पितृ पक्ष की शनिवार से शुरुआत होगी और शनिवार को ही समापन होगा : पं. हरिनारायण शास्त्री

रिपोर्टर : सतीश मैथिल
सांचेत । पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा. इस बार श्राद्ध पक्ष का आगाज भी शनिवार से हो रहा है और समापन भी शनिवार को ही होगा पंडित हरिनारायण शास्त्री बताते हैं हिंदू धर्म में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और तर्पण अर्पण करने के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है. भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में लोग अपने देवतुल्य पितरों की आत्मा की शांति और उनकी प्रसन्नता के लिए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज का आयोजन करते हैं पंडित हरिनारायण शास्त्री बताते है इस साल में पितृ पक्ष एक बेहद खास ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है. इस साल श्राद्ध पक्ष का आगाज भी शनिवार के दिन से हो रहा है और इसका समापन भी शनिवार को ही होगा. गणना के अनुसार, इस बार तिथियों में बिना किसी संशय के पूरे 16 दिनों का श्राद्ध मनाया जाएगा
पंडित हरिनारायण शास्त्री बताते है पितृ पक्ष की शुरुआत कब से हो रही है, इसका क्या धार्मिक महत्व है
पितृ पक्ष की शुरुआत पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर शनिवार
पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर शनिवार
धार्मिक दृष्टि से शनिवार का दिन शनि देव के साथ-साथ पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए बेहद उत्तम माना जाता है. शनिवार से आरंभ होकर शनिवार को ही समाप्त होना एक दुर्लभ योग है, जिससे इस बार श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य का फल कई गुना अधिक प्राप्त होगा.
आमतौर पर तिथियों के घटने या बढ़ने के कारण श्राद्ध पक्ष कभी 15 तो कभी 16 दिनों का होता है. लेकिन इस वर्ष में किसी भी तिथि का क्षय नहीं हो रहा है. भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर से लेकर सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर तक सभी तिथियां अपने समय के साथ आएंगी. इसी वजह से इस साल पितृ पक्ष पूरे 16 दिनों का रहेगा, जिससे जातकों को अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार तर्पण और पिंडदान करने का पूरा समय मिलेगा.
सभी श्राद्ध तिथियां
पूर्णिमा श्राद्धा- 26 सितंबर शनिवार
प्रतिपदा तिथि श्राद्ध- 27 सितंबर रविवार
द्वितीया श्राद्ध- 28 सितंबर सोमवार
तृतीया श्राद्ध- 29 सितंबर मंगलवार
चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध- 30 सितंबर बुधवार
षष्ठी तिथि का श्राद्ध- 1 अक्टूबर गुरुवार
सप्तमी तिथि का श्राद्ध- 2 अक्टूबर शुक्रवार
अष्टमी तिथि का श्राद्ध- 3 अक्टूबर शनिवार
नवमी तिथि का श्राद्ध- 4 अक्टूबर रविवार
दशमी तिथि का श्राद्ध- 5 अक्टूबर सोमवार
एकादशी तिथि का श्राद्ध- 6 अक्टूबर मंगलवार
द्वादशी तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर बुधवार
मघा तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर बुधवार
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध- 8 अक्टूबर गुरुवार
चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध- 9 अक्टूबर शुक्रवार
सर्वपितृ अमावस्या-10 अक्टूबर शनिवार
पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म से जुड़े जरूरी नियम
कुतप और रोहिणी काल का ध्यान
तर्पण और श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के कुतप काल दोपहर 11:30 बजे से 12:30 बजे के बीच में ही करने चाहिए. प्रातः काल या सूर्यास्त के बाद श्राद्ध करना शास्त्र अनुकूल नहीं माना जाता.
पंचबलि का भोग
भोजन तैयार होने पर सबसे पहले पंचबलि गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी के लिए भोजन का भाग अलग निकालें. मान्यता है कि कौवे के माध्यम से अर्पण किया गया अन्न सीधे पितरों तक पहुंचता है.
तिल, जल और कुशा
पितरों को जलांजलि देते समय जल में काले तिल, गंगाजल और कच्चा दूध मिलाएं तथा हाथ में कुशा पवित्र घास धारण करके तर्पण करें



