सिलवानी में ‘सांदीपनी’ स्कूल भवन बना सपना: नए सत्र में भी बच्चों को नहीं मिली आधुनिक सुविधाएं

सिलवानी। प्रदेश भर के शासकीय विद्यालयों में बुधवार से नए शिक्षा सत्र की शुरुआत उत्साह और उल्लास के साथ हो गया। प्रवेश उत्सव के तहत विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और नए सत्र की खुशियां मनाई गईं। लेकिन सिलवानी विकासखंड स्थित ‘सांदीपनि (पूर्व सीएम राइज)’ विद्यालय के सैकड़ों छात्रों के लिए यह उत्सव फीका साबित हुआ।
करीब तीन वर्षों से निर्माणाधीन इस विद्यालय का नया भवन अब तक तैयार नहीं हो पाया है, जिससे छात्रों को पुराने और भवन में ही पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
तीन साल बाद भी अधूरा 44 करोड़ का प्रोजेक्ट
वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ‘सीएम राइज’ योजना के तहत सिलवानी में इस विद्यालय के लिए 44 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। उद्देश्य था कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों जैसी उच्च स्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
हालांकि, मुख्यमंत्री बदलने के बाद योजना का नाम बदलकर ‘सांदीपनि’ कर दिया गया, लेकिन निर्माण कार्य की गति पर इसका कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ा। जिम्मेदार निर्माण कंपनी, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते भवन अब तक अधूरा है।
अभावों में पढ़ाई को मजबूर 2000 विद्यार्थी
वर्तमान में इस विद्यालय में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक लगभग 2000 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि उपलब्ध कक्षों की संख्या मात्र 38 है।
कई कक्षों की छत पर टिन की चादरें डाली गई हैं
बरसात के मौसम में छतों से पानी टपकता है
बैठने और पढ़ाई के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है
इन परिस्थितियों में विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है।
सुविधाओं के वादे अधूरे
सरकार द्वारा इस विद्यालय को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने का दावा किया गया था, जिसमें शामिल थे:
स्मार्ट क्लासरूम आधुनिक प्रयोगशालाएं विशाल खेल मैदान स्विमिंग पूल
लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि छात्रों को अभी तक एक सुरक्षित और व्यवस्थित भवन भी उपलब्ध नहीं हो पाया है।
जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि तीन साल का लंबा समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक छात्र-छात्राएं इन अभावों के बीच पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे और उन्हें उनका हक—एक बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण—मिल पाएगा।
इस संबंध में हर्षल चौधरी, एसडीएम सिलवानी का कहना है कि निर्माण एजेंसी एवं जिला कलेक्टर से बात करते है, निर्माण एजेंसी के जो अधिकारी है उनको बुलाकर शीघ्र अति शीघ्र निर्माण को पूर्ण कराया जायेगा।



