बारिश में टपकती छत, बदहाल शौचालय और जर्जर भवन से परेशान विधार्थी

जिम्मेदारों तक नहीं पहुंची गुहार तो बच्चों ने मोबाइल कैमरे में कैद किया स्कूल का सच
कक्षाओं में भर जाता है पानी, गीली होती है डेस्क बेंच और बच्चों के बस्ते
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत पाली स्थित शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय इन दिनों बदहाली के दौर से गुजर रहा है । विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति बारिश के दौरान छत से टपकता पानी और बदहाल शौचालय के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । हालात से परेशान विद्यार्थियों ने अब खुद मोबाइल कैमरा थामकर विद्यालय की वास्तविक स्थिति का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर जिम्मेदार अधिकारियों से समस्या का समाधान कराने की गुहार लगाई है ।
बच्चों द्वारा बनाए गए वीडियो में विद्यालय की कक्षाओं की स्थिति साफ नजर आ रही है । बारिश होने पर भवन की छत से पानी टपकने लगता है और कक्षाओं के अंदर पानी जमा हो जाता है । इससे डेस्क-बेंच गीली हो जाती हैं तथा विद्यार्थियों के बस्ते और शैक्षणिक सामग्री भी खराब होने की आशंका बनी रहती है । कई बार बच्चों को कक्षा में बैठने के लिए भी उचित स्थान नहीं मिल पाता ।
*जर्जर भवन में पढ़ाई के साथ सुरक्षा की चिंता*
विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए समस्या केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है । जर्जर भवन में प्रतिदिन कक्षाएं संचालित होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है । बारिश के दौरान स्थिति और अधिक खराब हो जाती है । बच्चों का कहना है कि वे रोज पढ़ने के लिए स्कूल आते हैं, लेकिन जब कक्षा में ही पानी टपकने लगे तो पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है ।
विद्यार्थियों द्वारा वीडियो के माध्यम से अपनी समस्या सामने लाना इस बात को दर्शाता है कि विद्यालय की मूलभूत सुविधाओं को लेकर उनकी परेशानी कितनी गंभीर है । बच्चों ने वीडियो के जरिए जिम्मेदारों से अपील करते हुए कहा कि ‘हमारी भी सुनिए साहब’, ताकि विद्यालय की समस्याओं का जल्द निराकरण हो सके ।
10 हजार रुपये की मरम्मत राशि पर उठे सवाल
विद्यालय की स्थिति को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एसएन पांडेय का कहना है कि स्कूलों में छोटी-मोटी मरम्मत के लिए 10 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है । शिक्षक को उपलब्ध राशि से आवश्यक मरम्मत का कार्य कराया जाना चाहिए था । उन्होंने कहा कि विद्यालय की समस्या की जानकारी मिलने के बाद तत्काल स्थिति दिखवाई जाएगी ।
डीईओ ने यह भी कहा कि यदि कोई कक्ष जर्जर अथवा अधिक समस्या वाला है तो वहां कक्षाएं संचालित नहीं करने के निर्देश दिए जाएंगे । अब देखना यह होगा कि विद्यालय की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कब होता है और विद्यार्थियों को राहत कब मिलती है ।
*बदहाल शौचालय से छात्र-छात्राएं परेशान*
विद्यालय की समस्या केवल भवन और छत तक सीमित नहीं है । यहां शौचालय की स्थिति भी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है । जर्जर एवं बदहाल शौचालय के कारण छात्र-छात्राओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है । खासकर छात्राओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय की सुविधा बेहद आवश्यक है, लेकिन विद्यालय में इसकी स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है ।
*शिकायत का नया तरीका बना मोबाइल कैमरा*
बताया जा रहा है कि विद्यालय की समस्याएं लंबे समय से विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने हैं । जब समस्या के समाधान की उम्मीद पूरी नहीं हुई तो विद्यार्थियों ने अपनी आवाज जिम्मेदारों और आम लोगों तक पहुंचाने के लिए मोबाइल कैमरे का सहारा लिया । बच्चों ने विद्यालय की बदहाल स्थिति को कैमरे में रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया ।
विद्यार्थियों की यह पहल अब जिम्मेदार विभाग के लिए भी सवाल खड़े कर रही है कि आखिर जिन बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी व्यवस्था की है, उनके लिए बच्चों को स्वयं कैमरा लेकर अपनी परेशानी क्यों दिखानी पड़ी ।
*अब कार्रवाई का इंतजार*
विद्यालय के विद्यार्थियों और अभिभावकों को उम्मीद है कि वीडियो सामने आने के बाद संबंधित विभाग विद्यालय भवन की स्थिति, छत और शौचालय का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराएगा । बारिश के मौसम में बच्चों की परेशानी को देखते हुए जर्जर कक्षों की मरम्मत के साथ सुरक्षित स्थान पर कक्षाएं संचालित करना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके ।



