मृत्यु के बाद अमर हो गए अशोक तलनकर

विदिशा । जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु तो निश्चित है लेकिन यदि जीवन जीते जीते यदि हम सत्कर्म करते हैं तो मृत्यु के बाद भी अमर हुआ जा सकता है. टीलाखेड़ी रोड, जज कॉलोनी के पास रहने वाले 71 बर्ष के अशोक तलनकर का बीती 14 मई की रात को भोपाल के एम्स हॉस्पिटल में निधन हो गया था जिनके मृत शरीर का दान स्थानीय अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज में बीते दिवस शुक्रवार को किया गया।
देहदान और नेत्रदान की जागृति के लिए अंतिम सेवक विकास द्वारा चलाये जा रहे मिशन से जुड़कर अशोक तलनकर ने मृत्यु उपरांत देहदान का संकल्प पत्र सन 2018 में भरा था जिसमें जिक्र था कि मेरी मृत्यु के उपरांत पार्थिव शरीर को किसी भी मेडिकल कॉलेज में दान कर दिया जावे तो उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए अंतिम सेवक विकास पचौरी के सहयोग से अशोक तलनकर की पत्नी मीना तलनकर, पुत्र पराग तलनकर, पुत्री वैशाली शांदगुले एवं परिवार जनों ने अशोक तलनकर के पार्थिव शरीर को अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज में दान कर दिया, अब यह पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज के छात्रों को शोध के लिए काम आवेगा।
अंतिम सेवक विकास पचौरी ने बताया कि बीते लगभग 15 वर्षों से चले आ रहे नेत्रदान, देहदान, अंगदान, रक्तदान जागरूकता अभियान के अंतर्गत यह 27 बा देहदान था. मेडिकल कॉलेज विदिशा में अशोक तलनकर देहदान के समय उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देकर इनकी मोक्ष की कामना करने शोक सभा हुई जिसमें जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टरअंशुल गुप्ता के शोक संदेश का बाचन एसडीम क्षितिज शर्मा ने किया एवं श्रद्धांजलि अर्पित की । इस शोक सभा में सीएमएचओ डॉ. योगेश तिवारी, डीन मनीष निगम, एनाटॉमी विभाग के डॉ. नैना वाकोड़े, डॉ सुजाता नेताम, डॉ .ओमप्रकाश गौर सपोर्टिंग स्टाफ राकेश परिहार, रमेश कुमार के अलाबा अंतिम सेवक विकास पचौरी एवं अशोक तलनकर के परिवार जन एवं अनेक व्यक्ति मौजूद थे।



