धार्मिक

24 मई 2024 : मई में कब मनाई जाएगी नारद जयंती? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
⚜❀┈┉☆…हरि ॐ…☆┉┈❀⚜
🔮 24 मई 2024 : मई में कब मनाई जाएगी नारद जयंती? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
HIGHLIGHTS
▪️ ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 23 मई को शाम 07.22 बजे होगी।
▪️ ज्येष्ठ माह में नारद जयंती मनाई जाती है।
▪️ नारद जी को ब्रह्मर्षि भी कहा जाता है।
▪️ नारद श्री हरि भक्तों में से एक हैं।
नारद जी का जिक्र आपको कई पौराणिक ग्रंथों में मिल जाएगा। नारद जी को दुनिया का प्रथम पत्रकार भी माना जाता है, क्योंकि ये तीनों लोकों में सूचना पहुंचाते थे। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि साल 2024 में नारद जयंती कब है, इस दिन पूजा का शुभ-मुहूर्त कब से कब तक रहेगा और नारद जी की पूजा करने से क्या लाभ आपको प्राप्त हो सकते हैं आईए आचार्य श्री गोपी राम से जानते हैं।
👉🏽 नारद जयंती 2024 तिथि और मुहूर्त
नारद जयंती साल 2024 में 24 मई को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नारद जी का अवतरण हुआ था। कृष्ण प्रतिपदा तिथि 23 मई शाम 7 बजकर 21 मिनट से शुरू हो जाएगी और 24 मई को 7 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता को ध्यान में रखते हुए नारद जयंती 24 तारीख को ही होगी। आप नारद जयंती के दिन सुबह 8 बजे से पहले पूजा आराधना कर सकते हैं। वहीं शाम की पूजा के लिए शाम 7 बजे के बाद आप कर सकते हैं।
📖 ऐसे करें नारद जयंती पर पूजा
नारद जयंती के दिन सुबह जल्द उठकर स्नान करें और देवी-देवता का ध्यान करें। स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें और मंदिर की सफाई करें। चौकी पर कपड़ा बिछाकर नारद जी की प्रतिमा विराजित करें। दीपक जलाकर आरती करें। प्रभु से जीवन में सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। भगवान नारद को फल और मिठाई का भोग लगाएं। गरीबों को विशेष चीजों का दान करना चाहिए।
⚛️ पूजा-विधि
नारद जयंती के दिन सुबह स्नान-ध्यान के बाद आपको पूजा स्थल की साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल पर नारद जी का ध्यान करते हुए दीपक जलाना चाहिए। नारद जी को भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है, इसलिए नारद जयंती के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु की पूजा आराधना भी आप कर सकते हैं। इस दिन भगवद् गीता का पाठ करने से नारद जी की कृपा आपको प्राप्त होती है। पूजा करते समय नारद जी को फल, मिठाई आदि का भोग आपको लगाना चाहिए। पूजा के अंत में नारद जी की आरती आपको करनी चाहिए और इसके बाद प्रसाद का वितरण घर के सभी लोगों में करना चाहिए।
💁🏻 नारद जयंती का महत्व
नारद जी को हिंदू धर्म में भगवान का मन बताया गया है। इन्होंने धर्म का प्रचार किया, लोगों को सत्कर्मों का पाठ पढ़ाया और लोक कल्याण के लिए जीवन जिया। इसलिए नारद जयंती का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। महाभारत में देवर्षि नारद को इतिहास और पुराणों का विशेषज्ञ बताया गया है। नारद जयंती के दिन इनकी पूजा-आराधना या ध्यान करने से व्यक्ति का अध्यात्मिक उत्थान होता है। इसके साथ ही तार्किक क्षमता, बुद्धि और विवेक में भी वृद्धि होती है। मान्यताओं के अनुसार नारद जी की पूजा से विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलते हैं, शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थी उन्नति पाते हैं। वहीं जो लोग समस्याओं से घिरे रहते हैं, जीवन का लक्ष्य जिन्हें प्राप्त नहीं हो पा रहा है वो भी नारद जयंती के दिन पूजा आराधना करके लाभ पा सकते हैं। नारद जी की पूजा करने से विचारों में स्पष्टता आती है और सही समय पर व्यक्ति सही फैसला ले सकता है।
🗣️ नारद जी की जन्म कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब इस सृष्टि का कोई आधार नहीं था, तब एक समय था जब गंधर्व और अप्सराएं भगवान ब्रह्मा की पूजा कर रहे थे। उसी समय एक गंधर्व जिसका नाम ‘उपबर्हण’ था, अप्सराओं के साथ शृंगार करके प्रकट हुआ। यह देखकर भगवान ब्रह्मा अत्यंत क्रोधित हो गए और क्रोधवश उन्होंने ‘उपबर्हण’ को शूद्र के रूप में जन्म लेने का श्राप दे दिया।
ब्रह्मा जी के श्राप के कारण ‘उपबर्हण’ का जन्म एक ‘शूद्र दासी’ के घर में हुआ। इसके बाद ‘उपबर्हण’ ने भगवान की घोर तपस्या की, जिसके परिणामस्वरूप एक दिन उन्हें भगवान के दर्शन हुए। इससे ईश्वर और सत्य को जानने की उनकी इच्छा और भी प्रबल हो गई। उसी समय आकाशवाणी हुई- हे बालक, इस जन्म में तुम मुझे नहीं देख पाओगे, लेकिन अगले जन्म में तुम मेरे सलाहकार बनोगे, इसके बाद ‘उपबर्हण’ ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की, जिसके परिणामस्वरूप ब्रह्मा जी के मानसिक पुत्र की मृत्यु हो गई। नारद जी रूप में अवतरित हुए।

Related Articles

Back to top button