आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 20 जुलाई 2024
20 जुलाई 2024 दिन शनिवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्दशी तिथि है। व्रत की पुर्णिमा आज ही है। आज सूर्यास्त के बाद त्रिमुहूर्त में पुर्णिमा के प्रदोष काल में भगवान शिव का शयनोत्सव मनाया जायेगा। आज की चतुर्दशी को श्रीअम्बिका चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। उड़ीसा में इसे शिवशयन चतुर्दशी भी कहा जाता है। आज कोकिला पुर्णिमा का व्रत भी है। कोकिला रूपी शिव का पूजन एव्न शिव शयन की विधि की जाएगी। आज भगवान श्रीसूर्यनारायण पुनर्वसु नक्षत्र से चलकर पुष्य नक्षत्र में दिन में 10:35 बजे चले जाएंगे। इसका स्त्री.-पू. चन्द्र-चन्द्र योग, मेष योग, सौम्य नाड़ी, जिसका स्वामी गुरु है। इससे मेघों की गर्जना से आकास भरा रहेगा परंतु सामन्य वर्षा का योग रहेगा। आप सभी सनातनियों को “भगवान शिव के शयनोत्सव की” बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌕 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 05:59 PM तक उपरांत पूर्णिमा
✏️ तिथि स्वामी : चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर लेता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 01:48 AM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है तो राशि स्वामी शुक्र।
⚜️ योग – वैधृति योग 12:07 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
⚡ प्रथम करण : गर – 06:54 ए एम तक वणिज – 05:59 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 04:56 ए एम, जुलाई 21 तक बव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:17:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:41:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:14 ए एम से 04:55 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:34 ए एम से 05:36 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:55 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:17 पी एम से 07:38 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:19 पी एम से 08:21 पी एम
💧 अमृत काल : 09:14 पी एम से 10:45 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 21 से 12:48 ए एम, जुलाई 21
❄️ रवि योग : 05:36 ए एम से 01:49 ए एम, जुलाई 21
🚕 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ भद्रा/व्रत पूर्णिमा/ श्री साईं बाबा उत्सव प्रारंभ शिर्डी/ शिवशयन चतुर्दशी (उड़िसा)/ मेला ज्वालामुखी (कश्मीर)/ पूर्णिमा प्रारंभ शाम 05.59, भोला प्रसाद सिन्हा स्मृति दिवस, भारतीय क्रिकेटर देबाशीष मोहंती जन्म दिवस, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित स्मृति दिवस, 356: ईसा पूर्व महान विजेता सिकंदर जन्म दिवस, राष्ट्रीय चंद्र दिवस, विज्ञान अन्वेषण दिवस, अभिनेता राजेंद्र कुमार जन्म दिवस, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह जन्म दिवस, राष्ट्रीय पेनसिल्वेनिया दिवस, अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🗼 Vastu tips 🗽
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार घर के मुखिया को भगवान शिव और चंद्र देव के मंत्रों का हर रोज जप करना चाहिए. इससे घर में सुख और शांति का वास रहता है. नियमित शिवजी के मंत्रों का जप करने से घर में बरकत आती है.
शास्त्र के अनुसार घर का दक्षिण-पश्चिम भाग अगर ऊंचा हो तो यह बहुत शुभ माना जाता है. ऐसे घर में हमेशा खुशहाली रहती है और घर के सदस्य बहुत तरक्की करते हैं. मकान के दक्षिण पश्चिम भाग में चट्टान हो तो यह भी बहुत लाभदायी होता है.
घर में पूर्व दिशा की तरफ सूर्य यंत्र की स्थापना करें. पूर्वमुखी घर में मुख्य द्वारा के बाहर ऊपर की ओर सूर्य का चित्र या प्रतिमा लगाएं. माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इससे नौकरी और कारोबार में खूब तरक्की होती है.
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कई बार जाने -अनजाने में गलती से हमारे हाथ पर चाय गिर जाती है। चाय हमारे शरीर के किसी भी अंग पर गिर सकती है।ऐसी स्थिति में अगर हम डॉक्टर के पास जाते हैं, तो तब तक हमारे शरीर पर उस चाय का विपरीत प्रभाव पड़ जाता है और हमारे शरीर पर शीघ्र ही छाले पड़ जाते हैं।
ऐसी स्थिति में हम तुरंत अपने घर पर कौन-कौन से उपाय करें जिससे कि हमारे शरीर पर उसका बुरा प्रभाव ना पड़े।
जैसे ही हमारे शरीर पर चाय गिरे हमें तुरंत उस स्थान पर ठंडा पानी डाल देना चाहिए या फिर बर्फ की सिकाई करनी चाहिए।
जले हुए स्थान पर हम सरसों के तेल में थोड़ा सा सूखा नील मिलाकर उस जले हुए स्थान पर पेस्ट बनाकर भी लगा सकते हैं।
आलू को कद्दूकस करके उस का रस निकालकर भी हम जले हुए स्थान पर लगा सकते है। इससे जले हुए स्थान पर निशान भी नहीं पड़ेगा और तुरंत ठीक भी हो जाएगा।
नारियल का तेल भी हम जले हुए स्थान पर लगा सकते हैं।
हम किसी टूथपेस्ट को भी लगा सकते हैं।
इस तरह से छोटे-छोटे उपाय करके हम जले हुए स्थान को ठीक कर सकते हैं।
🍂 आरोग्य संजीवनी ☘️
दालचीनी और शहद:एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर और एक चम्मच शहद मिलाएं।इसे सुबह और रात को सोने से पहले पिएं। यह शरीर की चर्बी को घटाने में मदद करता है।
खूब पानी पिएं:दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। यह पाचन को सुधारता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
फल और सब्जियां:ताजे फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। इनमें फाइबर और आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जो वजन कम करने में मदद करते हैं।
व्यायाम:नियमित व्यायाम करें। कार्डियो एक्सरसाइज (जैसे दौड़ना, तैरना, साइक्लिंग) और एब्डोमिनल एक्सरसाइज (जैसे क्रंचेस, प्लैंक्स) पेट की चर्बी कम करने में सहायक होते हैं।
प्रोटीन युक्त आहार:प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, दालें, मांस, और नट्स का सेवन बढ़ाएं। प्रोटीन मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
सावन में शिव जी को क्या-क्या चढ़ाना चाहिए फूल
विशेष रूप से सफेद और नीले फूल चढ़ाने से मन की शांति और भक्ति का विकास होता है। फूल अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। फूलों का अर्पण करने से व्यक्ति के मन और आत्मा में शांति और सुख का अनुभव होता है और यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। फूल अर्पित करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं और उसकी भक्ति में वृद्धि होती है।
मूंग चढ़ाने से आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है और जीवन में समृद्धि आती है। यह धन और समृद्धि लाने का प्रतीक है। मूंग का अर्पण करने से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक उन्नति होती है और उसकी सभी आर्थिक समस्याएँ दूर हो जाती हैं। यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है।
चावल चढ़ाने से घर में शांति और संपन्नता बनी रहती है। यह समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। चावल का अर्पण करने से व्यक्ति के घर में सुख-शांति बनी रहती है और उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार की परेशानियाँ दूर होती हैं।
शमी पत्र चढ़ाने से शत्रुओं का नाश होता है और कोर्ट केस जैसे मामलों में विजय प्राप्त होती है। यह सुरक्षा और विजय का प्रतीक है। शमी पत्र का अर्पण करने से व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार की बाधाएँ दूर हो जाती हैं और उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे व्यक्ति के जीवन में सफलता और विजय प्राप्त होती है।
शक्कर चढ़ाने से रिश्तों में मिठास आती है और पारिवारिक समस्याएँ सुलझती हैं। यह मधुरता और प्रेम का प्रतीक है। शक्कर का अर्पण करने से व्यक्ति के जीवन में रिश्तों में मिठास आती है और उसकी सभी पारिवारिक समस्याएँ दूर हो जाती हैं। यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे व्यक्ति के जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है।
गुड़ चढ़ाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह जीवन में मिठास और खुशहाली लाने का प्रतीक है। गुड़ का अर्पण करने से व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार की परेशानियाँ दूर हो जाती हैं और उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे व्यक्ति के जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है।
नारियल चढ़ाने से सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिलती है और सफलता प्राप्त होती है। यह सफलता और समृद्धि का प्रतीक है। नारियल का अर्पण करने से व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार की परेशानियाँ दूर हो जाती हैं और उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे व्यक्ति के जीवन में सफलता और समृद्धि आती है।
ध्यान और मंत्र जाप शिव जी का ध्यान और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से सभी कष्टों का निवारण होता है और आत्मिक शांति मिलती है। ध्यान और मंत्र जाप से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति आती है। यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार की परेशानियाँ दूर होती हैं।
सावन का महीना शिव जी की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना से भक्तों को शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
समाप्ति
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।



