धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 26 जनवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🇮🇳 आज का पंचांग 🇮🇳
रविवार 26 जनवरी 2025
🇮🇳 26 जनवरी 2025 दिन रविवार माघ मास कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। और आज भारतीय गणतंत्र दिवस भी है । आज ही की तारिख को भारतवर्ष एक गणतंत्र दिवस के रूप में घोषित किया गया था। आज ही के दिन बाबा भीमराव अम्बेडकर एवं अन्य भारतीय बुद्धिवीरों के सहयोग से बनाया गया भारत का संविधान लागू किया गया था। आज ध्वजोत्तोलन राष्ट्रीगान एवं अन्य विविध उत्सव का आयोजन भी सरकार द्वारा किया जाता है। आप सभी भारतवासियों को “भारतीय गणतंत्र दिवस” की बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं अनन्त अनन्त बधाइयां।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🇮🇳 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथी : रविवार माघ माह के कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि 08:55 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र ज्येष्ठा 08:26 AM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी : ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं।
⚜️ योग : व्याघात योग 03:33 AM तक, उसके बाद हर्षण योग
प्रथम करण : कौलव – 08:48 ए एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 08:54 पी एम तक गर
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:39:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:21:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:26 ए एम से 06:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:52 ए एम से 07:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:12 पी एम से 12:55 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:21 पी एम से 03:04 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:53 पी एम से 06:20 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:55 पी एम से 07:15 पी एम
💧 अमृत काल : 02:28 ए एम, जनवरी 27 से 04:07 ए एम, जनवरी 27
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जनवरी 27 से 01:00 ए एम, जनवरी 27
सर्वार्थ सिद्धि योग : 08:26 ए एम से 07:12 ए एम, जनवरी 27
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पीताम्बर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
🇮🇳 पर्व एवं त्यौहार : सर्वार्थसिद्धि योग/ गणतंत्र दिवस, जम्मू और कश्मीर स्थापना दिवस, अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस, भारतीय पार्श्वगायक प्रदीप सोमासुंदरन जन्म दिवस, जैन धर्म की आचार्य आचार्य चंदना जन्म दिवस, मुग़ल सम्राट हमायुँ पुण्य तिथि, स्वराज दिवस, ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया दिवस, मुक्ति दिन – युगांडा., भारतीय कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण स्मृति दिवस, राष्ट्रवादी क्रान्तिकारी मानवेन्द्र नाथ राय पुण्य तिथि, साहित्यकारक करतार सिंह दुग्गल स्मृति दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी माधव श्रीहरि अणे स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🗽 Vastu tips 🗼
तस्वीरें फेंकती है नकारात्मक ऊर्जा
कहते हैं कि ताजमहल का चित्र, डूबती हुई नाव या जहाज, फव्वारे, जंगली जानवरों के चित्र और कांटेदार पौधों के चित्र घर में नहीं लगाना चाहिए। इससे मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है और लगातार इन चित्रों को देखते रहने से जीवन में अच्‍छी घटनाएं घटना बंद हो जाती हैं।
टूटी अलमारी से किस्मत रूठ जाती है घर या दुकान की कोई भी अलमारी टूटी हुई नहीं होना चाहिए। टूटी अलमारी पैसों के नुकसान का कारण बनती है। इसके अलावा काम न होने पर अलमारी को हमेशा बंद करके रखें। अलमारी को बेवजह खुला रखने पर हर तरह के कामों में रुकावट आती है और धन भी पानी की तरह बह जाता है।
मकड़ी के जाले में फंस जाता है सौभाग्य घर में बनने वाले मकड़ी के जाले तुरंत हटा दें, इनसे आपके अच्छे दिन बुरे दिनों में बदल सकते हैं। मकड़ी के जाले से घर-दुकान में कई तरह के वास्तु दोष पैदा होते हैं, इसलिए घर-दुकान में इसका होने अशुभ माना जाता है।
टूटा सोफा, कुर्सी और टेबल तरक्की के दुश्मन है आपके घर में टूटी हुई चेयर या टेबल पड़ी है तो उसे तुरंत घर से हटा दें। ये आपके पैसों और तरक्की को रोक देती है। बैठक का सोफा भी फटा या टूटा हुआ नहीं होना चाहिए। उस पर बिछाई गई चादर भी गंदी या फटी नहीं होना चाहिए।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गुलाब में तीन खास औषधीय गुण पाए जाते हैं. ये राहत देने, ठंडक देने और मॉइश्चराइज करने का काम करता है. गुलाब की पंखुडि़यां होंठों के कालेपन को दूर करके उन्हें गुलाबी बनाती हैं. गुलाब जल की कुछ बूंदों को शहद में मिलाकर होंठों पर लगाने से फायदा होता है.
जैतून का तेल जैतून का तेल भी आपके गहरे होंठों को हल्का बनाने में कारगर साबित हो सकता है. जैतून के तेल की कुछ बूंदों को उंगलियों पर लगाकर, प्रभावित जगह पर हल्की मसाज करें. ऐसा करने से होंठ मुलायम भी बनते हैं.
चीनी होंठों की डेड स्किन हट जाने से भी कालापन दूर होता है. चीनी को मिक्सर में पीस ले और इसमें कुछ मात्रा में मक्खन मिलाकर होंठों पर लगाएं. हफ्ते में एक बार ऐसा करने से होंठ कोमल मुलायम हो जाएंगे और उनका गहरापन भी कम होगा.
अनार होंठों की देखभाल के लिए अनार से बढ़कर कुछ भी नहीं. ये होंठों को पोषित करने के साथ ही मॉइश्चराइज करने का काम भी करता है. होंठों की नमी लौटाने के साथ ही अनार उन्हें नेचुरली गुलाबी भी करता है. अनार के कुछ दानों को पीस कर उसमें थोड़ा सा दूध और गुलाब जल मिला लें. इस पेस्ट को होंठों पर हल्के हाथ से मलने पर जल्दी फायदा होता है.
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
बवासीर एवं दस्त रोगों में, ईसबगोल का विशिष्ट योग :
ईसबगोल 50 ग्राम, छोटी इलायची 25 ग्राम और धनिया के बीज 25 ग्राम लेकर सबको मिलाकर चूर्ण बना लें तथा नित्य 5 ग्राम की मात्रा में नित्य प्रात: एवं शाम को पानी या दूध के साथ सेवन करने से बवासीर, रक्तस्राव, मूत्रकृच्छ, प्रमेह, कब्ज, वर में दस्त, पुराना दस्त रोग, नकसीर एवं पित्तविकार के कारण दस्त में लाभ होता है। दस्त रोगों में चूर्ण को जल के साथ ही लेना उचित रहता है।
पाचन तंत्र : यदि आपको पाचन संबंधित समस्या बनी रहती है, तो ईसबगोल आपको इस समस्या से निजात दिलाता है। प्रतिदिन भोजन के पहले गर्म दूध के साथ ईसबगोल का सेवन पाचन तंत्र को दुरूस्त करता है।
जोड़ों में दर्द : जोड़ों में दर्द होने पर ईसबगोल का सेवन राहत देता है। इसके अलावा दांत दर्द में भी यह उपयोगी है। वि‍नेगर के साथ इसे दांत पर लगाने से दर्द ठीक हो जाता है।
कफ : कफ जमा होने एवं तकलीफ होने पर ईसबगोल का काढ़ा बनाकर पिएं। इससे कफ निकलने में आसानी होती है।
वजन कम करे : वजन कम करने के लिए भी फाइबर युक्त ईसबगोल उपयोगी है। इसके अलावा यह हृदय को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।
सर दर्द : ईसबगोल का सेवन सि‍रदर्द के लिए भी उपयोगी है। नीलगिरी के पत्तों के साथ इसका लेप दर्द से राहत देता है। प्याज के रस के साथ इसके उपयोग से कान का दर्द भी ठीक होता है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति को स्वर्ग मिलेगा या नर्क, वहां यमराज उनके साथ क्या करते हैं, उनकी आत्मा कितने दिन किन-किन लोकों में रहेगी और कब दुबारा जन्म लेगी इत्यादि। ये सारे फैसले मनुष्य के कर्मों पर आधारित होते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब किसी बच्चे की मृत्यु होती है, तो उसके बारे में गरुड़ पुराण क्या कहता है? गरुड़ पुराण की मह्त्ता के कारण जब किसी के घर में मृत्यु हो जाती है तो…बहुत हद तक आपका कर्म यह तय करता है कि आप मृत्यु के बाद स्वर्ग जायेंगे या नर्कबच्चों को केवल स्वर्ग ही क्यों भेजा जाता है?बच्चों के ऐसा कहने पर भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि तुम सब अबोध बालक हो,गरुड़ पुराण एक ऐसा महापुराण है जो मृत्यु से जुड़े कई सवालों के रहस्य को बतलाता है। यह पुराण भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ की बातचीत की भी व्याख्या करता है, जो मृत्यु के बाद से जुड़ी जिज्ञासा को शांत करता है। गरुड़ पुराण की मह्त्ता के कारण जब किसी के घर में मृत्यु हो जाती है, तो वहां इसका पाठ कराया जाता है ताकि वहां मौजूद मृत आत्मा को इसके पाठ से मिले संदेश की मदद से संसार से अपना बंधन तोड़ने में मदद मिल सके।
बच्चों को केवल स्वर्ग ही क्यों भेजा जाता है?
गरुड़ पुराण इस बारे में कहता है कि वो बच्चे जिनकी उम्र 15 साल से कम होती है, उनकी मृत्यु के बाद उन्हें केवल स्वर्ग ही भेजा जाता है। गरुड़ पुराण कहता है कि इन बच्चों की कम उम्र होने के कारण इनमें अच्छे-बुरे की समझ नहीं होती है, इस कारण इनके कर्मों के आधार पर नहीं बल्कि इन कम उम्र को देखते हुए इन्हें स्वर्ग भेज दिया जाता है। अगर इन्होंने कोई गलती की भी होती है, तो उन्हें भगवान माफ कर देते हैं। इन बच्चों को केवल स्वर्ग ही क्यों भेजा जाता है, इस बारे में एक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार, कुछ बच्चे मृत्यु के पश्चात स्वर्ग द्वार पर पहुंचे। उनके माता-पिता भी मृत्यु को प्राप्त हो चुके थे। जब विष्णु जी ने स्वर्ग लोक के द्वार पर आकर उन मृत बच्चों की आत्मा को स्वर्ग लोक के अंदर आने की बात कही, तो उन सबने कहा कि वो सब केवल अपने माता-पिता के साथ ही स्वर्ग लोक में प्रवेश करेंगे। बच्चों के ऐसा कहने पर भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि तुम सब अबोध बालक हो। इसलिए तुमलोगों के कर्मों का मूल्यांकन किए बिना तुमलोगों को स्वर्ग में प्रवेश मिल रहा है लेकिन तुम्हारे माता-पिता बड़े और व्यस्क हैं। इसलिए उन्हें उनके कर्मों का मूल्यांकन कर उन्हें स्वर्ग अथवा नर्क दिया जाएगा। विष्णु जी की इस बात का बच्चों की आत्माओं ने जवाब देते हुए कहा कि उन्हें भी वहीं भेज दिया जाये जहां उनके माता-पिता को भेजा जायेगा, चाहे वो स्वर्ग हो या नर्क। बच्चों का माता-पिता के प्रति सच्चा स्नेह देखकर भगवान विष्णु ने सभी बच्चों के माता-पिता के बुरे कर्मों को माफ कर दिया और उन्हें भी बच्चों के साथ स्वर्गलोक भेज दिया।
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

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