गैस की किल्लत ने बढ़ाए लकड़ी-कंडे के भाव, महिलाएं बना रहीं हैं चूल्हे पर खाना

शादियों में खोदी जा रही है भट्ठियां
सिलवानी । गैस की बढ़ती हुई किल्लत से लगता है कि अभी इससे निजात मिल पाना मुश्किल नजर आ रहा है। शादी ब्याह के माहौल के बीच गैस के लिए अफरी-तफरी मची हुई है। ऐसे में लोगों को लकड़ी-कंडे की याद आने लगी है। यही कारण है कि अब लोग गैस की जगह लकड़ी कंडे का उपयोग करने लगे है। खासकर शादी ब्याह में इसका प्रचलन बढ़ गया है। लकड़ी- कंडे की जैसे ही मांग बढ़ी ऐसे ही इसके भाव में भी काफी इजाफा हुआ है। दो माह पूर्व जब गैस की किल्लत नहीं थी तब जलाऊ लकड़ी का भाव 500 रुपए प्रति साईकिल था जो आज 700 रुपए प्रति साईकिल हो गया है। इसी तरह जो कंडे 5 रुपए प्रति नग से बिकते थे वो आज दोगुना हो गए है और 8 से 10 रुपए प्रति नग से बिकने लगे हैं।
शादी ब्याह में मेन्यू बदलने पड़े
हलवाई ने बताया कि पुराने दिनों की तरह अब भट्टी खोदना पड़ रही है। समय और मेहनत अधिक लग रही है तथा लागत भी अधिक आ रही है, लेकिन मजबूरी है हमारा व्यवसाय शादी ब्याह में भोजन बनाने का ठेका लेते हैं। टंकी के भाव दोगुने से तीनगुने हो गए है। घरेलू टंकी 1500 में मिल रही है। वहीं व्यवसायिक टंकी अपने रेट से ज्यादा में मिल रही है। इतना अधिक खर्च वहन कुछ लोग नहीं कर पाते हैं। यही कारण है कि पुराने दिनों की तरह फिर पुनः लकड़ी की भट्टी का दौर शुरू हो चुका है और वहीं रोटी और बाटी चूल्हे पर कंडे से बनने लगी है। गैस की किल्लत के कारण शादी ब्याह वालों ने अपने मेन्यू तक बदल दिए और दाल बाफला का अधिक चलन रहा है। क्योंकि दाल बाफले बड़ी आसानी से कंडे में बन जाते है और गैस की बचत हो जाती है तथा रोटी चूल्हे पर बन जाती है। कुछ लोगों ने अपने घर के आंगन में चूल्हा चौका बना लिया।



