धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 22 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 23 जून 2025
23 जून 2025 दिन सोमवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी उपरान्त त्रयोदशी तिथि है। आप सोमवार का प्रदोष व्रत भी है। पुत्र प्राप्ति हेतु बहुत ही श्रेयस्कर इस व्रत को माना जाता है। आज मास शिवरात्रि का पवन पावन व्रत भी है। आज स्थायीजय योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। आप सभी सनातनियों को “सोम प्रदोष एवं मास शिवरात्रि के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 10:10 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र कृत्तिका 03:16 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।कृतिका नक्षत्र का नाम भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय से जुड़ा हुआ है। कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं।
⚜️ योग – धृति योग 01:17 PM तक, उसके बाद शूल योग
प्रथम करण : गर – 11:46 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 10:09 पी एम तक विष्टि
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:04 ए एम से 04:44 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:24 ए एम से 05:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:51 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:43 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 01:07 पी एम से 02:33 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, जून 24 से 12:44 ए एम, जून 24
सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:16 पी एम से 05:25 ए एम, जून 24
🚓 यात्रा शकुन – मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र – ॐ सौ सौभाग्य नमः।
🤷🏻‍♀️ *आज का उपाय – शिवजी को दुग्धाभिषेक करें। 🌳 वनस्पति तंत्र उपाय – पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ सोम प्रदोष व्रत/ शिवरात्रि/ अभिनेता मुकेश खन्ना जन्म दिवस, प्रमुख जनरल प्राणनाथ थापर पुण्य तिथि, अभिनेता मुकेश खन्ना जन्म दिवस, अमर शहीद प्रसिद्ध क्रांतिकारी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जयन्ती, भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के पुत्र संजय गाँधी स्मृति दिवस, राष्ट्रीय गुलाबी दिवस, राष्ट्रीय जलयोजन दिवस, डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस, संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा दिवस, अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस ✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है। 🌾 *Vastu Tips* ☘️ वास्तु शास्त्र में घर में रखने वाली एक-एक चीज को रखने और खरीदने का नियम बताया गया है। अगर वास्तु कि इन बातों का ध्यान रखा जाए तो घर में सुख-समृद्धि जरूर आती है। तो आज हम वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम से जानेंगे कि घर के कमरों में किस रंग की तस्वीर लगाना चाहिए। वास्तु के मुताबिक, घर के रसोईघर में सफेद या सुनहरे रंग की तस्वीर लगानी चाहिए। रसोई में इन रंगों की तस्वीर लगाने से घर में अन्न की कमी कभी नहीं होती और हमेशा मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद घर के सदस्यों पर बना रहता है। घर के पूजा घर में गुलाबी या पीले रंग की तस्वीर लगानी चाहिए। ❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पैसे के बिना कोई साथ नहीं देता बुरा समय हर किसी के जीवन में आता है, लेकिन उस समय यह स्पष्ट हो जाता है कि रिश्तेदार और समाज तभी तक साथ होते हैं जब तक आपके पास पैसा होता है। वाणी, भावनाएं और नाते सब कुछ पैसे के नीचे दब जाता है।
सुंदर नहीं, स्वस्थ शरीर ही काम आता है बाहरी सुंदरता क्षणिक आकर्षण हो सकती है, लेकिन असली मूल्य अच्छे स्वास्थ्य का है। यदि शरीर स्वस्थ नहीं है तो जीवन के सारे सुख व्यर्थ हो जाते हैं।
लड़की को शादी के बाद अपने ससुराल जाना ही पड़ता है चाहे वह अपने मायके से कितनी ही जुड़ी हो, सामाजिक व्यवस्था ऐसी है कि विवाह के बाद लड़की को अपना घर छोड़ना ही पड़ता है। यह परिवर्तन कभी-कभी बहुत गहरा और पीड़ादायक भी होता है, लेकिन समाज की रीतियों में यह बंधनस्वरूप अनिवार्य बना दिया गया है।
💉 आरोग्य संजीवनी
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कुछ प्रमुख देसी इलाज:
फाइबर युक्त आहार: अपने खाने में फाइबर बढ़ाएं। साबुत अनाज, फल और सब्ज़ियाँ, जैसे पपीता, केला, सेब, और पत्तेदार सब्ज़ियाँ शामिल करें। यह मल को नरम करता है और कब्ज़ से राहत दिलाता है।
पर्याप्त पानी पिएं: दिन भर में खूब पानी पिएं। यह मल को पतला रखने में मदद करता है, जिससे मल त्याग आसान होता है और जोर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
एलोवेरा: ताज़े एलोवेरा का गूदा खाने या इसके जेल को मस्सों पर लगाने से सूजन और जलन कम हो सकती है।
सिट्ज़ बाथ : हल्के गर्म पानी में 15-20 मिनट तक बैठने से दर्द, सूजन और खुजली में आराम मिलता है। इसमें थोड़ा एप्सम सॉल्ट भी मिला सकते हैं।
नारियल तेल/जैतून का तेल: प्रभावित जगह पर नारियल तेल या जैतून का तेल लगाने से दर्द और सूजन कम हो सकती है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🕯️
श्रीकृष्ण की मृत्यु का रहस्य, मुसल युद्ध और यदुवंश का अंत

आप सभी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बारे में भली-भांति जानते हैं। हर कोई जानता है कि उनका जन्म कैसे और कहाँ हुआ था? उन्होंने धरती पर अवतार क्यों लिया? उनके लीलाएं, प्रेम और जीवन से हर कोई परिचित है।
‌‌ लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी मृत्यु कैसे हुई? इसका क्या कारण था? द्वारका पूरी कैसे जलमग्न हो गई? और श्रीकृष्ण के शरीर का कौन सा हिस्सा उनके अंतिम संस्कार में नहीं जला और वह अंग आज भी जीवित है?
श्रीकृष्ण की मृत्यु का कारण सबसे पहले हम जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु का कारण क्या था? किसके श्राप से उनका पूरा वंश समाप्त हुआ?
भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु का कारण गांधारी थी, जो कौरवों की माता थीं। महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने बिना हथियार उठाए कौरवों का नाश कर दिया था। इस युद्ध में धृतराष्ट्र और गांधारी के सभी 100 पुत्र आपस में लड़ते हुए मारे गए। और पांडव युद्ध जीत गए।
युद्ध समाप्त होने के बाद जब श्रीकृष्ण कौरवों की माता गांधारी से विदा लेने पहुंचे, तो गांधारी अपने 100 पुत्रों की मृत्यु का शोक मना रही थीं। उन्होंने श्रीकृष्ण को अपने सामने देखकर बहुत क्रोध किया और कहा,आप मेरे पुत्रों की मृत्यु के कारण हैं। अगर आप चाहते तो इस युद्ध को रोक सकते थे, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। इसलिए मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी। आपको इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।
गांधारी ने भगवान कृष्ण को श्राप दिया और कहा,यदि मैंने भगवान विष्णु की सच्चे मन और विश्वास के साथ पूजा की है और पातिव्रता धर्म का पालन किया है, तो जैसे मेरे पुत्र आपस में लड़कर मरे हैं, वैसे ही आपका वंश भी आपस में लड़कर समाप्त हो जाएगा। यह द्वारका आपके सामने समुद्र में डूब जाएगी और आप कुछ नहीं कर पाएंगे।
महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ने 18 दिनों तक मूँगफली क्यों खाई
यदुवंश का अंत भगवान श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे और गांधारी विष्णु की बड़ी भक्त थीं, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने उनका श्राप स्वीकार कर लिया। उन्होंने गांधारी को प्रणाम किया और वहाँ से चले गए।
भगवान अपने सच्चे भक्तों को कभी निराश नहीं करते, इसलिए उन्होंने यदुवंशियों को मूर्ख बना दिया ताकि गांधारी का श्राप सत्य हो सके।
महाभारत युद्ध के 36 साल बाद, एक दिन विश्वामित्र, दुर्वासा, भृगु और नारद जैसे महान ऋषि द्वारका के पिंडारका वन में तपस्या करने आए। एक दिन जब वे तपस्या कर रहे थे, तो कुछ शरारती यदुवंशी कुमार उन्हें परेशान करने आ गए। उन्होंने एक सांप को एक गर्भवती महिला के रूप में सजाया और ऋषियों के सामने लाकर कहा, “गुरुदेव, कृपया जाग जाइए।”
जब ऋषियों ने आँखें खोलीं, तो यदुवंशी कुमार ने कहा,हे गुरुदेव! यह महिला गर्भवती है और आप त्रिकालदर्शी हैं। आपकी शक्ति और ज्ञान अमोघ हैं। यह महिला जानना चाहती है कि इसके गर्भ में पुत्र है या पुत्री। कृपया इस महिला की जिज्ञासा पूरी करें
ऋषियों ने अपनी शक्ति से यह जान लिया कि यदुवंशी कुमार उनके साथ मजाक कर रहे हैं। तब ऋषि क्रोधित हुए और उन्होंने कहा, “हे मूर्खों, तुमने हमारे साथ यह घृणित कार्य किया है। तुम्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी।”
ऋषियों ने उन्हें श्राप दिया,अब इस सांप के गर्भ से एक मुसल (गदा) जन्म लेगा, जो तुम्हारे पूरे वंश का नाश कर देगा
यदुवंशी कुमार डर गए और उन्होंने तुरंत सांप का पेट फाड़ा। उन्हें देखकर आश्चर्य हुआ क्योंकि उसमें वास्तव में एक मुसल था। वे अपने कर्मों पर पछताने लगे। वे राजा उग्रसेन के पास पहुँचे और सारी घटना सुनाई। राजा ने उस मुसल को तोड़कर समुद्र में फेंकने का आदेश दिया। समुद्र में गिरे उस टुकड़े को एक मछली ने खा लिया और बाकी धूल किनारे पर रह गई, जिससे वहाँ बिना गाँठ वाला घास उग आया।
एक दिन, एक जारा नामक मछुआरे ने मछली पकड़ी और जब उसने मछली को काटा, तो उसमें से वह टुकड़ा निकला। मछुआरे ने उसे अपने तीर की नोक पर लगा दिया।
श्रीकृष्ण की मृत्यु और द्वारका का जलमग्न होना भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्त गांधारी के श्राप को सत्य करने के लिए यदुवंशियों को मदिरा पिलाई। मदिरा पीकर सभी यदुवंशी आपस में झगड़ने लगे और उनकी लड़ाई युद्ध में बदल गई। उन्होंने समुद्र किनारे उगी घास को उखाड़कर एक-दूसरे पर वार करना शुरू किया। वह घास उसी मुसल से बनी थी, जो ऋषियों के श्राप के कारण उत्पन्न हुआ था। सभी यदुवंशी आपस में लड़कर समाप्त हो गए।
बलराम जी इस विनाश को सहन नहीं कर पाए और उन्होंने समुद्र किनारे ध्यानमग्न होकर प्राण त्याग दिए।
श्रीकृष्ण अकेले रह गए। तब उन्होंने भी अपने धाम लौटने का निश्चय किया। एक दिन वे पेड़ के नीचे बैठे थे, तभी जारा मछुआरे ने उनके पैर की चमक को हिरण की आँख समझकर तीर चला दिया। तीर लगने के बाद मछुआरे ने उनसे क्षमा माँगी। श्रीकृष्ण ने उसे बताया कि यह पूर्व जन्म का कर्म है और वे वैकुंठधाम चले गए। उनके जाने के बाद द्वारका समुद्र में डूब गई।
श्रीकृष्ण का हृदय आज भी जीवित है श्रीकृष्ण के अंतिम संस्कार के समय उनका हृदय नहीं जला। उसे बाद में जगन्नाथ पुरी में स्थापित कर दिया गया, और वह आज भी धड़क रहा है।
अगर आप जगन्नाथ पुरी नहीं गए हैं, तो एक बार वहाँ जाकर देखें। आप श्रीकृष्ण के हृदय की धड़कन को महसूस कर सकते हैं।
तो प्रिय पाठकों, आशा करते हैं कि आपको पोस्ट पसंद आई होगी। ऐसी ही रोचक जानकारियों के साथ माई विश्वज्ञान मे फिर से मुलाकात होगी, तब तक के लिए आप अपना ख्याल रखें, हंसते रहिए,मुस्कराते रहिए और औरों को भी खुशियाँ बांटते रहिए।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।_
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

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