भविष्य के आशियाने: रायसेन में ‘ग्रीन हाउस’ क्रांति की शुरुआत;

सी.एस.ई.बी. तकनीक से कम लागत में बनेंगे फौलादी घर
रिपोर्टर प्रशांत जोशी
रायसेन । ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मध्य प्रदेश अब एक ऐसी तकनीक की ओर कदम बढ़ा रहा है जो न केवल सस्ती है, बल्कि पर्यावरण और मजबूती के मामले में भी बेजोड़ है। राज्य शासन की दूरदर्शी सोच के अनुरूप, रायसेन जिले में सी.एस.ई.बी. (Compressed Stabilized Earth Block) तकनीक के माध्यम से किफायती और आधुनिक आवास निर्माण का अभियान “मिशन मोड” पर प्रारंभ हो गया है। जिले की प्रत्येक जनपद पंचायत को इस नवीन तकनीक से कम से कम 25-25 मॉडल आवास तैयार करने का गौरवशाली लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
राज्य स्तरीय विजन: तकनीक और प्रगति का संगम
बीते 8 मई 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इस क्रांति की रूपरेखा तैयार की गई। जिला पंचायत रायसेन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमल सोलंकी के मार्गदर्शन में जिला आवास प्रभारी विनोद बघेल एवं सुनील विश्वकर्मा ने इस नई पहल को जिले में लागू करने की कमान संभाली है। इस बैठक ने जिले के प्रशासनिक अमले में एक नया उत्साह फूंक दिया है, जिसमें सात जनपदों के समन्वयकों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने इस संकल्प को साकार करने की शपथ ली।
उदयपुरा का ‘मॉडल’ प्रयास: शोध से संवाद तक
इस अभियान में जनपद पंचायत उदयपुरा ने एक मिसाल पेश की है। प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी दानिश अहमद खान के नेतृत्व में, प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रमोद लोधी ने इस तकनीक को केवल एक सरकारी लक्ष्य न मानकर एक “मिशन” के रूप में अपनाया।
प्रमोद लोधी ने स्वयं भोपाल, होशंगाबाद, जबलपुर और अन्य अग्रणी जिलों के तकनीकी विशेषज्ञों से संपर्क साधा और निर्माण लागत से लेकर ईंटों की मजबूती तक का गहन अध्ययन किया। इस समर्पण का परिणाम यह रहा कि उन्होंने उदयपुरा के 25 चयनित हितग्राहियों को न केवल प्रेरित किया, बल्कि उन्हें इस तकनीक से शीघ्र मकान बनाने के लिए तैयार किया ।
क्यों चुनें सी.एस.ई.बी. (CSEB) ब्लॉक? – घर नहीं, एक वरदान
यह तकनीक उन सभी के लिए एक सीख है जो कम खर्च में सपनों का महल बनाना चाहते हैं:
अत्यधिक किफायती: स्थानीय मिट्टी का उपयोग होने के कारण परिवहन और सामग्री की लागत में भारी बचत।
मौसम के अनुकूल: इन ब्लॉकों से बने घर ‘नेचुरल इंसुलेटर’ का काम करते हैं—गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में आरामदायक।
फौलादी मजबूती: उच्च दबाव ( से निर्मित ये ब्लॉक पारंपरिक ईंटों से कहीं अधिक टिकाऊ और भूकंपरोधी होते हैं।
पर्यावरण हितैषी: इन्हें पकाने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे वायु प्रदूषण शून्य होता है और पेड़ों की कटाई रुकती है।
एकजुट प्रयास: टीम रायसेन की सक्रियता
इस अभियान को गति देने में जिले के जांबाज अधिकारियों की टीम निरंतर सक्रिय है:
गैरतगंज: संजय चौरसिया, बाड़ी: आशुतोष आचार्य एवं राजेश धाकड़, साँची: मोनू गुप्ता एवं कंचन तिवारी, सिलवानी: शुभम गौर, बेगमगंज: अभिषेक परमार एवं अर्चा सिंह ओबेदुल्लागंज: अजय सिंह
आह्वान: अपनाएं आधुनिकता, बचाएं लागत
रायसेन जिले का यह प्रयास अन्य जिलों के लिए एक मार्गदर्शक साबित हो रहा है। श्री प्रमोद सिंह लोधी द्वारा प्रेरित किए गए 25 हितग्राही अब अपने आवासों का निर्माण कार्य अत्यंत उत्साह के साथ प्रारंभ कर रहे हैं। यह तकनीक न केवल शासन के लक्ष्यों की पूर्ति है, बल्कि हर उस ग्रामीण परिवार के लिए एक उपहार है जो अपनी गाढ़ी कमाई का सही मूल्य और एक सुरक्षित भविष्य चाहता है।



