ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 18 मई 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾 *_आज का पंचाग_* 🧾                  
*सोमवार  18 मई  2026_*
*_महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।_*
☄️ *_दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*_सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
*_सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
*_जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
*_सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन –  उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – ज्यैष्ठ मास_*
🌘 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष_*
📆 *_तिथि – सोमवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 05:53 PM तक उपरांत तृतीया_*
✏️ *_तिथि स्वामी – द्वितीय तिथि (दूज) के स्वामी ब्रह्मा जी हैं, जिन्हें विधाता भी कहा जाता हैं, इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र रोहिणी 11:31 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – रोहिणी नक्षत्र के नक्षत्र स्वामी (शासक ग्रह) चंद्रमा हैं। और इसकेअधिष्ठाता देवता इस नक्षत्र के मुख्य देवता सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा हैं।_*
⚜️ *_योग – सुकर्मा योग 09:47 PM तक, उसके बाद धृति योग_*
⚡ *_प्रथम करण : बालव 07:46 AM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : कौलव 05:53 PM तक, बाद तैतिल 04:03 AM तक, बाद गर_*
🔥 *_सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक_*
⚜️ *_दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।_*
🤖 *_राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:28:20_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:06:43_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:06 ए एम से 04:47 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:27 ए एम से 05:29 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:50 ए एम से 12:45 पी एम_*
🔯 *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:34 पी एम से 03:29 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : सायं काल 07:05 पी एम से 07:26 पी एम_*
🎆 *_सायाह्न सन्ध्या : सायं काल 07:07 पी एम से 08:09 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : प्रातः काल 08:44 ए एम से 10:08 ए एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, मई 19 को 12:56 ए एम, मई 19 से 02:20 ए एम, मई 19_*
🌊 *_अमृत सिद्धि योग : प्रातः काल 11:32 ए एम से 05:28 ए एम, मई 19_*
🚓 *_यात्रा शकुन- सोमवार को मीठा दूध पीकर यात्रा करें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – रोहिणी व्रत/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ धनिष्ठानवक समाप्ति् 11 :32 के बाद/ मुस्लिम जिल्हेज मासारंभ/ अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस, विश्व एड्स वैक्सीन दिवस, मदर व्हिस्लर दिवस, राष्ट्रीय पनीर सूफ़ले दिवस, राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस, प्रसिद्ध धार्मिक गुरु जय गुरुदेव स्मृति दिवस, पोखरण परमाणु विस्फोट दिवस (1974), अभिनेत्री कमलाबाई रघुनाथराव गोखले स्मृति दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष – द्वितीय तिथि को कटोरी फल का तथा तृतीया तिथि है नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। द्वितीय तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीय तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी को बताया गया है। यह द्वितीय की तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीय तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।    
🪬 *_Vastu tips_* 🧿
बढ़ती आलोचना: जब कोई व्यक्ति आगे बढ़ने लगता है, तो कई लोग उसे समझ नहीं पाते। ऐसे समय में आलोचना और मजाक बढ़ने लगता है। ज्योतिष के अनुसार, यह संकेत हो सकता है कि आपकी ऊर्जा अब बदलाव की ओर बढ़ रही है और आप जीवन के नए चरण में प्रवेश करने वाले हैं।
*_करीबियों की बढ़ती दूरी: कई बार दोस्त, रिश्तेदार या करीबी लोग अचानक दूरी बनाने लगते हैं। यह स्थिति दुख जरूर देती है, लेकिन ज्योतिष में इसे आत्मनिर्भर बनने का समय माना गया है। यह दौर इंसान को अपनी असली ताकत पहचानने का मौका देता है।
*_रुकावटें और देरी: अगर लगातार मेहनत के बाद भी काम अटक रहे हों या हर योजना में देरी हो रही हो, तो इसे सिर्फ बुरा समय नहीं माना जाता। ज्योतिष के अनुसार यह समय व्यक्ति को धैर्य और सही फैसले लेने के लिए तैयार करता है।
*_अंदरूनी भरोसा: कई बार बाहर की परिस्थितियां तनाव पैदा करती हैं, लेकिन मन के अंदर एक अजीब सा भरोसा बना रहता है कि सब ठीक हो जाएगा। इसे अंतर्ज्ञान का संकेत माना जाता है। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार यह बड़े बदलाव और नई शुरुआत का इशारा हो सकता है।      
🎯 *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
खाने के बाद इलायची चबाने के फायदे पाचन एंजाइम सक्रिय होते हैं की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इलायची चबाने से पैनक्रियाटिक एंजाइम जैसे लिपेज, अमाइलेज और प्रोटीएज अधिक सक्रिय हो जाते हैं. ये एंजाइम भोजन को छोटे-छोटे भागों में तोड़ने में मदद करते हैं, जिससे पाचन आसान हो जाता है.
*_गैस, ब्लोटिंग और अपच में राहत की एक रिपोर्ट के अनुसार, इलायची एक प्राकृतिक कार्मिनेटिव है, जो गैस बनना कम करती है और पेट फूलने की समस्या में राहत देती है. अगर आपको भोजन के बाद अक्सर भारीपन महसूस होता है, तो इलायची चबाना फायदेमंद हो सकता है.
*_हार्टबर्न यानी सीने में जलन कम करे इलायची में मौजूद 1,8-सिनियोल, लिमोनीन और टर्पिनियोल जैसे कंपाउंड पेट की सूजन कम करते हैं. ये कंपाउंड पेट की लाइनिंग को शांत करते हैं, जिससे एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं.
*_मॉउथ फ्रेशनर की तरह काम करती है इलायची की खुशबू और उसके बीजों में मौजूद तेल सांसों की दुर्गंध को तुरंत कम करते हैं. इसके अलावा, इसमें मौजूद फाइबर दांतों की हल्की सफाई भी करता है.
*_लार बढ़ाती है इलायची चबाने से लार का उत्पादन बढ़ता है. लार की कमी होने पर मुंह में बदबू की समस्या बढ़ जाती है, इसलिए इलायची इस समस्या को कम करने में मदद करती है.   
🍋‍🟩 *आरोग्य संजीवनी_* 🍓
आक के पीले पत्ते पर घी चुपड कर सेंक कर अर्क निचोड़ कर कान में डालने से आधा सिर दर्द जाता रहता है। बहरापन दूर होता है। दाँतों और कान की पीड़ा शाँत हो जाती है।
*_आक के कोमल पत्ते मीठे तेल में जला कर अण्डकोश की सूजन पर बाँधने से सूजन दूर हो जाती है। तथा कडु़वे तेल में पत्तों को जला कर गरमी के घाव पर लगाने से घाव अच्छा हो जाता है। एवं पत्तों पर कत्था चूना लगा कर पान समान खाने से दमा रोग दूर हो जाता है। तथा हरा पत्ता पीस कर लेप करने से सूजन पचक जाती है।
*_कोमल पत्तों के धूँआ से बवासीर शाँत होती है। कोमल पत्ते खाय तो ताप तिजारी रोग दूर हो जाता है।
*_आक के पत्तों को गरम करके बाँधने से चोट अच्छी हो जाती है। सूजन दूर हो जाती है। आक के फूल को जीरा, काली मिर्च के साथ बालक को देने से बालक की खाँसी दूर हो जाती है।
*_दूध पीते बालक को माता अपनी दूध में देवे तथा मदार के फल की रूई रूधिर बहने के स्थान पर रखने से रूधिर बहना बन्द हो जाता है। आक का दूध लेकर उसमें काली मिर्च पीस कर भिगोवे फिर उसको प्रतिदिन प्रातः समय मासे भर खाय 9 दिन में कुत्ते का विष शाँत हो जाता है। परंतु कुत्ता काटने के दिन से ही खावे। आक का दूध पाँव के अँगूठे पर लगाने से दुखती हुई आँख अच्छी हो जाती है। बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से जाते रहते हैं। बर्रे काटे में लगाने से दर्द नहीं होता। चोट पर लगाने से चोट शाँत हो जाती है। जहाँ के बाल उड गये हों वहाँ पर आक का दूध लगाने से बाल उग आते हैं। तलुओं पर लगाने से महिने भर में मृगी रोग दूर हो जाता है। आक के दूध का फाहा लगाने से मुँह का लक्वा सीधा हो जाता है। आक की छाल को पीस कर घी में भूने फिर चोट पर बाँधे तो चोट की सूजन दूर हो जाती है। तथा आक की जड को दूध में औटा कर घी निकाले वह घी खाने से नहरूआँ रोग जाता रहता है।        
📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
       शनि और बृहस्पति के वक्री होने पर जीवन पर क्या उल्टा असर पड़ता है?
      *_वक्री शनि और बृहस्पति, शास्त्र का सत्य और वह व्यावहारिक तथ्य जो कोई नहीं बताता
       *_ज्योतिष में जब किसी की कुंडली में वक्री शनि या वक्री बृहस्पति दिखता है तो एक विशेष प्रकार का भय उत्पन्न होता है।
      *_परन्तु इससे पहले कि हम वक्री ग्रहों के फल की बात करें, एक बुनियादी तथ्य जानना ज़रूरी है जो अधिकांश ज्योतिषी कभी नहीं बताते।
👉🏼 *_पहले यह समझो, वक्री होना कितना सामान्य है
       *_ग्रह दो प्रकार के होते हैं। तीव्र गति वाले और मन्द गति वाले।
       *_बुध प्रतिवर्ष लगभग तीन बार वक्री होता है, परन्तु प्रत्येक बार केवल 21 दिनों के लिए। वर्ष के 365 दिनों में से बुध कुल मिलाकर लगभग 63 दिन वक्री रहता है। अर्थात् वर्ष का लगभग 17 प्रतिशत।
        *_शुक्र प्रत्येक 18 महीनों में एक बार वक्री होता है, लगभग 40 दिनों के लिए। यह वर्ष का मात्र 7 प्रतिशत है।
        *_मंगल प्रत्येक 26 महीनों में एक बार वक्री होता है, लगभग 60 दिनों के लिए। यह लगभग 9 प्रतिशत। अब शनि और बृहस्पति को देखिए। शनि प्रतिवर्ष लगभग साढ़े चार महीने वक्री रहते हैं, अर्थात् वर्ष का लगभग 37 प्रतिशत।
        *_बृहस्पति प्रतिवर्ष लगभग चार महीने वक्री रहते हैं, अर्थात् वर्ष का लगभग 33 प्रतिशत।
       *_इसका सीधा अर्थ यह है, जितने लोग इस पृथ्वी पर जन्मे हैं उनमें से लगभग एक तिहाई लोगों की कुंडली में शनि वक्री है। और लगभग उतने ही लोगों की कुंडली में बृहस्पति वक्री है।
         *_यह कोई दुर्लभ स्थिति नहीं है यह वह तथ्य है जो ज्योतिष की दुनिया में सबसे कम कहा जाता है, क्योंकि भय बेचना आसान है, सत्य बताना कठिन। तो फिर वक्री का अर्थ क्या है, शास्त्र क्या कहता है
        बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में वक्री ग्रह के विषय में कहा गया है:_*
*“वक्री बलाधिकः, परन्तु फलं विलम्बेन, आन्तरिकतया च गाढ़म्”_*
       *_वक्री ग्रह बल में अधिक होता है, परन्तु उसका फल विलम्ब से आता है और आन्तरिक रूप से अधिक गहरा होता है।
        *_यहाँ दो शब्द महत्वपूर्ण हैं। बलाधिकः, अर्थात् अधिक बलशाली। और आन्तरिकतया, अर्थात् भीतरी रूप से।वक्री ग्रह कमज़ोर नहीं होता। वह अलग तरीके से काम करता है।
       *_वक्री होने का खगोलीय सत्य जब कोई ग्रह वक्री दिखता है, तो वह वास्तव में पीछे नहीं जाता। यह एक दृश्य भ्रम है।
      *_जैसे दो गाड़ियाँ एक ही दिशा में चल रही हों, एक तेज़, एक धीमी। जब तेज़ गाड़ी धीमी को पार करती है तो धीमी गाड़ी पीछे जाती हुई दिखती है, जबकि वह आगे ही बढ़ रही होती है। पृथ्वी और अन्य ग्रहों के बीच यही होता है।
       *_प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्र, आर्यभटीय में, इस गति को स्पष्ट रूप से समझाया गया है। आर्यभट्ट ने लिखा है कि ग्रहों की वक्री गति पृथ्वी की अपेक्षाकृत तीव्र परिक्रमा के कारण उत्पन्न होने वाला दृश्य प्रभाव है।
       *_शास्त्र ने इस खगोलीय सत्य को जानते हुए भी वक्री ग्रह को महत्व दिया, क्योंकि पृथ्वी पर उस ग्रह की ऊर्जा का प्रवाह उस काल में भिन्न होता है। यह भिन्नता ही वक्री फल का आधार है।
*वक्री शनि, शास्त्र और व्यावहारिक सत्य फलदीपिका में आचार्य श्री गोपी राम ने कहा है:_*
“वक्रे शनौ, कर्मविलम्बः, आन्तरिक दृढ़ता च, फलं गाढ़तरम्”_*
        *_वक्री शनि में कर्म में विलम्ब होता है, परन्तु आन्तरिक दृढ़ता बढ़ती है और फल और अधिक गहरा होता है। वक्री शनि वाले जातकों में एक विशेष pattern होता है जो मैंने बार-बार देखा है।
       *_ये लोग बाहर से जो दिखाते हैं वह और भीतर से जो महसूस करते हैं, वह दोनों अलग होते हैं। शनि जो पाठ देना चाहते हैं, वह इन्हें बाहरी परिस्थितियों के माध्यम से कम और भीतरी संघर्ष के माध्यम से अधिक देते हैं।
       *_वक्री शनि का जातक अनुशासन को बाहर से नहीं, भीतर से सीखता है। इसीलिए इनके जीवन में सफलता देर से आती है, परन्तु जब आती है तो बहुत स्थायी रूप से। यह भी देखा है कि वक्री शनि वाले जातक पिछले जन्मों के अधूरे कर्तव्यों को इस जन्म में पूरा करने का बोझ लेकर आते हैं। जो काम वे छोड़ते हैं, वह उनका पीछा करता है।
*_सारावली में कहा गया है:_*
*_“वक्री ग्रहः पूर्वजन्मकर्मफलं, इहजन्मे प्रदाति”_*
       *_वक्री ग्रह पूर्वजन्म के कर्मों का फल इस जन्म में देता है। वक्री बृहस्पति, शास्त्र और व्यावहारिक सत्य बृहस्पति ज्ञान, गुरु, धर्म, सन्तान और विस्तार के कारक हैं।
       *_जब बृहस्पति वक्री होते हैं, तो इनका यह कारकत्व भीतर की ओर मुड़ जाता हैं*
*बृहज्जातक में वराहमिहिर ने कहा है:_*
*“वक्री गुरौ, ज्ञानं अन्तर्मुखम्, बाह्यप्रदर्शने विरक्तिः”_*
         *_वक्री बृहस्पति में ज्ञान अन्तर्मुखी हो जाता है और बाहरी प्रदर्शन से विरक्ति आती है।
        *_इसका व्यावहारिक अर्थ यह है, वक्री बृहस्पति वाले जातक बहुत जानते हैं परन्तु उसे व्यक्त करने में कठिनाई महसूस करते हैं। ये लोग परम्परागत धार्मिक या शैक्षणिक व्यवस्था से असहमत होते हैं, अपना एक अलग दर्शन रखते हैं।
       *_गुरु-शिष्य सम्बन्ध में इन्हें कठिनाई आती है। या तो इन्हें सही गुरु नहीं मिलता या फिर गुरु से सम्बन्ध जटिल होता है। सन्तान पक्ष में भी विलम्ब या जटिलता देखी जाती है।
       *_परन्तु जब वक्री बृहस्पति वाला जातक अपनी भीतरी समझ को किसी माध्यम से व्यक्त कर लेता है, लेखन, अध्यापन, या किसी वैकल्पिक मार्ग से, तब यही वक्री गुरु उन्हें असाधारण ज्ञान और प्रसिद्धि देता है।
      *_KP पद्धति में वक्री ग्रह KP पद्धति में वक्री ग्रह का Sub Lord देखा जाता है।
       *_यदि वक्री शनि या बृहस्पति का Sub Lord शुभ भावों, प्रथम, पञ्चम, नवम, दशम, को signify करे तो वक्री होने के बावजूद फल शुभ और दीर्घकालीन होता है।
       *_यदि Sub Lord षष्ठ, अष्टम या द्वादश को signify करे तो वक्री ग्रह की कठिनाइयाँ और गहरी हो जाती हैं।
      *_KP में यह भी देखा जाता है कि वक्री ग्रह जिस नक्षत्र में हो उसका स्वामी कहाँ बैठा है। वक्री ग्रह अपना फल अपने नक्षत्र स्वामी के भाव-संकेतों के अनुसार देता है, यह बात बहुत सटीक परिणाम देती है।
      *_एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक बात, जो बार-बार कही जानी चाहिए
       *_जब कोई ज्योतिषी कहता है “आपका शनि वक्री है, यह बहुत बुरा है”, तो यह अधूरी और भ्रामक बात है।
       *_याद रखिए, इस पृथ्वी पर जन्मे प्रत्येक तीन व्यक्तियों में से एक की कुंडली में शनि वक्री है। क्या हम यह मान लें कि एक-तिहाई मानवता दुर्भाग्यशाली है? यह ज्योतिष नहीं है, यह अज्ञान है।
       *_वक्री ग्रह का फल उसकी राशि से, भाव से, dispositor से, उस पर पड़ने वाली दृष्टियों से और KP में Sub Lord से तय होता है। केवल “वक्री है” कहकर भयभीत कर देना, यह ज्योतिष का सबसे बड़ा दुरुपयोग है।
        *_अन्त में मैं यही कहूंगा वक्री ग्रह एक संकेत है, यह नहीं कि जीवन कठिन होगा, बल्कि यह कि उस ग्रह से जुड़े विषयों में आपकी यात्रा भीतर से शुरू होगी। बाहर से नहीं।
      *_जो लोग वक्री ग्रहों को समझकर उनके साथ काम करना सीख लेते हैं, वे अक्सर उन लोगों से कहीं अधिक गहराई तक पहुँचते हैं जिनके वही ग्रह सीधे थे।
      *_शनि और बृहस्पति, दोनों ही गहराई के ग्रह हैं। वक्री होने पर वे उस गहराई को और भीतर ले जाते हैं।
       *_यह दण्ड नहीं। यह एक अलग प्रकार का निमन्त्रण है।
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही मनाया जाता है तथा किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्मा जी का पूजन आवश्यक करना चाहिए। वैसे तो मूहूर्त चिंतामणि आदि ग्रंथों के अनुसार द्वितीय तिथि अत्यंत शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परंतु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए श्रावण और भद्रपद की द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

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