मानव के लिए मोह बला है जबकि मोक्ष कला है : निर्यापक मुनि श्री अभय सागर जी

पंचकल्याणक महोत्सव हेतु महापात्र का चयन
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। महाकवि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने अपने महाकाव्य मुकमाटी में लिखा है कि मोह क्या बला है, और मोक्ष क्या कला है जीवन के इस रहस्य को जो जान लेता है उसका शीघ्र ही कल्याण हो जाता है आचार्य श्री दमोह को दमदार मोह वाली नगरी कहते थे किंतु दमोह के एक सुधी श्रावक ने अपने आप को निर्मोह बना लिया और अपने आप को आचार्य श्री के चरणों में समर्पित कर दिया वास्तव में दमोह वह है जिसने अपने मोह को दमित कर दिया मोह और मोक्ष के अंतर को जानाना मानव को आवश्यक है आत्मा जब तक विषम परिणाम में जीती है उसमें राग और द्वेष की मात्रा बढ़ती और घटती रहती है उन्होंने कहा कि बनिया वही है जो जीवन भर संकलन तो करता है किंतु समय आने पर समर्पित भी कर देता है जिस तरह बांध में अथाह जल राशि होती है किंतु दबाव के पूर्व जल निकासी के रास्ते भी होते हैं। इसके पूर्व छुलल्क श्री गरिष्ठ सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि अवसर मिलने पर पुण्य के संचय से वंचित नहीं रहना चाहिए क्योंकि कोरोना में सभी को पता लग गया की नोटों की गड्डियां काम नहीं आती विद्या गुरु के आशीर्वाद से हमें पंचकल्याणक महोत्सव का यह अवसर प्राप्त हुआ है। इसके पश्चात शिव नगर पंचकल्याणक महोत्सव मुख्य प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत भैया जी ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि यह पंच कल्याणक हमें शरीर से नहीं अपनी आत्मा से करना है यह भगवान का पंचकल्याणक यह पांचों का पंचकल्याणक नहीं है हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी पूर्ण श्रद्धा और लगन से निभानी चाहिए जिसको जो जिम्मेदारी मिले उसे निभाना है हमें आचार्य श्री की भावना के अनुरूप इस पंचकल्याणक को ऐतिहासिक बनाना है प्रतिष्ठाचार्य पंडित आशीष एवं अभिषेक ने कहा कि इस पंचकल्याण को नई ऊंचाइयां प्रदान करना है दमोह में पंचकल्याणक से धर्म की माहिती प्रभावन होगी बिना किसी भेदभाव की विशुद्ध भावना से पंचकल्याणक को ऐतिहासिक बनाने में कोई कसर नहीं बाकी रखेंगे। इस अवसर पर शिवनगर पंच कल्याणक गजरथ महोत्सव समिति ने मुनि संघ को प्रतिष्ठाचार्य को श्रीफल भेंट कर आचार्य निमंत्रण दिया।
दोपहर में हुआ महोत्सव की के महापात्रों का चयन- जैन धर्मशाला प्रवचन हाल परिसर में दोपहर में पूज्य मुनि संघ के सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के महापात्राओं का चयन महा बोलियों के साथ प्रारंभ किया गया। जिसमे सुनील डाबोलिया को सौधर्म इंद्र, रिंकू खजरी को कुबेर इंद्र, सुभाष बमोरिया को महा यज्ञ नायक, अंकित खजरी को राजा श्रेयांश, विनोद कुमार फैशन साड़ी को यज्ञ नायक, विनोद कुमार फैशन साड़ी को यज्ञ नायक, विवेक सिद्धार्थ नायक को राजा सोम, रोहित विनोद फैशन साड़ी को बाहुबली, विवेक नायक को बाहुबली, अंकित एशान को सनत इंद्र, मनीष मलैया को माहेंद्र, अमित प्रकाश को ईशान इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य क्षमा श्रेयांश लहरी परिवार को प्राप्त हुआ। बुधवार 27 नवंबर को मुनिश्री अभय सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन प्रातः बेला में नसिया जी मंदिर परिसर में होंगे



