हाईवे-45 पर आपात व्यवस्था फेल: 4 घंटे तक नहीं मिला शव वाहन,

NHAI की पेट्रोलिंग गाड़ी बनी सहारा
रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । सुल्तानपुर थाना क्षेत्र नेशनल हाईवे-45 पर केमवाली जंगल में जीजा-साली द्वारा आत्महत्या की घटना ने जिले की आपात व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। सुल्तानपुर से महज 15 किलोमीटर की दूरी होने के बाद भी मौके पर 4 घंटे तक शव वाहन नहीं पहुंच सका।
सुबह राहगीरों की नजर जंगल में पेड़ पर लटके दो शवों पर पड़ी तो तत्काल सुल्तानपुर पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर भीड़ जमा हो गई, लेकिन केवल तीन पुलिस जवान मौजूद थे। पुलिस ने शव वाहन को सूचना दी, पर चार घंटे तक कोई वाहन नहीं आया। मजबूरी में सड़क से गुजर रहे खाली पिकअप वाहनों को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई नहीं मिला।
आखिरकार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की गश्ती गाड़ी से ही दोनों शवों को सुल्तानपुर थाने भेजा गया।
मृतकों की पहचान हुई
मिली जानकारी के अनुसार मृतक युवक की पहचान रूपेश कुशवाहा के रूप में हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि वह बिकलपुर का रहने वाला है। उसके पिता का पहले ही देहांत हो चुका है, घर में माँ और बड़ा भाई राजू कुशवाहा हैं।
उसके साथ मृत मिली महिला उसकी साली बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार महिला की दो शादियां हो चुकी थीं। पहली शादी टूटने के बाद करीब एक-दो महीने पहले ही उसकी दूसरी शादी हुई थी। पैट्रोलिंग वाहन पहुंचने पर दोनों शवों को पेड़ से उतारकर सीधे सुल्तानपुर थाने लाया गया।
पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है।
सिस्टम पर सवाल
सवाल यह है कि जब नेशनल हाईवे पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, तब 15 KM की दूरी पर 4 घंटे तक शव वाहन न मिलना किसकी जिम्मेदारी है? अगर यहाँ कोई घायल तड़प रहा होता तो क्या होता? क्या हाईवे पर आपात सेवाएं सिर्फ कागजों पर हैं?



