Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 21 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 21 मार्च 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 04:24 AM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र ज्येष्ठा 01:45 AM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं. इस नक्षत्र के देवता इंद्र हैं।
⚜️ योग – सिद्धि योग 06:41 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 03:38 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 04:23 ए एम, मार्च 22 तक बालव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:00:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:00:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:49 ए एम से 05:36 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:13 ए एम से 06:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:04 पी एम से 12:53 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:18 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:32 पी एम से 06:55 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:33 पी एम से 07:44 पी एम
💧 अमृत काल : 04:08 पी एम से 05:53 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, मार्च 22 से 12:51 ए एम, मार्च 22
❄️ रवि योग : 06:24 ए एम से 01:46 ए एम, मार्च 22
🚕 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ रवि योग / सर्वार्थसिद्धि योग/ शीतला सप्तमी (बासोड़ा)/ विश्व वानिकी दिवस, विश्व कठपुतली दिवस, अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस, विश्व कविता दिवस, भारतीय धार्मिक नेता निर्मला श्रीवास्तव जन्म दिवस, नवरोज का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान जन्म दिवस, भारतीय अभिनेत्री रानी मुखर्जी जन्म दिवस, विश्व कविता दिवस यानी वर्ल्ड पोएट्री डे, अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस, विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस (World Down Syndrome Day)
✍🏼 तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗺️ Vastu tips_ 🗽
उत्तर दिशा से जुड़ी गलती वास्तु के अनुसार यह दिशा धन के देवता कुबेर है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि कुबेर देव की कृपा आप पर बनी रहे तो इस दिशा से जुड़ी गलती आपको नहीं करनी चाहिए। इस दिशा में गंदगी फैलाना, टूटी-फूटी चीजें रखना, जूते-चप्पल रखना, कांटेदार पौधे रखना अशुभ माना जाता है। अगर आप भी घर की उत्तर दिशा में ये चीजें रखते हैं तो स्वाभाविक तौर पर हमेशा धन से जुड़ी परेशानियां आपके जीवन में आएंगी। इसलिए इस दिशा को आपको हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जल का सेवन पानी पीना: पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और मेटाबोलिज्म को बढ़ावा मिलता है। पानी पिने से भूख भी नियंत्रित होती है, जिससे आप ज्यादा खाने से बच सकते हैं।
हर्बल चाय: ग्रीन टी या अदरक चाय जैसी हर्बल चाय में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो फैट बर्निंग को बढ़ा सकते हैं।
सोने की आदतें समय पर सोना और उठना: अच्छा नींद लेना वजन कम करने में सहायक हो सकता है। नींद की कमी से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन (ghrelin) का स्तर बढ़ता है, जिससे आप ज्यादा खाते हैं।
6-8 घंटे की नींद: नियमित नींद से शरीर का हार्मोनल संतुलन ठीक रहता है, और वजन घटाना आसान होता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
करेले का जूस मधुमेह के लिए रामबाण माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व ग्लूकोज को मैनेज करते हैं। रोज सुबह 20-30 मिली जूस पीने से फर्क दिख सकता है।
मेथी के दाने भिगोकर सुबह खाने से पाचन और शुगर दोनों पर असर पड़ता है। यह इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने में भी मददगार है।
आंवला ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है। इसका चूर्ण या जूस हल्दी के साथ मिलाकर लेने से अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।
गुडमार इसे “शुगर किलर” कहते हैं। यह चीनी के अवशोषण को कम करता है और पैनक्रियास को बेहतर काम करने में मदद करता है। पत्तियों का चूर्ण काफी लोग इस्तेमाल करते हैं।
दालचीनी थोड़ी सी दालचीनी चाय में डालकर पीने से इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है। यह आसान और असरदार तरीका है।
🌷 गुरु भक्ति योग_ 🌸
गर्मियों के दिन थे। शाम के समय एक बत्तख झील के पास ही पेड़ के नीचे अपने अंडे देने के लिए अच्छी जगह ढूंढी थी। उसने वहां पर पांच अंडे दिए। उसने देखा की उसके पांच अंडों में से एक अंडा सबसे बहुत अलग था। जिसे देखर वह परेशान रहने लगी। उसने अंडों से बच्चों के बाहर आने तक का इंतजार किया।
फिर एक सुबह उसके चार अंडों में से उसके चार नन्हें बच्चे बाहर आ गए। वो सभी बहुत सुंदर और प्यारे थे। लेकिन उसके पांचवें अंडे से अभी तक बच्चा बाहर नहीं आया था। बत्तख ने कहा कि यह पांचवें अंडे का बच्चा उसका सबसे सुंदर बच्चा होगा, तभी वह बाहर आने में इतना ज्यादा समय ले रहे है।
एक सुबह वह पांचवां अंडा भी फूट गया। उसमें से एक बदसूरत बत्तख का बच्चा निकला। बत्तख का यह बच्चे अपने बाकी के चारों भाई-बहनों से बहुत बड़ा और बदसूरत था।
यह देखर बत्तख मां बहुत उदास हो गई। उसे उम्मीद थी कि शायद कुछ दिनों बाद वह बदसूरत बत्तख भी अपने भाई-बहनों की तरह सुंदर हो जाएगा।
कई दिन बीत जाने के बाद भी वह बत्तख बदसूरत ही रहा। बदसूरत होने की वजह से उसके सारे भाई-बहन उसका मजाक भी उड़ाते थे और कोई भी उसके साथ नहीं खेलता था। वह बदसूरत बत्तख का बच्चा बहुत उदास रहने लगा।
एक दिन झील में अपनी परछाई देखते हुए वह बदसूरत बत्तख का बच्चा सोचने लगा कि अगर उसने अपने परिवार को छोड़ दिया, तो वो सारे बहुत खुश हो जाएं। वह किसी दूसरे जंगल में चला जाएगा। यही सोचकर वह किसी घने जंगल में चला गया। जल्द ही सर्दियों के दिन आ गए। हर तरफ बर्फ की बारिश हो रही थी। बदसूरत बत्तख के बच्चे को ठंड लग रही थी। उसके पास खाने-पीने के लिए भी कुछ नहीं था।
वहां से वह एक बत्तख के परिवार के पास गया, उन्होंने उसे भगा दिया। फिर वो एक मुर्गी के घर गया, मुर्गी ने भी उसे चोंच मारकर भगा दिया। उसी रास्ते में उसे एक कुत्ते ने देखा, लेकिन कुत्ता भी उसे छोड़कर चला गया।
बदसूरत बत्तख उदास मन से सोचने लगा कि वह इतना बदसूरत है कि कुत्ता भी उसे नहीं खाना चाहता है। उदास होकर वह बदसूरत बत्तख का बच्चा फिर से जंगल जाने लगा। रास्ते में उसे एक किसान दिखाई दिया। वह किसान उस बदसूरत बत्तख को अपने घर ले गया। वहां पर उसे एक बिल्ली परेशान करने लगी, तो वह वहां से भी भाग गया और फिर से एक जंगल में रहने लगा।
कुछ ही दिनों में बसंत का मौसम आ गया। अब वह बदसूरत बत्तख भी काफी बड़ा हो गया था। एक दिन वह एक नदी के किनारे टहल रहा था। वहां पर उसने एक सुंदर राजहंसी को देखा, जिससे उसे प्यार हो गया। लेकिन फिर उसे लगा कि वह एक बदसूरत बत्तख है इसलिए उसे वह राजहंसी कभी नहीं मिलेगी। शर्म से उसने अपना सिर झुका लिया।
तभी उसने नहीं के पानी में अपनी परछाई देखी और वह हैरान हो गया। उसने देखा अब वह बहुत बड़ा हो गया है और एक सुंदर राजहंस में बदल गया है। उसे यह एहसास हो गया कि वह एक हंस है, तभी ह अपने बाकी के बत्तख भाई-बहनों से काफी अलग था। जल्द ही उस बदसूरत बत्तख से राजहंस बने उस हंस ने हंसनि से शादी कर ली और दोनों खुशी-खुशी रहने लगे।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।



