चारों ओर से खुले वेशकीमती सागौन के जंगलो को बचाना वन विभाग के लिए चुनौती

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । इन दिनों पर्यावरण विदों के लिए जो चिंता सताए जा रही है वह है शुध्द प्राणवायु की, जो हमे वनो पेडो से मिलती है , पेड़ों और वनों के बेतहाशा काटे जाने से अब पर्यावरण को व्यापक खतरा उत्पन्न होता जा रहा है चारों तरफ से खुले जंगलों में खड़े वेशकीमती सागौन वृक्ष जो इन दिनों वन माफिया के क्रूर हाथों की पैनी आरी यन्त्रो के शिकार हो रहे हैं कहना ना होगा कि जिस दुतगति से और आधुनिक यंत्रों के माध्यम से पेड़ों की अन्धाधुन्ध कटाई और परिवहन हो रहा है उससे नहीं लगता कि आज जैसे घने जंगल हम कुछ दशकों बाद भी सुरक्षित अवस्था मे देख पायेगे यदि वन विनाश का सिलसिला इसी प्रकार जारी रहा तो सांस लेना तक मुश्किल हो जावेगा क्योकि तब प्राण वायु आसानी से मिलना नामुमकिन हो जावेगा तब कही देर न हो जाये और कहीं ऐसा ना हो की प्रकृति से सहज मिलने वाली वायु के स्थान पर हमें ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर ना चलना पड़े इसके लिये जगलो को बचाना व सरंक्षण बेहद जरूरी है , मध्य प्रदेश शासन द्वारा जिस प्रकार धड्ल्ले से फर्नीचर लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। उससे वन विनाश को खुला मौका मिल रहा है, इससे पर्यावरण को व्यापक खतरा उत्पन्न होता जा रहा है देश की चिन्ता व चिन्तन का विषय तो यह है की निरन्तर बढती आबादी को प्राणवायु के रुप मे जिस प्रकार की शुध्द हवा आज मिल रही है वह क्या कल मिलना संभव है, यह कहना गलत न होगा की कभी-कभी बाडी भी खेत को खाने लगती है जिससे खेत मे खडी फसल को काफी नुकसान होता है इस पर आज हमे सभी पहलुओ पर गम्भीरता पूर्वक विचार करना जरुरी है क्योकि चारो तरफ से खुले जंगल वन विभाग को एक चुनौती है।



