मध्य प्रदेश

स्वामित्व निष्पादन योजना से विरत रहने पटवारी संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने जिला कलेक्टर आशीष तिवारी को ज्ञापन देकर अपनी स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के कार्यों से पटवारी संवर्ग को पूर्णतः पृथक रखा जाए।
ज्ञापन में कही गई मुख्य बातें:
1 पटवारियों को इस योजना से अलग रखा जाए –
संघ का कहना है कि ग्रामीण आबादी की भूमि का स्वरूप राजस्व कृषि भूमि से अलग है। इसका सर्वे और मैपिंग पंचायत राज विभाग के मार्गदर्शन में तकनीकी एजेंसियों ने किया है, पटवारियों ने सिर्फ सहयोगी की भूमिका निभाई है और मानदेय भी पंचायत विभाग से मिला है। अब उसी रिकॉर्ड को अंतिम रूप देकर पटवारी को “निष्पादक” बनाना न्यायसंगत नहीं है। इसमें तकनीकी और लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए।
2 पहले से पंचायत की भूमिका रही है –
आबादी क्षेत्र में पट्टा वितरण, प्रबंधन का काम पहले से जनपद पंचायत / ग्राम पंचायत करती आ रही है, इसलिए वर्तमान में भी निष्पादन और प्रशासनिक अधिकार व दायित्व पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से ही होना चाहिए। पटवारी पूरा सहयोग देंगे।
3 व्यक्तिगत कानूनी दायित्व का डर –
पंजीयन दस्तावेज पर निष्पादक के रूप में पटवारी का व्यक्तिगत नाम, पद, ID और ई-सिग्नेचर आएगा। भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, नाम, वारिसान, हिस्सेदारी के विवादों में पटवारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया जाएगा और कानूनी केस का सामना करना पड़ेगा। VC में कहा गया है कि किसी भी शिकायत पर जांच होगी, इससे पटवारी गलत रिकॉर्ड बनाने को मजबूर होंगे। जबकि पटवारी न तो भू-स्वामी है और न हस्तांतरणकर्ता ।
4 फार्मर ID को लेकर दबाव –
पहले कम समय में सबसे ज्यादा फार्मर ID बनाकर पटवारियों ने म.प्र. को केंद्र में गौरवान्वित किया है। अब जो काम बचा है वह निरंतर चलने वाला तकनीकी सुधार का काम है, लेकिन उस पर भी कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। संघ ने मांग की है कि इस पर कार्रवाई बंद कर स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।
5 JIO Tag गिरदावरी
JIO Tag के साथ गिरदावरी करना अव्यावहारिक है। इसी दबाव में एक पटवारी द्वारा आत्महत्या का उल्लेख कर शोक व्यक्त किया गया है। जब तक JIO Tag की अनिवार्यता है, पटवारी कोई भी गिरदावरी का कार्य नहीं करेंगे। कार्रवाई हुई तो आंदोलन को बाध्य होंगे।
6 लंबे समय से लंबित सेवा समस्याएं
वेतन विसंगति, ग्रेड-पे, कैडर रिव्यू, पदोन्नति, नियमितीकरण, मोबाइल/लैपटॉप, अतिरिक्त कार्य के बदले एक माह के वेतन के बराबर भत्ता जैसी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। अन्य राज्यों में कम तकनीकी कार्य पर ज्यादा वेतन है, हरियाणा ने बेसिक बढ़ा दिया है।
अंतिम निर्णय:
जब तक पुरानी मांगों का स्थायी निराकरण नहीं होता, तब तक मूल कर्तव्यों के अलावा अतिरिक्त योजनाओं का बोझ न दिया जाए।
*इसलिए दिनांक 15/09/2026 से समस्त पटवारी स्वामित्व आबादी अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में निष्पादक के दायित्व से विरत रहेंगे।
अत्यधिक दबाव बनाया गया तो प्रदेश स्तर पर कलम-बंद आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

Related Articles

Back to top button