने भी आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी साथ ही अनजाने भय से छुटकारा भी मिलेगा।
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।


