
रिपोर्टर: सतीश मैथिल
सांचेत । धार्मिक दृष्टि से इस वर्ष का पुरुषोत्तम मास एक विशेष महासंयोग के साथ विदा होने जा रहा है। 15 जून को सोमवती अमावस्या के दिन अधिकमास पुरुषोत्तम मास का समापन होगा। अमावस्या का सोमवार को पड़ना इसे और अधिक पुण्यदायी बना रहा है। इसके अगले दिन 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष का आरंभ होगा और चार दिनों बाद 19 जून से विवाह समेत सभी मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो जाएगा। करीब एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन, मुंडन एवं अन्य शुभ संस्कार स्थगित रहे। अब शुभ मुहूर्तों की वापसी के साथ ही शहर से लेकर गांवों तक शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण शास्त्री ने बताया 19 जून से 12 जुलाई तक विवाह और अन्य मांगलिक कामों के लिए अनुकूल समय रहेगा। बाजारों में बढ़ी रौनक, बुक हुए विवाह स्थल
बाजारों में हलचल
वैवाहिक सीजन शुरू होने की आहट के साथ बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। सराफा, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फर्नीचर बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है। वहीं टेंट हाउस, कैटरिंग, बैंड-बाजा एवं मैरिज हॉल संचालकों ने बताया 19 जून से 12 जुलाई तक के अधिकांश शुभ मुहूर्तों की अग्रिम बुकिंग पहले ही हो चुकी हैं
धार्मिक स्थल की तैयारियां
धार्मिक स्थलों पर पुरुषोत्तम मास के समापन की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। एक माह तक चले मलमास मेले का समापन 15 जून को ध्वज विसर्जन के साथ होगा। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, हवन, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोमवती अमावस्या के कारण श्रद्धालुओं द्वारा पीपल पूजन, परिक्रमा, स्नान-दान और पितृ तर्पण का भी विशेष महत्व रहेगा।
आने वाले दिन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 19 जून से 12 जुलाई तक का समय शुभ एवं मांगलिक कार्यों के लिए उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 15 जुलाई को गुरु अस्त होने तथा 25 जुलाई देवशयनी एकादशी के प्रभाव से मांगलिक कामों पर फिर से विराम लग जाएगा। इसके बाद चातुर्मास आरंभ होने के साथ लगभग साढ़े चार महीने तक विवाह सहित अधिकांश शुभ संस्कार नहीं होंगे। धर्माचार्यों का मानना है कि पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यफलदायी है। ऐसे में 15 जून को मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ेगी। प्रमुख शुभ तिथियां : 15 जून- सोमवती अमावस्या, पुरुषोत्तम मास का समापन, स्नान-दान का महापर्व 16 जून- शुद्ध ज्येष्ठ मास एवं शुक्ल पक्ष का प्रारंभ 17 जून- रंभा तीज 18 जून- विनायकी चतुर्थी 19 जून- विवाह एवं मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त प्रारंभ 23 जून- महेश नवमी 25 जून- एकादशी व्रत 27 जून- प्रदोष व्रत 29 जून- पूर्णिमा, ज्येष्ठ मास का समापन


