Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 07 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 07 अप्रैल 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 08:00 PM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 06:24 AM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि ग्रह हैं। देव गुरु बृ्हस्पति को पुष्य नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता माना गया है।
⚜️ योग – धृति योग 06:18 PM तक, उसके बाद शूल योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 07:36 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 08:00 पी एम तक वणिज
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:48:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:33 ए एम से 05:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:56 ए एम से 06:04 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:49 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:41 पी एम से 07:04 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:42 पी एम से 07:50 पी एम
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:04 ए एम से 06:25 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 ए एम, अप्रैल 08 से 12:45 ए एम, अप्रैल 08
❄️ रवि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन – मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र – ॐ सौ सौभाग्य नमः।
🤷🏻♀️ आज का उपाय – शिवजी को दुग्धाभिषेक करें।
🌳 *वनस्पति तंत्र उपाय – पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ विश्व स्वास्थ्य संगठन स्थापना दिवस, राष्ट्रीय बीयर दिवस, प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रवि शंकर जन्म दिवस, द्मश्री से सम्मानित प्रख्यात उर्दू कवि कश्मीरी लाल ज़ाकिर जयन्ती, अभिनेता जितेन्द्र जन्म दिवस, भारतीय खिलाड़ी संजय दत्त जन्म दिवस, प्रसिद्ध कवि जानकी वल्लभ शास्त्री स्मृति दिवस, प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफ़र वी. के. मूर्ति स्मृति दिवस, महिला चिकित्सा दिवस, रवांडा में तुत्सी के खिलाफ 1994 के नरसंहार पर अंतर्राष्ट्रीय दिवस, समाजवादी श्रीमती. जयंती पटनायक जन्म दिवस, विशेष सुरक्षा समूह स्थापना दिवस (एसपीजी) ✍🏼 तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है। 🗽 *Vastu tips* ⛲
वास्तु के मुताबिक, लाल रंग से संबंधित चीजों को घर की दक्षिण दिशा में रखना चाहिए । ऐसा करने से वास्तु के शुभ परिणाम मिलते हैं। क्योंकि लाल रंग का संबंध अग्नि तत्व से है और दक्षिण दिशा का संबंध भी अग्नि तत्व से ही है। इसलिए दक्षिण दिशा में लाल रंग से संबंधित चीजें रखना अच्छा होता है। दक्षिण दिशा में लाल रंग की चीज़ें रखने से घर की मंझली कन्या को हर तरह से फायदा मिलता है। आंखों की रोशनी सही बनी रहती है और उनसे संबंधित किसी तरह की परेशानी नहीं होती।
🔐 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ज्यादा सोने का मतलब हमेशा डिप्रेशन होता है?
स्लीप साइकल का बिगड़नाः , अगर बहुत ज्यादा या बहुत कम सोते हैं, तो बॉडी का नेचुरल स्लीप वेक साइकल गड़बड़ाता है। इससे सुस्ती और थकावट रह सकती है।
स्लीप डिसऑर्डर : अगर आपको हमेशा ज्यादा नींद आती है और फिर भी आप थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह हाइपरसोम्निया नामक नींद की बीमारी हो सकती है।
नहीं, अगर आप कभी-कभी ज्यादा सोते हैं और थोड़ा सुस्त महसूस करते हैं, तो मतलब यह नहीं कि डिप्रेशन है। डिप्रेशन में मूड में बदलाव लंबे समय तक बने रहते हैं। यह लक्षण महसूस रहे हैं, तो डिप्रेशन का संकेत है: • हमेशा ऊर्जा की कमी, उदासी या निराशा का भाव मनपसंद चीजों में रुचि कम होना!।
अगर आपको नींद की समस्याएँ हैं, तो डिप्रेशन विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है. डिप्रेशन से पीड़ित लोगों में नींद की समस्याएँ आम हैं, जैसे अनिद्रा (सोने में परेशानी) या हाइपरसोमनिया (बहुत अधिक नींद आना।
🧫 आरोग्य संजीवनी_ 🩸
मसूड़ों में सूजन हो, तो इसका समाधान क्या है? मसूड़ों में सूजन आमतौर पर इंफेक्शन, पोषण की कमी, मसूड़ों की सही सफाई न करने या हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकती है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह दर्दनाक हो सकता है और गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
घरेलू उपाय: गर्म पानी और नमक से कुल्ला करें – दिन में 2-3 बार गुनगुने पानी में नमक डालकर कुल्ला करने से सूजन और दर्द में आराम मिलता है।
एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें – एलोवेरा जेल मसूड़ों पर लगाने से राहत मिलती है और सूजन कम होती है।
लौंग का तेल लगाएं – लौंग में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मसूड़ों के इंफेक्शन को कम करने में मदद करते हैं।
विटामिन C युक्त फल खाएं – संतरा, नींबू, अमरूद और कीवी जैसे फलों का सेवन करें, क्योंकि यह मसूड़ों को मजबूत बनाते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियों और उनसे होने वाले चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन भगवान राम की बड़ी बहन के बारे में हर किसी को नहीं पता। वाल्मीकि रामायण में भी राम की बहन शांता के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन दक्षिण पुराण में भगवान राम की बहन शांता का इतिहास जरूर मिलता है।
भगवान राम की बहन शांता का सच यह है कि शांता राम की बड़ी बहन और माता कौशल्या की बेटी थी। वह बहुत ही सुन्दर और हर कार्य में निपुण थी। शास्त्र से लेकर पाक कला तक में एकदम पारंगत।
वहीं, रानी कौशल्या की बहन थी रानी वर्षिणी, जिनका विवाह अंगदेश के राजा रोमपद के साथ हुआ था। दुर्भाग्य की बात यह थी कि किन्हीं कारणों उनकी कोई भी सन्तान न हो सकी। एक दिन वर्षिणी राजा रोमपद के साथ कौशल्या से मिलने अयोध्या आई। जब सभी एक साथ बैठकर भोजन कर रहे थे, तभी वर्षिणी ने दशरथ की पुत्री शांता की शालीनता और कार्यकुशलता से मोहित होकर अपनी एक इच्छा प्रकट की। वर्षिणी ने कहा, “वैसे तो मेरी कोई भी सन्तान नहीं है, लेकिन मेरी इच्छा है कि शांता की तरह ही मेरी भी एक पुत्री हो।”
वर्षिणी की इस बात पर राजा दशरथ उन्हें शांता को गोद देने का वचन दे देते हैं। इस प्रकार राजकुमारी शांता अंगदेश के राजा रोमपद की पुत्री बन जाती है। एक दिन राजा रोमपद किसी काम में इतना खोये रहते हैं कि उनकी चौखट पर आए ब्राह्मण की आवाज उन्हें सुनाई ही नहीं देती। फलस्वरूप, ब्राह्मण को खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है। देवराज इंद्र को राजा रोमपद द्वारा किया गया ब्राह्मण का यह अपमान जरा भी रास नहीं आता। वह अंगदेश में वर्षा न करने का निश्चय कर लेते हैं।
ऐसे में बिना वर्षा अंगदेश में सूखा पड़ जाता है। इस वजह से अकाल की स्थिति पैदा हो जाती है। इस समस्या से उबरने के लिए राजा रोमपद ऋषि श्रंग के पास जाते हैं और उनसे इस समस्या का उपाय पूछते हैं। ऋषि राजा को यज्ञ कराने की सलाह देते हैं, जिससे रूठे इंद्र देव को मनाया जा सके। राजा रोमपद ऐसा ही करते हैं और यज्ञ के बाद अंगदेश में पुनः वर्षा होती है। इससे अंगदेश में आई समस्या का अंत होता है। ऋषि श्रंग से प्रसन्न होकर राजा रोमपद उनसे अपनी पुत्री शांता का विवाह करा देते हैं।
शांता के बाद राजा दशरथ के कोई सन्तान नहीं थी। इसके लिए वह बहुत ही चिंतित रहते थे। इसी कारण वह भी ऋषि श्रंग के पास जाते हैं। ऋषि श्रंग उन्हें कामाक्षी यज्ञ कराने की सलाह देते हैं। ऋषि के कहे अनुसार राजा दशरथ कामाक्षी यज्ञ संपन्न कराते हैं और प्रसाद के रूप में खीर बनवाते हैं। यज्ञ समाप्त होने के बाद जो खीर का प्रसाद था, उसे राजा दशरथ की तीनों पत्नियां कौशल्या, सुमित्रा और कैकई ग्रहण करती हैं।
कामाक्षी यज्ञ के प्रताप से रानी कौशल्या को पुत्र के रूप में राम, कैकई को भरत और सुमित्रा को लक्ष्मण व शत्रुघ्न की प्राप्ति होती है। चारों पुत्रों को अपनी बहन शांता के बारे में कुछ भी मालूम नहीं होता है। समय के साथ धीरे-धीरे राम को अपनी माता के दुख का पता चलता है। साथ ही भगवान राम की बहन शांता के जीवन का सच, जो कोई नहीं जानता था, राम को मालूम हो जाता है। बहन शांता के बारे में जानने के बाद राम अपनी मां को बहन शांता से मिलवाते हैं और सभी पुराने मतभेदों को दूर कर एक साथ रहने का वचन देते हैं।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।

