Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 25 अक्टूबर 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए। *शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है । *शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 👸🏻 शिवराज शक 352_
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी 03:48 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 07:51 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि है, जो राशि स्वामी मंगल का शत्रु है।
⚜️ योग – शोभन – पूर्ण रात्रि तक
⚡ प्रथम करण : वणिज – 02:34 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 03:48 ए एम, अक्टूबर 26 तक बव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:26:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:44:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:46 ए एम से 05:37 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:12 ए एम से 06:28 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:57 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:42 पी एम से 06:07 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:42 पी एम से 06:58 पी एम
💧 अमृत काल : 12:54 ए एम, अक्टूबर 26 से 02:42 ए एम, अक्टूबर 26
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 26
❄️ रवि योग : 07:51 ए एम से 06:29 ए एम, अक्टूबर 26
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ विनायक चतुर्थी/ आयुर्वेद दिवस, ताइवान और पेंघू रिट्रोसेशन डे/ अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस, बौनापन जागरूकता दिवस, संत क्रिस्पिन दिवस, भारतीय क्रिकेटर उमेशकुमार तिलक यादव जन्म दिवस, राष्ट्रीय चिकना खाद्य दिवस, राष्ट्रीय ट्रिक या ट्रीट दिवस, राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह ख़ान जन्म दिवस, प्रसिद्ध पार्श्वगायिका शारदा जन्म दिवस, गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री घनश्यामभाई ओझा जयन्ती, संत ज्ञानेश्वर जी महाराज स्मृति दिवस, भारतीय गीतकार साहिर लुधियानवी पुण्यतिथि, अभिनेता जसपाल भट्टी स्मृति दिवस, ताइवान और पेन्घु प्रतिगमन दिवस, विश्व ओपेरा दिवस, गणतंत्र दिवस-कज़ाकिस्तान, विश्व पास्ता दिवस, राष्ट्रीय चिकना भोजन दिवस, चीनी दिवस, संप्रभुता दिवस- स्लोवेनिया, क्रिस्प सैंडविच दिवस, एक दिन के लिए पंक, ताइवान का प्रतिगमन दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
मंदिर की दिशा घर में मंदिर सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। इसे हमेशा उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में बनाना शुभ होता है। ध्यान रखें कि मंदिर को कभी भी किचन या बाथरूम के पास न बनाएं।
*ये होनी चाहिए किचन की सही दिशा किचन का स्थान घर की ऊर्जा पर गहरा असर डालता है। वास्तु के अनुसार, आपका किचन हमेशा दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण में होना चाहिए। यह स्थान परिवार की सेहत और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। *मास्टर बेडरूम की सही जगह ज्योतिषियों की मानें तो आपके घर का मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना श्रेष्ठ माना गया है। इससे घर के सदस्यों को मानसिक शांति मिलती है और समृद्धि का आगमन होता है। बेड के ठीक सामने शीशा न लगाएं, क्योंकि इससे नेगेटिव एनर्जी का संचार होता है।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कस्तूरी से निर्मित आयुर्वेदिक दवा :
*मृगनाभ्यादिक वटी- बढ़िया कस्तूरी 3 माशे, अनबिन्धे मोती 3 माशे, सोने के वर्क डेढ़ माशा, चाँदी के वर्क साढे चार माशा, केशर 6 माशा, वंशलोचन 10 माशा, छोटी इलायची के दाने साढ़े सात माशे। जायफल 9 माशे और जावित्री 1 तोला इस सब औषधियों में से मोतियों को 12 घण्टे तक गुलाब जल में घोटना चाहिये, बाद में सोने-चांदी के वर्क डालकर 3 घण्टे तक घोटना चाहिए । फिर वंशलोचन आदि शेष औषधियों को कूट-पीस और छानकर उसी खरल में डाल देना चाहिये और नागरबेल के पान का रस डालकर 36 घण्टे तक घोटना चाहिये । उसके बाद मटर के समान गोलियाँ बनाकर छाया में सुखा लेना चाहिये । *लाभ – चिकित्सा ग्रन्थ में लिखते हैं कि रोगी की धातु कैसी ही कम हो गयी हो, धातु की कमी से ,वीर्य की कमी से जो नामर्द हो गया हो तो इन गोलियों से वह अच्छा हो जायगा । इन गोलियों को 2 से 2 तक की मात्रा में मलाई के साथ देनी चाहिये ।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
*शिलाजीत – पर्वतों की आत्मा
*गिरिजं शिलाजतु नाम बलं मेघस्य सन्निभम्। *जो पर्वतों की गोद से निकले, वह शिलाजीत बल का बादल है। हिमालय की चट्टानों से रिसने वाला खनिज रस इसमें 85 से अधिक ट्रेस मिनरल्स और होते हैं
*शिलाजीत के लाभ वीर्य और ओज की वृद्धि! थकान, तनाव, शुगर, और कमजोरी में अमृत समान! यह शरीर में उत्पादन को बढ़ाता है! पुरुषों में को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है! आयुर्वेद सार संग्रह, द्रव्यगुण विज्ञान और निघंटु में अमृतम शिलाजीत को 10 घोड़ों की ताक़त देने वाली औषधि कहा गया है *शिलाजतुं सर्वरोगान् हन्ति, बलं वीर्यं प्रयच्छति।
*अर्थात- शिलाजीत सभी रोगों का नाश कर बल और वीर्य देता है। अमृतम शिलाजीत माल्ट में शुद्ध शिलाजित के अलावा २७ जड़ी बूटियों और रस भस्मों का मिश्रण है! *भारतीय सफ़ेद मूसली मूसलीं बलदा श्रेष्ठा, वृष्यं सौख्यप्रदा स्मृता।
*इसका स्वाद मधुर और गुण शीतल, बलवर्धक, रसायन है! यह जड़ प्राकृतिक कामोत्तेजक और स्टैमिना बूस्टर है!
*अमृतम शिलाजीत गोल्ड माल्ट शारीरिक व मानसिक कमजोरी दूर कर वीर्य, शुक्राणु और यौनशक्ति बढ़ाती है *बच्चों, महिलाओं और वृद्धों में समान रूप से लाभकारी! इम्यूनिटी और बॉडी मास बढ़ाती हैइसे आयुर्वेद में शुक्र धान्य यानी वीर्य की धरा कहा गया है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
विधाता होते हुए भी ब्रह्मा जी ने पूर्वकाल में अपने पुत्रों को सृष्टि की उत्पत्ति के लिए कहा तो वे सब इनकार करके तप करने को चल दिए। पुत्रों के इस व्यवहार पर ब्रह्मा जी को इतना क्रोध आया कि उनका मस्तक ब्रह्मतेज से जलने लगा, जिससे ग्यारह रुद्र उत्पन्न हुए।
*जिनमें से एक का नाम कालाग्नि रुद्र है। *यह रुद्र सृष्टि का संहार करने वाला है। ब्रह्मा जी ने पुनः सृष्टि रची। उनके दांये कान से पुलस्त्य, बांये कान से पुलह, दांये नेत्र से अग्नि, बांये नेत्र से क्रतु, नासिका के दांये पुट से अराणि, बांये पुट से अंगिरा, मुख से रुचि, बांये भाग से भृगु और दायें भाग से दक्ष, छाया से कर्दम, नाभि से पंचाशिख, वक्ष से वीढु, कण्ठदेश से नारद, स्कन्ध से मरीचि, ग्रीवा से अपान्तरतमा, रसना से वशिष्ठ, अधरोष्ठ से प्रचेता, वाम कुक्षि से हंस और दांयी कुक्षि से स्वयं यति उत्पन्न हुए।
*ब्रह्मा जी ने इन सब पुत्रों को सृष्टि-उत्पत्ति का आदेश दिया, जिसे सुनकर नारद जी बोले-हे पितामह! *आपने हमसे जेष्ठ सनकादि को विवाह करके सृष्टि उत्पन्न करने के लिए विवश क्यों नहीं किया? आप स्वयं समर्थ होते हुए भी तप मैं क्यों प्रवृत्त हो रहे हैं, स्वयं सृष्टि रचना क्यों नहीं करते?
*यह कहाँ का न्याय है कि पिता अपने पुत्रों में से किसी को अमृत [तप ] प्रदान करे और किसी को विषपान [संसारी बनने ] को विवश करे? *पिता जी, आप जानते हैं कि अत्यंत निम्न और भयंकर इस संसार-सागर में एक बार गिरने के बाद करोड़ो कल्पों के व्यतीत हो जाने पर भी निस्तार नहीं होता।
*सभी कष्टों, संकटॊं बाधाओं तथा आपत्तियों से निस्तार का एकमात्र एवं अमोघ [कभी व्यर्थ न जाने वाला ] उपाय कृपा निधान पुरुषोत्तम श्री नारायण की भक्ति एवं उनकी शरणागति है। *श्रीकृष्ण के चरणाविन्द में अमृत से भी अधिक मधुर एवं सुखद अनुराग को छोड़कर संसार के विषयों के विनाशक विष का कौन मूर्ख सेवन करना चाहेगा?
*इतना सुनने के बाद ब्रह्मा जी इतने अधिक क्षुब्ध हो गए कि वे नारद जी के वक्तव्य को अपनी अवज्ञा समझते हुए संयम न रख सके और शाप देते हुए बोले-‘नारद! *तुमने मेरी अवज्ञा की है, फलस्वरूप तुम्हारे ज्ञान का लोप हो जाएगा और तुम नाना-योनियों में उत्पन्न होकर लंपट, कामी, घोर श्रृंगारी ही नहीं अपितु श्रृंगार में मधुक वाक [मीठी वाणी बोलने वाला ] किन्नर और किसी योनि में दातीपुत्र बनोगे।
*अंत में वैष्णवों के संग और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा के फलस्वरूप पुनः मेरे पुत्र बनोगे और मैं तुम्हें उस समय पुनः पुरातन ज्ञान प्रदान करूंगा। इस समय तो तुम मेरे शाप से नष्ट हुए ज्ञान के साथ पतन को प्राप्त करो।’ *नारद जी को यह शाप देकर ब्रह्मा जी मौन हो गए। नारद जी ने रोते हुए पितामह से प्रार्थना की-‘जगदगुरो! महातपस्वी तथा जगत के रचियता के लिए इस प्रकार का क्रोध शोभनीय नहीं है।
*कुमार्गगामी पुत्र का पिता द्वारा त्याग और शाप तो समझ में आता है परंतु तपस्वी एवं आत्म-कल्याण के इच्छुक पुत्र को शाप देने का क्या औचित्य है? *अच्छा, आपके मन में जो आया, आपने कह दिया, मैं उसे शिरोधार्य करता हुआ आपसे केवल एक ही प्रार्थना करता हूँ कि मुझे केवल यही वर देने की कृपा करें कि जिस भी योनि में मेरा जन्म हो, मैं हरि भक्ति को न छोडूं और न ही श्री नारायण का नाम-संकीर्तन भूलूं।’
*ब्रह्मा जी बोले-‘वत्स! तुम सचमुच ही धन्य हो। हरि भक्ति से बढकर उत्तम संसार में कुछ भी नहीं है। *इस भारतवर्ष में सबसे हीन योनि शूकर योनि है, जिस भी व्यक्ति को जाति अभिमान हो जाता है, वह शूकर योनि में उत्पन्न होता है।
*इस योनि में भी हरि भक्ति करने वाला जीवन गोलोक को प्राप्त कर लेता है। वास्तव में श्री कृष्ण के चरणारविंदों में भक्ति न करा सकने वाले पिता, गुरु, स्वामी तथा सखा आदि सब कुत्सित एवं त्याज्य हैं। *नारद जी बोले-‘हे चतुरानन! आपने मुझे अकारण की शाप दिया है, शास्त्रकारों ने पाताल को दण्डित करने की व्यवस्था की है।
*अतः मैं भी आपको शाप देता हूँ कि तीन कल्पों तक आप अपूज्य बने रहेंगे। तीन कल्प व्यतीत होने जाने के उपरान्त ही आपका विश्व में पूजन होगा।’ *यह कह कर नारद जी शांत हो गए। ब्रह्मा जी के इसी शाप के चलते नारद जी को गंधर्व और दासीपुत्र आदि के रूप में अनेक योनियों में उत्पन्न होना पड़ा।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।



