
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 21 फरवरी 2026
21 फरवरी 2026 दिन शनिवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्थी तिथि है। आज वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। इस चतुर्थी को उड़ीसा में संतचतुर्थी भी कहा जाता है। आप अपने पुत्रों की कुशलता – संपन्नता – सुख एवं आरोग्य हेतु सनातनी माताओं को दिनभर उपवास के उपरांत सायंकाल में श्रीगणेश जी की पूजा के बाद उगते चंद्रमा को अर्घ्य देकर (समय 21.19 पी एम) देकर उपवास खोलना चाहिए। आप रवि योग एवं यायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “अंगारक वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की” हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयां।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। *शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल*
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शनिवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 01:01 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र रेवती 07:07 PM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध ग्रह है। और इसके अधिष्ठाता देवता पूषा (पोषण करने वाले देवता) हैं।
⚜️ योग – शुभ योग 03:50 PM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि 01:01 PM तक
✨ द्वितीय करण : बव 12:07 AM तक, बाद बालव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:38:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:54:00
👸🏻 ब्रह्मा मुहूर्त : शाम 29:13 मिनट से शाम 30:04 बजे तक
🌇 प्रातः सन्ध्या शाम 29:38 बजे से शाम 06:54 तक
🌟 अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:12 मिनट से दोपहर 12:58 तक
✡️ विजय मुहूर्त दोपहर 14:28 मिनट से दोपहर 15:14 तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त शाम 18:13 मिनट से 18:38 शाम तक
🏙️ सायाह्न सन्ध्या शाम 18:15 मिनट से शाम 19:31 तक
💧 अमृत काल शाम16:49 मिनट से शाम 18:21 तक
🗣️ निशिता मुहूर्त 24:09 मिनट से शाम 25:00 तक
❄️ रवि योग सुबह 06:54 मिनट से शाम 19:07 तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विनायक चतुर्थी/ संतचतुर्थी (उड़ीसा)/ पंचक समाप्ति् 19.06/ ढुण्ढिराज चतुर्थी/ भद्रा/ पञ्चक/ गण्ड मूल/ रवि योग/ स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ नारायण लवांडे जयन्ती, मध्य प्रदेश की भूतपूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद सेठी पुण्य तिथि, राष्ट्रीय उबले मूंगफली दिवस, राष्ट्रीय स्टिकी बन दिवस, राष्ट्रीय अनाज-मुक्त दिवस, राष्ट्रीय देखभालकर्ता दिवस, ब्रेकअप दिवस, भाषा शहीद दिवस, मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, सोते समय अपने पास कभी भी पर्स या बटुआ नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से हर समय पैसों से संबंधित चिंता बनी रहती है और मानसिक उलझन पैदा होता है। आप सोते समय पैसों को किसी अलमारी या अन्य किसी सेफ जगह पर रख सकते हैं। किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जैसे मोबाईल फोन या घड़ी भी अपने पास रखकर नहीं सोना चाहिए। अपनी पढ़ाई-लिखाई से संबंधित चीज, अखबार या किताब को अपने तकिए के नीचे नहीं रखना चाहिए। इससे विद्या का अपमान होता है।
*सेहत पर प्रभाव आचार्य श्री गोपी राम के शास्त्र के अनुसार, अपने सिरहाने के पास या बेड के नीचे कभी भी जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए। हम घर के बाहर यही जूते-चप्पल पहनकर जाते हैं और लौटते समय हमारे साथ कई जगहों की नकारात्मक ऊर्जा और गंदगी भी साथ ले आते हैं। इससे सेहत पर नेगेटिव इफेक्ट पड़ता है। वास्तु शास्त्र में ये थी चर्चा रात को सोते समय कुछ चीज़ों से दूर रहने के बारे में। उम्मीद है आप भी इस वास्तु टिप्स को अपनाकर जरूर लाभ उठाएंगे। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है । *बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
*चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है । *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।
*प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है । *रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा
*दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए। *जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
*सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है 🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
*आंत हमारे पाचन तंत्र का ऐसा भाग है जो हमारे शरीर से अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों का स्राव के लिए जिम्मेदार है। यह पानी और नमक को आवशोषित कर इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को मेनटेन करता है और शरीर को स्वस्थ्य बनाता है. यह मलत्याग के साथ ही विषाक्त और अपशिष्ठ पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। लेकिन अगर आंतों की सफाई ठीक तरह से न हो तो आपको तमाम तरह की बिमारियां,जैसे कब्ज, अपच,, थकान, दस्त, दृष्टि समस्याओं, एलर्जी, सिर दर्द समेत गुर्दे और लीवर संबंधी बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है।
*आंत को साफ रखने के लिए आज हम आपको ऐसे जादुई ड्रिंक के बारे में बता रहें हैं जो आपके लिए बहुत ही कारगर साबित होगी. अधिक जानकारी के लिए देखें विडियो और फिर लिखित जानकारी पढ़े ! *आंतों की सफाई के लिए पानी एक जादुई औषधि है। प्रतिदिन अगर आप 8 से 10 ग्लास पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है। इसकी जगह पर आप जूस का भी सेवन कर सकते हैं। पानी हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम को दुरूस्त रखता है और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है।
*शहद औषधीय गुणों से भरा होता है। यह हमारी आंतों की सफाई करने में मदद करता है। गरम पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह पीने से पेट की गंदगी साफ होती है। शरीर स्वस्थ रहता है। *एप्पल जूस से आप अपने दिन की शुरूआत कर सकते हैं। नियमित रूप से एप्पल जूस पीने से आंतें स्वस्थ्य रहती हैं। इसमें आप एक चम्मच लेमन जूस भी मिला सकते हैं।
*शरीर के विषाक्त को निकालने के लिए एलोवेरा अच्छी औषधि है। यह शरीर को हाइड्रेट रखता है। इस जूस को प्रतिदिन सुबह पानी के साथ ले सकते हैं। यह कई तरह से हमारे शरीर को फायदा पहुंचाता है। *दही आंत और पाचन तंत्र के लिए बेहतरीन खाद्य पदार्थ है। जिन्हें आंत संबंधी परेशानी रहती है उन्हें अक्सर दही खाने के लिए कहा जाता है। यह डायरिया जैसी परेशानी से दूर रखता है।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से ऐसे गूढ़ ज्ञान देने का अनुरोध किया जो संसार में किसी भी जीव को प्राप्त न हो. वह अमरत्व का रहस्य प्रभु से सुनना चाहती थीं.
*अमरत्व का रहस्य किसी कुपात्र के हाथ न लग जाए इस चिंता में पड़कर महादेव पार्वती जी को लेकर एक निर्जन प्रदेश में गए. *उन्होंने एक गुफा चुनी और उस गुफा का मुख अच्छी तरह से बंद कर दिया. फिर महादेव ने देवी को कथा सुनानी शुरू की. पार्वती जी थोड़ी देर तक तो आनंद लेकर कथा सुनती रहीं.
*जैसे किसी कथा- कहानी के बीच में हुंकारी भरी जाती है उसी तरह देवी काफी समय तक हुंकारी भरती रहीं लेकिन जल्द ही उन्हें नींद आने लगी. *उस गुफा में तोते यानी शुक का एक घोंसला भी था. घोसले में अंडे से एक तोते के बच्चे का जन्म हुआ. वह तोता भी शिव जी की कथा सुन रहा था.
*महादेव की कथा सुनने से उसमें दिव्य शक्तियां आ गईं. जब तोते ने देखा कि माता सो रही हैं. कहीं महादेव कथा सुनाना न बंद कर दें इसलिए वह पार्वती की जगह हुंकारी भरने लगा. *महादेव कथा सुनाते रहे. लेकिन शीघ्र ही महादेव को पता चल गया कि पार्वती के स्थान पर कोई औऱ हुंकारी भर रहा है. वह क्रोधित होकर शुक को मारने के लिए उठे।
*शुक वहां से निकलकर भागा. वह व्यास जी के आश्रम में पहुंचा. व्यास जी की पत्नी ने उसी समय जम्हाई ली और शुक सूक्ष्म रूप धारण कर उनके मुख में प्रवेश कर गया. *महादेव ने जब उसे व्यास की शरण में देखा तो मारने का विचार त्याग दिया. शुक व्यास की पत्नी के गर्भस्थ शिशु हो गए. गर्भ में ही इन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का सम्यक ज्ञान हो प्राप्त था.
*शुक ने सांसारिकता देख ली थी इस लिए वह माया के पृथ्वी लोक की प्रभाव में आना नहीं चाहते थे इसलिए ऋषि पत्नी के गर्भ से बारह वर्ष तक नहीं निकले. *व्यास जी ने शिशु से बाहर आने को कहा लेकिन वह यह कहकर मना करता रहा कि संसार तो मोह-माया है मुझे उसमें नहीं पड़ना. ऋषि पत्नी गर्भ की पीड़ा से मरणासन्न हो गईं.
*भगवान श्री कृष्ण को इस बात का ज्ञान हुआ. वह स्वयं वहां आए और उन्होंने शुक को आश्वासन दिया कि बाहर निकलने पर तुम्हारे ऊपर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा. *श्री कृष्ण से मिले वरदान के बाद ही शुक ने गर्भ से निकल कर जन्म लिया. जन्म लेते ही शुक ने श्री कृष्ण और अपने पिता-माता को प्रणाम किया और तपस्या के लिये जंगल चले गए
*व्यास जी उनके पीछे-पीछे ‘पुत्र !, पुत्र कह कर पुकारते रहे, किन्तु शुक ने उस पर कोई ध्यान न दिया. व्यास जी चाहते थे कि शुक श्रीमद्भागवत का ज्ञान प्राप्त करें. *किन्तु शुक तो कभी पिता की ओर आते ही न थे. व्यास जी ने एक युक्ति की. उन्होंने श्री कृष्ण लीला का एक श्लोक बनाया और उसका आधा भाग शिष्यों को रटा कर उधर भेज दिया जिधर शुक ध्यान लगाते थे.
एक दिन शुकदेव जी ने भी वह श्लोक सुना. वह श्री कृष्ण लीला के आकर्षण में खींचे सीधे अपने पिता के आश्रम तक चले आए.
पिता व्यास जी से ने उन्हेंश्रीमद्भागवत के अठारह हज़ार श्लोकों का विधि वत ज्ञान दिया. शुकदेव ने इसी भागवत का ज्ञान राजा परीक्षित को दिया, जिस के दिव्य प्रभाव से परीक्षित ने मृत्यु के भय को जीत लिया।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।


