
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 27 दिसम्बर 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए। *शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है । *शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 👸🏻 शिवराज शक 352_
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार पौष माह के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 01:10 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 09:09 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति (गुरु) ग्रह हैं, नक्षत्र के देवता “अजपाद (अजा एकपाद)” हैं, जो शिव का एक रूप माने जाते हैं
⚜️ योग – व्यातीपात योग 12:21 PM तक, उसके बाद वरीयान योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 01:09 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 12:39 ए एम, दिसम्बर 28 तक बव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:49:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:14:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:23 ए एम से 06:18 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:50 ए एम से 07:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:02 पी एम से 12:43 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:06 पी एम से 02:47 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:29 पी एम से 05:57 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:32 पी एम से 06:54 पी एम
💧 अमृत काल : 04:00 ए एम, दिसम्बर 28 से 05:34 ए एम, दिसम्बर 28
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:55 पी एम से 12:50 ए एम, दिसम्बर 28
🌸 त्रिपुष्कर योग : 07:12 ए एम से 09:09 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – त्रिपुष्कर योग/ जोर मेला (पंजाब)/ पंचक जारी/ गुरु गोबिंद सिंह जयन्ती/ राष्ट्रीय बाल शहीदी दिवस/ राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का प्रथम गायन, दिवस, पंजाब के प्रमुख सिक्ख कार्यकर्ता उज्जवल सिंह जयंती, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय महामारी तैयारी दिवस,महान कवि एवं शायर मिर्जा गालिब जयन्ती, बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान जन्म दिन, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
दक्षिण-पूर्व दिशा में कूड़ेदान क्यों है अशुभ दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी होती है। यहां कूड़ेदान रखने से घर में पैसा टिक नहीं पाता। आय होने के बावजूद खर्चे बढ़ते चले जाते हैं और धीरे-धीरे आर्थिक संकट गहराने लगता है। कर्ज बढ़ने की स्थिति भी बनने से घर के मुखिया को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
*कूड़ेदान उत्तर और पूर्व दिशा में रखने से क्या होता है उत्तर और पूर्व को प्रगति और विकास की दिशा माना जाता है। इन दिशाओं में कूड़ेदान रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इससे घर के सदस्यों में निराशा और उदासी बनी रहती है। उत्तर दिशा में कूड़ेदान रखने से नौकरी और करियर से जुड़े अच्छे अवसर कम हो सकते हैं और घर की तरक्की रुक सकती है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ क्यां न करें
दही, छाछ, गुड़, तले हुए व उड़द से बने पदार्थ, अचार, पापड़, पनीर, फल, मिठाई, चावल, सुखा मेवा, आलू , मटर, टमाटर, नींबू, चना, राजमा, चौलाई, सेम, ग्वारफली, अरवी, टिंडा, मक्का, चिकने व भारी पदार्थ, मैदे व दूध से बने पदार्थ एवं चाय-कॉफ़ी का सेवन न करें
*विरुद्ध आहार जैसे – नमक, खट्टे पदार्थ, फल, दालें, शाक, अदरक, लहसुन, तुलसी आदि का दूध के साथ सेवन न करें *पूर्व में लिये हुए अन्न का पाचन होकर शरीर में हलकापन आने व खुल के भूख लगने से पहले फिर से अन्न ग्रहण न करें
*दिन में सोना, अनुचित समय पर भोजन, रात्रि-जागरण, खुली हवा में घूमना, फ्रिज का ठंडा पानी पीना, सतत पानी में काम करना, दलदलवाले स्थान पर तथा नमीयुक्त वातावरण में दीर्घकाल तक रहना व चिंता करना – इन कारणों से गठिया रोग उत्पन्न होता है | अत: इनसे बचें *निवाड़ या रस्सी से बुने हुए खाट या पलंग पर न सोये |
💉 आरोग्य संजीवनी
चाहे मूत्राशय में पथरी हो, चाहे गुद्दे में हो, चाहे पित्ताशय में हो – कहीं भी पथरी हो, भूलकर भी ऑपरेशन नहीं करना | पत्थरचट्टा पोधे के 2 -2 पत्ते रोज खाओ, इससे कुछ ही दिनों में पथरी चट हो जाती है | यह पथरी के लिए अक्सीर इलाज है | जिनको मैं यह प्रयोग बताया और उन्होंने किया तो उनकी पथरी निकल गयी
*सुबह खाली पेट खाये तो आच्छा है | कहीं सुजन हो, छोटा – मोटा घुटने का दर्द हो, मोच आ रही हो तो इसके पत्ते को रगड़ के र्स निकालकर लगाने से लाभ होता है, और भी छोटे- मोटे बहुत सारे फायदे होते है
*पत्थरचट्टा का 1 पत्ता बीच में से चीर के 2 टुकड़े करो | चिरा हुआ भाग जमीन में गाड़ दो तो उसमे से दुसरे पौधे हो जायेंगे (गुर्दे – संबंधी रोगों की यह श्रेष्ठ गुणकारी औषधि है)* *रुक-रूककर पेशाब होने की समस्या में प्रतिदिन इसके 2-3 पत्तों का सेवन करने से पेशाब खुल के होने लगता है 🌷 *गुरु भक्ति योग* 🌸
ॐ की महिमा के संबंध में अनेक ग्रंथ लिखे गये हैं और लिखे जाते रहेंगे, फिर भी ॐ की महिमा का पूरा वर्णन करना सम्भव नहीं है
सभी मजहबों में ॐकार की महानता का लाभ उठाने का प्रयास किया गया है | बौद्ध धर्म ने इस ॐकार को अत्यंत आदर से स्वीकारा और लाभ लिया है : ‘ओं मणिपद्मे हूं |’ जो ॐ ह्रदयरपी गुहा में मणि कि नाई चमकता है उसे हमारा नमन है ! जैन ‘णमो अरिहंताणं | णमो सिद्धाणं |….’ आदि णमोकार मंत्र का उच्चारण करते हैं | मुसलमानों ने ॐकार को आमीन-आमीन… करके उसके दूसरे रूप को बनाकर फायदा लिया | ‘1 ओंकार…’ करके सिख भाइयों ने फायदा लिया, गुरुओं ने फायदा लिया तो ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय |’ करके वैष्णवों ने , ‘ॐ नम: शिवाय |’ करके शैवों ने फायदा लिया | ॐकार कि महिमा सभी धर्मों ने , सभी सम्प्रदायों ने स्वीकार की है
*जो संसार का रक्षण करता है, जो संसार को गति देता है और सदा रहता है, प्रलय के बाद भी जो ज्यों-का- त्यों रहता है उस सच्चिदानंद को ‘अकालपुरुष’ वादी ‘अकाल’ कहते हैं, सांख्यवादी ‘पुरुष’ कहते हैं, भगवतवादी ‘भगवान’ कहते हैं, प्रीतिवादी ‘प्रेमास्पद’ कहते हैं | उस परमेश्वर की स्वाभाविक ध्वनि है ॐकार दूसरे सारे शब्द आहत से पैदा होते है परंतु ॐकार अनहद है, टकराव से नहीं, बेटकराव सहज स्फुरित होता है | ॐकार के बिना के जो मंत्र हैं वे प्राय: अपूर्ण और अधूरे माने जाते हैं | ॐकार पूर्णता देनावाला है | ॐकार मंत्र मंत्रों को मंत्र बनानेवाली स्वीकृति सत्ता है *इससे 3 दिन में मनोरथ होने लगेंगे पुरे*
गोपथ ब्राह्मण’ में आया है कि जो ब्राह्मण ( ब्रह्म-परमात्मा को पाने का प्रयास करनेवाले) केवल ३ रात्रि उपवास (अनाहार) करके पूर्वाभिमुख होकर कुशासन पर बैठ के ॐकार का जप करे, मौन रहे तो वह मनोवांछित पद, मनोवांछित वस्तु और मनोवांछित परिस्थिति को प्राप्त हो जाता है | अधिक जप न करे तो कोई हर्ज नहीं, केवल हजार बार जप हो जायेगा रोज तो भी चल जायेगा | माला गिनतीपूर्वक जपे और प्रेमपूर्वक अर्थसहित जपे तो उसके मनोरथ पूर्ण होने लगते हैं
ॐकार कि उपासना कितनी महत्त्वपूर्ण !* *गरुड़ पुराण के आचार कांड में लिखा है कि ‘ॐकार कि उपासना से राष्ट्र की अभिवृद्धि होती है और योग से राजा वृद्धि को प्राप्त करते हैं तथा उसे किसी भी प्रकार कि व्याधियाँ बाँध नहीं सकतीं
जो भी व्यक्ति ॐकार की उपासना करता है वह रोगरहित और समृद्ध होता है | ॐकार कि उपासना कितनी महत्त्वपूर्ण है ! थोड़ी ॐकार- उपासना की रीत जानकर अगर आप आधा घंटा शुरू करो फिर पौना घंटा, एक घंटा, दो घंटा करो तो कहना ही क्या है ! लेकिन जितना संसार के लिए आप परिश्रम करते हैं, माथापच्ची करते हैं, घुटने टेकते हैं उसका दसवाँ हिस्सा भी यह परिश्रम का मार्ग नहीं है और अनंत गुना फल हो जायेगा, भगवान की उपासना में इतना प्रभाव है
*_स्नातं तेन सर्व तीर्थ…… उसने सारे तीर्थों में नहा लिया. दातं तेन सर्व दानं…… उसने सब कुछ दान कर लिया, कृतं तेन सर्व यज्ञं….. उसने सारे यज्ञ कर लिये, येन क्षणं मन: ब्रह्मविचारे स्थिरं कृतम | जिसने क्षणभर के लिए भी मन ब्रह्म-परमात्मा में स्थित किया हो
ॐ ब्रह्म-परमात्मा का स्वाभाविक नाम है | एक होती है खोज और दूसरा होता है निर्माण | खोज उसीकी होती है जो पहले है | निर्माण उसीका होता है जो पहले से नहीं है | आदिनारायण के पहले यह ॐकार मंत्र था तभी शास्त्रों ने कहा कि भगवान नारायण ने इस मंत्र की महिमा खोजी
ॐकार मंत्र बीजमन्त्र माना जाता है | जैसे पृथ्वी में जैसा बीज बोओं वैसा फल मिलता है, ऐसे ही इस बीजमंत्र से वैराग्य, भगवदभक्ति, परमात्मप्रीति, विद्या, शांति ….. चाहे जो माँगो, वह देर-सवेर फलता है | और केवल इससे इसीको माँगो – भगवान को माँगो तो वह संकल्प भी फलता है | इस मंत्र के तो इष्टदेव ही अन्तर्यामी परमात्मा हैं | सबके अंदर अनुस्यूत जो सत्तास्वरुप परमेश्वर हैं वे इसके इष्टदेव हैं, मंत्र के देवता हैं |
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।

