कृषि प्रधान देश मे अन्नदाता को खाद नसीब नही, जद्दोजहद मारामारी में उलझा किसान
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । कृषि प्रधान देश में अन्नदाताओ के लिये दो बोरी उर्वरक के लिये जहां सुबह से कई घंटो लाइन मे लगना पड रहा है वही मारामारी चक्काजाम आंदोलन के बीच पुलिस की लाठी खाकर काफी जद्दोजहद के बाद बमुश्किल उसे दो बोरी खाद नसीब हो पा रहा है। खाद के इस संघर्ष मे किसान का कीमती समय बर्बाद हो रहा है एक अनार सौ बीमार की कहाबत स्थानीय डबल लाक गोदाम में चरितार्थ होते हुए बखुबी देखा जा सकता है जहां खाद का ट्क आते ही किसान भूखे भेडिये की भांति टूट पडते है। बता दे की इस समय मौसम अनुकूल होने के कारण खेतो में खडी खरीफ फसलो को यूरिया की सख्त जरुरत रहती है। किसानो की शिकायत है कि शासन किसानो की मांग व जरुरत केअनुसार पूर्व से खाद का भंडारण करके नही रखता जिससे सभी को सुविधानुसार खाद की आपूर्ति समय पर संभव हो सके। देखा जा रहा है कि कृत्रिमाभाव करके इस मौके का फायदा प्राईवेट खाद बिक्रेताओ को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से पहुंचाने से ही किसानो का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा हुआ है जिस खाद की बोरी की कीमत दो सौ सडसठ रुपये है वही बोरी प्राइवेट खाद विक्रेताओ व्दारा कालाबाजारी कर पांच सौ रुपए धडल्ले से बेची जा रही है शासन प्रशासन कृषि विभाग इस दिशा मे मूकदर्शक बना किसान को खाद के नाम पर लुटते पिटते हुए देख रहा है। सूत्रो से जानकारी मिली है की निजी खाद विक्रेताओ को शासन मिलीभगत करके पहले से ही खाद के ट्क पर ट्क उपलब्ध करा देता है। जबकि सरकारी दुकानो पर खाद के लाले पडे हुए रहते है इस खाद संकट को देखते हुए शासन को चेतने की आवश्यकता है वरिष्ठ अधिकारी इस ओर शीघ ध्यान दे।



