
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 05 फरवरी 2026
05 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का परम पावन व्रत है। आज भगवान श्री गणेश जी की पूजा सनातनी महिलाओं – बहनों द्वारा अपने पुत्रों की दीर्घायु हेतु किया जाता है। आज शाम को गणपति पूजन के उपरांत रात्रि चंद्रमा के निकलने पर उन्हें देखकर अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलती है। आप सभी सनातनियों को “संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
*गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए। *गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
*गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । *इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 12:22 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 10:57 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं और स्वामी ग्रह शुक्र हैं। इसके अधिष्ठाता देवता अर्यमन हैं,
⚜️ योग – सुकर्मा योग 12:03 AM तक, उसके बाद धृति योग
⚡ प्रथम करण : बव 12:10 PM तक
✨ द्वितीय करण : बालव 12:22 AM तक, बाद कौलव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:50:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:40:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 29:22 पी एम से 30:15 पी एम तक
🌆 प्रातः सन्ध्या : 29:49 पी एम से 07:07 ए एम तक
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:57 पी एम तक
✡️ विजय मुहूर्त : 14:25 पी एम से 15:08 पी एम तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 18:01 पी एम से 18:27 पी एम तक
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 18:03 पी एम से 19:22 पी एम तक
💧 अमृत काल – दोपहर 3:32 बजे से शाम 5:11 बजे तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : 24:09 पी एम से 25:01 पी एम तक
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – द्विजप्रिय संकष्टी/ गणेश संकष्टी चतुर्थी/ चंद्रोदय 09.48/ भारतीय योगाचार्य महर्षि महेश योगी स्मृति दिवस, कवि जानकी वल्लभ शास्त्री जन्म दिवस, बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन जन्म दिवस, राष्ट्रीय मित्र के साथ स्नान दिवस, भारतीय क्रिकेटर भुवनेश्वर कुमार सिंह जन्म दिवस, संविधान दिवस, विश्व नुटेला दिवस, नेशनल गर्ल एंड वुमेन स्पोर्ट डे, राष्ट्रीय बालिका एवं महिला खेल दिवस, राष्ट्रीय मित्र के साथ स्नान दिवस, कश्मीर एकजुटता दिवस, राष्ट्रीय मौसम विज्ञानी दिवस, सिखों के गुरु राय सिंह जयन्ती, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)।
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
यानी समुद्री नमक नकारात्मकता को सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है।
*उपाय: घर के कोनों में या बाथरूम में एक कांच की कटोरी में समुद्री नमक भरकर रखें और इसे हर हफ्ते बदल दें। साथ ही, हफ्ते में कम से कम एक बार विशेषकर शनिवार को पानी में नमक मिलाकर पोछा लगाएं। इससे घर की दूषित ऊर्जा साफ होती है। *कपूर और दीपक का नियम घर में अग्नि और सुगंध का संतुलन वास्तु दोषों को शांत करता है।
*उपाय: प्रतिदिन सुबह और शाम को कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इसके अलावा, घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में घी का दीपक जलाने से घर में देवदोष और वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है। *ईशान कोण की सफाई और जल कलश घर का उत्तर-पूर्व कोना यानी ईशान कोण सबसे पवित्र माना जाता है। यदि यहां कोई भारी सामान या गंदगी हो, तो गंभीर वास्तु दोष उत्पन्न होता है।
उपाय: इस कोने को हमेशा साफ और खाली रखें। यहां एक तांबे के लोटे में गंगाजल या शुद्ध जल भरकर रखें। यदि संभव हो, तो यहां एक छोटा सा इनडोर वाटर फाउंटेन या एक्वेरियम भी रखा जा सकता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बेहतर नींद में सहायक
तनाव और थकान दूर होने से मन शांत होता है।
यह मस्तिष्क को आराम देता है, जिससे रात में गहरी और आरामदायक नींद आने में मदद मिलती है।
तलवों पर मालिश से रक्त वाहिकाओं (blood vessels) में रक्त का प्रवाह बढ़ता है।
बेहतर रक्त संचार से पैरों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे पैरों की सूजन और दर्द में कमी आती है।
आयुर्वेद और रिफ्लेक्सोलॉजी (Reflexology) के अनुसार, पैरों के तलवे में कुछ खास बिंदु आंखों से जुड़े होते हैं।
मालिश की क्रिया से वात दोष (जो दर्द और सूखापन का कारण बनता है) संतुलित होता है। इस तरह, यह शरीर में तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने में मदद करती है।
यह तलवों की सूखी और फटी हुई त्वचा को नरम बनाने में भी मदद करती है।
मालिश को करने के लिए आप घी या कोई भी प्राकृतिक तेल (जैसे नारियल तेल) का उपयोग कर सकते हैं। यह बहुत ही सरल और प्रभावी तरीका है अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का।
🧪 आरोग्य संजीवनी 🩸
स्त्री में धातु रोग होने के मुख्य कारण
पाचन तंत्र की कमजोरी (कमज़ोर अग्नि) जब खाना ठीक से नहीं पचता, तो शरीर पोषक तत्वों को सही धातु में नहीं बदल पाता।
नतीजा – धातुओं का क्षय और अनावश्यक स्राव।*
➡️ गैस, अपच, कब्ज वाली महिलाओं में यह समस्या ज़्यादा दिखती देती है।
बार-बार मानसिक तनाव चिंता, डर, ग़ुस्सा, उदासी सीधे हार्मोन और धातुओं को प्रभावित करते हैं।
➡️ लगातार तनाव से:
योनि स्राव बढ़ जाता है
शरीर थका-थका रहता है
चक्कर, घबराहट हो सकती है
हार्मोन असंतुलन पीरियड्स की अनियमितता, PCOD, थायरॉइड जैसी स्थितियाँ भी धातु रोग का कारण बन सकती हैं।
➡️ हार्मोन बिगड़ते ही शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है।
अत्यधिक कमजोरी या खून की कमी
जिन स्त्रियों में: हीमोग्लोबिन कम होता है
बार-बार उपवास
कम खाना
उनमें धातु जल्दी क्षीण होती है।
प्रसव या गर्भपात के बाद
डिलीवरी के बाद अगर शरीर को पूरा आराम और पोषण न मिले, तो धातु की कमी होने लगती है
➡️ इसी कारण कई महिलाओं को बच्चे के बाद:
सफेद पानी
कमर दर्द
कमजोरी होने लगती है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌹
भीषयत्य् अपि धीरं माम् अन्धयत्य् अपि सेक्षणम् खेदयत्य् अपि सानन्दं तृष्णां कृष्णेव शर्वरी (16)
👉🏼 राम ने कहा:_
वस्तुस्थिति यह है कि जब मन लालसा से आक्रांत रहता है तो अज्ञान के अंधकार में असंख्य भूलें कर बैठता है। यह लालसा मन और हृदय के सद्गुणों और स्वभावजन्य शालीनता को चूस लेती है और मुझे कठोर तथा क्रूर बना देती है। अज्ञान के अंधकार में यह चुड़ैल रूपी लालसा तरह-तरह के नृत्य करती है।
यद्यपि मैं लालसा को संयत करने के लिए तरह-तरह के उपाय करता हूँ परंतु वह क्षण भर में ही मुझ पर अपना अधिकार जमा लेती है और मुझ असहाय को उसी प्रकार भटका देती है जिस प्रकार आँधी एक तिनके को उड़ा ले जाती है। जब भी अनासक्ति आदि गुणों के विकसित होने की आशा मन में जगती है तब लालसा उस आशा को उसी प्रकार काट देती है जिस प्रकार चूहा धागे को काट देता है। और इस प्रकार मैं विवश होकर लालसा के चक्र में फँसकर चक्कर खाने लगता हूँ। जाल में फँसे पक्षी की तरह हम असहाय हो जाते हैं। यद्यपि पक्षी की तरह हमारे पास भी पंख होते हैं और हम आत्मज्ञान रूपी अपने गृह या ध्येय तक उड़ान भी भर सकते हैं। भले ही हम अमृत का घूँट क्यों न पी लें यह लालसा कभी तुष्ट नहीं होती। इस लालसा की एक खूबी यह भी है कि इसकी कोई एक दिशा नहीं होती। एक क्षण में तो यह मुझे एक दिशा में दौड़ाती है और दूसरे ही क्षण मुझे दूसरी दिशा में दौड़ने के लिए विवश करती है। इस प्रकार यह मुझे पागल घोड़े की तरह दौड़ा-दौड़ाकर मारती है। यह पुत्र, मित्र, पत्नी, भाई-भतीजों आदि का विशाल जाल हमारे सामने फैलाए रहती है।
यद्यपि मैं वीर हूँ यह लालसा मुझे भीरु बना देती है, यद्यपि दृष्टि-संपन्न हूँ यह मुझे अंधा बना देती है, यद्यपि मैं आनंदस्वरूप हूँ यह मुझे दयनीय बना देती है– लालसा भयावह चुड़ैल के समान है।
यही भयावह चुड़ैल रूपी लालसा हमारे बंधन और दुर्भाग्य के लिए उत्तरदायी है। यह मनुष्य का हृदय तोड़ देती है और उसमें भ्रांति उत्पन्न कर देती है। इस चुड़ैल द्वारा पकड़े हुए होने के कारण मनुष्य उन सुखों को भी प्राप्त नहीं कर पाता जो उसकी पहुँच के अंदर होते हैं। यद्यपि ऐसा प्रतीत होता है कि यह लालसा सुख के लिए है परंतु यह न तो सुख प्राप्त करा पाती है और न जीवन को सफल बना पाती है। इसके विपरीत यह व्यर्थ की भाग-दौड़ में प्रवृत्त करती है और हर तरह के अमंगल को न्योता दे डालती है। जीवन रूपी रंगमंच पर अनेक स्थितियाँ विभिन्न अभिनेताओं के रूप में अभिनय करती हैं परंतु यह लालसा बूढ़ी अभिनेत्री की तरह कुछ भी उत्तम और शुभ करने में असमर्थ रहती है। अपना किरदार निभाने में विफल रहती है और हर मोड़ पर मज़ा किरकिरा कर देती है। तो भी यह मंच पर अपना भद्दा नाच दिखाने से बाज़ नहीं आती।
लालसा एक क्षण आकाश में ले जाती है और अगले ही क्षण पाताल में पटक देती है। यह सदा व्यग्र रहती है। कारण यह कि यह मन की रिक्तता की उपज है। मन में ज्ञान का प्रकाश एक क्षण के लिए चमकता है परंतु अगले ही क्षण भ्रम सामने खड़ा हो जाता है। ऋषि-मुनि इसे आत्मज्ञान की तलवार से काटने में सफल होते हैं।
•••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤••••
⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

