भक्त प्रहलाद ने भगवान नारद के द्वारा गर्भ अवस्था में ही ज्ञान प्राप्त कर लिया था
माता पिता को अपने बच्चों को संस्कार वान बनाने के लिए गर्भावस्था में संस्कार दे देना चाहिए जिससे कि भक्त पहलाद जैसे बालकों का जन्म हो सके
कथा व्यास आचार्य पंडित रेवा शंकर शास्त्री महाराज
ईश्वर की भक्ति करने की कोई समय आयु नहीं होती
बच्चों को गर्भ में ही संस्कार प्राप्त हो जाते हैं
भागवत कथा के तृतीय दिवस पर बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
सिलवानी । सरस्वती नगर में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन मोहन नामदेव रवि शंकर नामदेव व उनके परिजनों के द्वारा कराया जा रहा है
श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिवस के अवसर पर कथा व्यास आचार्य पंडित रेवा शंकर शास्त्री ने भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप का प्रसंग श्रद्धालुओं को सुनाया व्यास आचार्य पंडित रेवा शंकर शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि ईश्वर की भक्ति करने की कोई समय आयु नहीं होती।
बच्चों को गर्भ में ही संस्कार प्राप्त हो जाते हैं इसलिए गर्भावस्था में माता बहनों को धार्मिक ग्रंथ रामायण श्रीमद् भागवत गीता भक्तमाल और भगवान का राम नाम सुमरान भागवत कथा आदि श्रवण करनी चाहिए भक्त प्रहलाद ने भगवान नारद के द्वारा गर्भ अवस्था में ही सब कुछ ज्ञान प्राप्त कर लिया था भक्त प्रहलाद ने भक्ति करके भगवान विष्णु की प्राप्ति की थी इसी तरह माता-पिता अपने बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए गर्भावस्था में संस्कार दे देना चाहिए जिससे कि भक्त पहलाद जैसे बालकों का जन्म हो और वह बालक भगवान को प्राप्त करने के साथ अपने कुल अपने परिवार को मोक्षगामी बना सकें
कथा व्यास आचार्य पंडित रेवा शंकर शास्त्री के द्वारा सती अनुसुइया सती चरित्र प्रहलाद जी का चरित्र बड़े भाव पूर्ण आध्यात्मिक तत्वों के द्वारा भक्तों को उपदेश दिया सती अनुसूया के पतिव्रत धर्म की व्याख्या करते हुए पंडित रेवा शंकर शास्त्री ने बताया कि संसार में आकर के माता बहनों को पतिव्रत धर्म धारण करने से भगवान की भक्ति प्राप्त हो जाती है यहां तक कि उनकी संतान भी भगवान की कृपा से भागवत स्वरूप हो जाती हैं यह पतिव्रत धर्म का प्रभाव है मनुष्य अहंकार में होकर भगवान की भक्ति नही करनी चाहिए विनम्रता से भगवान की प्राप्ति होती है अहंकार तो मनुष्य का पतन का कारण होता है जैसे कि दक्ष प्रजापति ने अहंकार के वशीभूत होकर के भगवान का अपमान किया अंत में पतन हो गया इसलिए सभी को अहंकार त्यागकर के भगवान को पहचानना चाहिए


