आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 15 सितम्बर 2024
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 06:12 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र श्रवण 06:49 PM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – श्रवण नक्षत्र का स्वामी है चंद्रमा और भगवान् विष्णु इसके स्वामी देवता हैं।
⚜️ योग – अतिगण्ड योग 03:13 PM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
⚡ प्रथम करण : बव – 07:31 ए एम तक बालव – 06:12 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 04:44 ए एम, सितम्बर 16 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:53:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:07:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:33 ए एम से 05:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:56 ए एम से 06:06 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:41 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:19 पी एम से 03:09 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:26 पी एम से 06:49 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:26 पी एम से 07:36 पी एम
💧 अमृत काल : 09:10 ए एम से 10:39 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:53 पी एम से 12:40 ए एम, सितम्बर 16
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पीताम्बर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत/श्री वामन जयंती/ पंचक प्रारम्भ 29.43/ हरियाणा के भुतपर्व मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा जन्म दिवस, भारत के राष्ट्रीय प्रसारण सेवा दूरदर्शन प्रारम्भ दिवस, भारतरत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जन्म दिवस, अभियन्ता दिवस (इंजीनियर्स डे), अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस, राष्ट्रीय धन्यवाद दिवस, भारतीय उपन्यासकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय जन्म दिवस, फार्म पशु जागरूकता सप्ताह, संचायिका दिवस, राष्ट्रीय हिन्दी दिवस (सप्ताह)
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🗺️ Vastu tips_ 🗽
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को बहुत ही शुभ बताया गया है, क्योंकि इस दिशा में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। ऐसे में यदि आप धन की देवी मां लक्ष्मी की मूर्ति को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में रखते हैं, तो इससे आपके धन लाभ के योग बन सकते हैं। साथ ही व्यक्ति के आर्थिक परेशानियां भी दूर होती हैं।
दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा गाय को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है। ऐसे में यदि आप अपने घर में पीतल की कामधेनु गाय की मूर्ति रखते हैं तो इससे घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
इस दिशा में रखें कछुए की मूर्ति सनातन धर्म में कछुए का विशेष महत्व है, इसे भगवान विष्णु का ही रूप माना गया है। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि कछुए को घर की पूरब या उत्तर दिशा में रखना चाहिए। वहीं, आप ड्राइंग रूम में धातु से बना कछुआ भी रख सकते हैं। धन में वृद्धि की संभावना बढ़ती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बिना ऑपरेशन के समाधान:
भाप लेना : भाप लेना नाक के ब्लॉकेज को कम कर सकता है, जिससे सांस लेना थोड़ा आसान हो सकता है, लेकिन यह हड्डी की समस्या को ठीक नहीं करेगा।
नमक के पानी से धोना : यह उपाय नाक की सफाई में मदद कर सकता है और सांस लेने में थोड़ी राहत दे सकता है, लेकिन हड्डी के आकार को नहीं बदल सकता।
एंटीहिस्टामाइन और डीकंजेस्टेंट: ये दवाएं अस्थायी राहत प्रदान कर सकती हैं, खासकर अगर सूजन या एलर्जी की वजह से समस्या है।
नाक की स्ट्रिप्स: नाक की स्ट्रिप्स लगाने से बाहरी सपोर्ट मिल सकता है और नींद के दौरान सांस लेने में मदद मिल सकती है, लेकिन हड्डी की संरचना को नहीं बदलता।
योग और प्राणायाम: कुछ योगासन और प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम) सांस लेने की क्षमता को बेहतर बना सकते हैं।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
सुबह उठते ही इसे पियें, वो भी खाली पेट; सबसे पहले पीने योग्य गर्म पानी लें, उसमें 1-2 नीबू निचोड़ें और तुरंत पी लें। इसे 1/2 गिलास जितना पियें। इसके सैकड़ों फायदे हैं. सुबह का नींबू पानी पूरे शरीर को कैसे फायदा पहुंचाता है, इस पर कई शोध पत्र मौजूद हैं। यह पूरे शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है और साथ ही पाचन में भी सुधार करता है। विटामिन सी की प्रचुर मात्रा के कारण इम्यून सिस्टम को भी काफी फायदा होता है। सुबह का गर्म पानी तुरंत टॉयलेट पर दबाव बनाता है। इससे सुबह पेट भी जल्दी साफ हो जाता है।
इसके अलावा, आप शाम को नींबू पानी ले सकते हैं, लेकिन इसे खाली पेट लेना सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा। इसके अलावा आप दिन में किसी भी समय जब पेट खाली हो तो गुनगुने पानी में 1 चम्मच हल्दी मिलाकर भी पी सकते हैं। हल्दी के भी सैकड़ों फायदे हैं, जिनमें डिटॉक्सिफिकेशन और इम्यूनिटी बढ़ाना मुख्य है।
📚 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
महाभारत काल की बात है,एक बार कृष्ण और बलराम किसी जंगल से गुजर रहे थे चलते हुए काफी समय बीत गया और अब सूरज भी लगभग डूबने वाला था, अंधेरे में आगे बढ़ना संभव नही था,इसलिए कृष्ण बोले, बलराम हम ऐसा करते है कि अब सुबह होने तक यहीं ठहर जाते है,भोर होते ही हम अपने गंतव्य की और बढ़ चलेंगे
बलराम बोले, पर इस घने जंगल मे हमे खतरा हो सकता है,यहाँ सोना उचित नही होगा, हमे जाग कर ही रात बितानी होगी,
कृष्ण ने सुझाव दिया, अच्छा हम ऐसा करते है कि पहले मैं सोता हूँ और तब तक तुम पहरा देते रहो, और फ़िर जैसे ही तुम्हे नींद आए तुम मुझे जगा देना, तब मैं पहरा दूँगा और तुम सो जाना, बलराम तैयार हो गए, कुछ ही पलो मे कृष्ण गहरी नींद मे चले गए और तभी बलराम को एक भयानक आकृति उनकी ओर आती दिखी, वो कोई राक्षस था,
राक्षस बलराम को देखते ही जोर से चीखा और बलराम बुरी तरह डर गए, इस घटना का एक विचित्र असर हुआ, भय के कारण बलराम का आकार कुछ छोटा हो गया और राक्षस और विशाल हो गया,उसके बाद राक्षस एक बार और चीखा और पुन: बलराम डर कर कांप उठे, अब बलराम और भी सिकुड़ गए, और राक्षस पहले से भी बड़ा हो गया
राक्षस धीरे-धीरे बलराम की और बढ़ने लगा, बलराम पहले से ही भयभीत थे और उस विशालकाय राक्षस को अपनी और आता देख जोर से चीख पड़े कृष्ण… और चीखते ही वहीं मूर्छित हो कर गिर पड़े,
बलराम की आवाज सुन कर कृष्ण उठे, बलराम को वहाँ देख उन्होने सोचा कि बलराम पहरा देते-दते थक गए और सोने से पहले उन्हे आवाज दे दी…
अब कृष्ण पहरा देने लगे,कुछ देर बाद वही राक्षस उनके सामने आया और जोर से चीखा
कृष्ण जरा भी घबराए नही और बोले, बताओ तुम इस तरह चीख क्यों रहे हो? क्या चाहिए तुम्हे?
इस बार भी कुछ विचित्र घटा, कृष्ण के साहस के कारण उनका आकार कुछ बढ़ गया और राक्षस का आकर कुछ घट गया, राक्षस को पहली बार कोई ऐसा मिला था जो उससे डर नही रहा था..
घबराहट मे वह पुन: कृष्ण पर जोर से चीखा…इस बार भी कृष्ण नही डरे और उनका आकर और भी बड़ा हो गया जबकि राक्षस पहले से भी छोटा हो गया..
एक आखिरी प्रयास मे राक्षस पूरी ताकत से चीखा पर कृष्ण मुस्कुरा उठे और फिर से बोले, बताओ तो क्या चाहिए तुम्हे?
फ़िर क्या था राक्षस सिकुड़ कर बिलकुल छोटा हो गया,और कृष्ण ने उसे हथेली मे लेकर अपनी धोती मे बाँध लिया और फिर कमर मे खोंस कर रख लिया…
कुछ ही देर मे सुबह हो गयी, कृष्ण ने बलराम को उठाया और आगे बढ़ने के लिए कहा, वे धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे
तभी बलराम उत्तेजित होते हुए बोले, पता है कल रात मे क्या हुआ था, एक भयानक राक्षस हमे मारने आया था…
रुको-रुको बलराम को बीच मे टोकते हुए कृष्ण ने अपनी धोती मे बँधा राक्षस निकाला और बलराम को दिखाते हुए बोले, कहीं तुम इसकी बात तो नही कर रहे हो?
हाँ ये वही है,पर कल जब मैंने इसे देखा था तो ये बहुत बड़ा था,ये इतना छोटा कैसे हो गया? बलराम आश्चर्यचकित होते हुए बोले
कृष्ण बोले, जब हम जीवन मे किसी ऐसी चीज से बचने की कोशिश करते हो जिसका हमे सामना करना चाहिए तो वो हमसे बड़ी हो जाती है और हम पर नियंत्रण करने लगती है, लेकिन जब हम उस चीज का सामना करते हैं जिसका सामना हमे करना चाहिए तो हम उससे बड़े हो जाते हैं… और उसे नियंत्रित करने लगते हो.
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।



