धार्मिकमध्य प्रदेश

गोवर्धन पूजा से भाव-विभोर हुए भक्त श्रद्धालु

भैंसा खड़ पहाड़ में बह रही भागवत रूपी अमृतमयी गंगा
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान।  प्रकृति की अनुपम छटा से आच्छादित भैंसा खड़ पहाड़ इन दिनों श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य रस में सराबोर है।  चारों ओर पहाड़ों की मनोरम श्रृंखलाएं, हरियाली से सजा प्राकृतिक परिवेश और आध्यात्मिक वातावरण के बीच बह रही श्रीमद्भागवत कथा रूपी अमृतमयी गंगा में श्रद्धालु डुबकी लगाकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।
श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कथा व्यास बाल ब्रह्मचारी संत शिरोमणि ब्रह्मानंद दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया ।  भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे । कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया ।  संत शिरोमणि ब्रह्मानंद दास जी महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से देवराज इंद्र के अभिमान को चूर किया और समाज को यह संदेश दिया कि प्रकृति, गौ माता, पर्वत और पर्यावरण के प्रति श्रद्धा एवं संरक्षण की भावना रखना हमारा कर्तव्य है।
*वेद मंत्रों के साथ हुई गोवर्धन पूजा*
पंचम दिवस पर श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ गोवर्धन पूजा संपन्न हुई ।  विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज की पूजा-अर्चना की गई। जैसे ही मंत्रों की पवित्र ध्वनि कथा पंडाल और भैंसा खड़ पहाड़ की वादियों में गूंजने लगी, पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ भक्ति में झूमते नजर आए।
महाराज जी ने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने ब्रज में मूसलाधार वर्षा कर दी, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को धारण कर ब्रजवासियों और गौवंश की रक्षा की । अंततः इंद्र का अभिमान चूर हुआ और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की दिव्यता का अनुभव हुआ।
*प्रकृति और भक्ति का अद्भुत संगम*
भैंसा खड़ पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता कथा की आध्यात्मिकता को और भी विशेष बना रही है ।  पहाड़ों के बीच स्थित कथा स्थल पर सुबह और शाम का मनोहारी दृश्य श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।  शांत वादियों में गूंजते भजन, शंखध्वनि और हरिनाम संकीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है ।  प्रकृति की गोद में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का अनूठा केंद्र बन गई है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्र सहित दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर रहे हैं ।  पंचम दिवस की कथा और गोवर्धन पूजा ने भक्तों के मन में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का नया संचार कर दिया।

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